Political – ‘खाओ खुदा की कसम…’, टूट से बचाने के लिए बिहार में AIMIM की अनोखी पहल- #INA

बिहार में नामांकन से पहले शपथ लेंगे AIMIM के उम्मीदवार
बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतर रही एआईएमआईएम ने एक अनोखा नियम लागू किया है. पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वालों को अब खुदा या ईश्वर का साक्षी मानकर के शपथ लेना होगा कि वह पार्टी से कभी बगावत नहीं करेंगे. एआईएमआईएम ने इस विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के सामने एक अनोखी शर्त रखी है. इस पार्टी से टिकट लेने वाले प्रत्याशियों को अब ईश्वर या खुदा का साक्षी मानना होगा, साथ ही साथ यह कसम भी खानी होगी कि वह पार्टी से कभी बगावत नहीं करेंगे।
इस शपथ पत्र में उम्मीदवारों को यह कहना होगा कि मैं खुद-ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं एआईएमआईएम का सदस्य हूं. मैंने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का प्रत्याशी बनने का दावा पेश किया है. यदि पार्टी मुझे चुनाव लड़ने का मौका प्रदान करती है तो मैं पार्टी के प्रति वफादार रहते हुए चुनाव में जीत हासिल करूंगा और हमेशा पार्टी में बना रहूंगा. यदि मुझे टिकट नहीं मिलता है तो भी मैं पार्टी के इस निर्णय का कोई विरोध नहीं करूंगा और पार्टी द्वारा घोषित अधिकृत उम्मीदवार का पूर्ण समर्थन करूंगा. मैं यह शपथ खुदा-ईश्वर को साक्षी मानकर दो गवाहों के सामने ले रहा हूं.
टूट या बगावत के लिए AIMIM का नया नियम
दरअसल प्रदेश की राजनीति में यह माना जा रहा है कि एआईएमआईएम ने टूट या बगावत पर रोक लगाने के लिए इस तरीके के शपथ पत्र को अमल में लाने का फैसला किया है. दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में इस पार्टी को पांच विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन चार विधायकों ने बाद में पार्टी को छोड़कर के राजद का दामन थाम लिया था. संभवत: ओवैसी की पार्टी इस घटना को रोकने के लिए ऐसे कदम उठा रही है.
प्रदेश अध्यक्ष बोले- शपथ लेना सच्चाई का प्रतीक
वहीं, इस शपथ पत्र के बारे में बताते हुए एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि ईश्वर या अल्लाह के नाम से शपथ लेना सच्चाई का प्रतीक है. संविधान में इस बात का उल्लेख है. सरकारी महकमा में जहां जिसको जिम्मेदारी मिले, पार्लियामेंट में या फिर असेंबली में तो उनको शपथ दिलाई जाती है.
‘शपथ लेने में आसानी होगी…’
उन्होंने आगे कहा कि हम यह चाहते हैं कि एआईएमआईएम के लोग या कार्यकर्ता और जो लोग हमारे प्रत्याशी हैं, वह चुनाव लड़े. हम उनके लिए ईश्वर या भगवान से दुआ करेंगे कि वह जीत जाए. जब वह पार्टी के दफ्तर में अपनी दरखास्त देते हुए शपथ ले लेंगे, कल को अगर असेंबली में वह जाएंगे तो उनको शपथ लेने में आसानी होगी. इसलिए हम शपथ दिलवा रहे हैं. जहां तक टीका टिप्पणी करने वालों की बात है तो हमारे धर्मगुरु जब पार्लियामेंट में गए तो उन्होंने अल्लाह के नाम से हलफ दिया. हलफ लेना गैर कानूनी नहीं बल्कि सच्चाई का प्रतीक है.
‘खाओ खुदा की कसम…’, टूट से बचाने के लिए बिहार में AIMIM की अनोखी पहल
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