Political – Exit Poll 2025: एग्जिट पोल कितना होता है सही… कब-कब चुनावी सर्वे ने दिया धोखा, जानें पूरा इतिहास- #INA

Exit Poll 2025: एग्जिट पोल कितना होता है सही... कब-कब चुनावी सर्वे ने दिया धोखा, जानें पूरा इतिहास

बिहार में दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के बाद एग्जिट पोल आने लगेंगे.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग के साथ ही अब हर किसी को 14 नवंबर की मतगणना का इंतजार है. हालांकि मतगणना से पहले अब हर किसी की नजर उस एग्जिट पोल पर है जिससे अंदाजा लगाया जाएगा कि इस बार राज्य में किसकी सरकार बनने वाली है. दूसरे चरण की मतगणना खत्म होने के साथ ही शाम से कई टीवी चैनल और सर्वे एजेंसियां अपने अनुमान जारी कर देंगी. आम मतदाता से लेकर बड़े-बड़े राजनीतिक चेहरों तक, सभी के मन में सिर्फ एक सवाल है- बिहार में अगली सरकार किसकी बनेगी?

एग्जिट पोल चुनाव परिणामों के अनुमान भर होते हैं, लेकिन चुनावी मौसम में इन्हें लेकर उत्साह हमेशा चरम पर रहता है. सोशल मीडिया, राजनीतिक जमघटों और खबरिया बहसों में इसी पर चर्चा जारी है.

क्यों उठते हैं एग्जिट पोल पर सवाल?

पिछले कई चुनावों के अनुभव बताते हैं कि एग्जिट पोल हर बार सटीक साबित नहीं होते. कई मौकों पर अनुमान और असली नतीजे एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत रहे हैं. यही वजह है कि इस बार भी लोग उत्सुक तो हैं, लेकिन पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे. 2015 और 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में भी एग्जिट पोल्स ने जिस तरह के आंकड़े पेश किए थे, नतीजे उससे बिल्कुल उलट थे. आइए ऐसे ही कुछ और चुनावों के एग्जिट पोल पर नजर डालें तो परिणाम में तब्दील नहीं हो सके.

जब एग्जिट पोल पूरी तरह चूक गए :-

एग्जिट पोल हर चुनाव में लोगों की उत्सुकता का केंद्र होते हैं. ये सर्वे मतदान के तुरंत बाद जारी होते हैं और यह अंदाज़ा लगाने की कोशिश करते हैं कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं. लेकिन समय-समय पर ऐसे कई मौके आए जब एग्जिट पोल पूरी तरह गलत साबित हुए और असली परिणा उनके आंकड़ों से बिल्कुल उलट सामने आए हैं.

2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव

2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव इसका एक ताज़ा उदाहरण है. मतदान समाप्त होने के बाद लगभग सभी बड़े एग्जिट पोल ने यह दावा किया था कि कांग्रेस आसानी से सत्ता में वापसी करेगी. लगभग हर अनुमान में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाया गया. लेकिन जब मतगणना शुरू हुई तो नतीजे बिल्कुल उलटे साबित हुए. भारतीय जनता पार्टी ने 50 से ज़्यादा सीटें जीतते हुए सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया. यह परिणाम देश के राजनीतिक विश्लेषकों और सर्वे एजेंसियों के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि एग्जिट पोल में इस तरह की जीत का संकेत कहीं नहीं था.

2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव

दिल्ली के 2015 विधानसभा चुनाव की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. यहां आम आदमी पार्टी के लिए जीत के संकेत जरूर दिए गए थे, लेकिन कोई भी सर्वे यह कल्पना नहीं कर पाया था कि यह जीत एक सुनामी का रूप ले लेगी. आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटें मिलीं, जो भारतीय चुनाव इतिहास की सबसे बड़े जनादेशों में से एक के रूप में दर्ज हुई. एग्जिट पोल ने अधिकतम 50 सीटें तक का अनुमान लगाया था, लेकिन नतीजों ने सारे गणित को किनारे कर दिया.

2015 बिहार विधानसभा चुनाव

इसी तरह 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल ने एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला दिखाया था. लेकिन नतीजों में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला महागठबंधन भारी बहुमत के साथ विजेता बनकर उभरा. राजद उस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई, जबकि एनडीए स्पष्ट रूप से पीछे रह गया. यह परिणाम भी एग्जिट पोल के लिहाज से पूरी तरह से बदला हुआ दिखाई पड़ा.

2024 के लोकसभा चुनाव

2024 के लोकसभा चुनाव में तो एग्जिट पोल और नतीजों के बीच का अंतर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया. कई एग्जिट पोल्स ने यह छवि बनाई कि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए 400 से अधिक सीटों तक पहुंच सकता है. लेकिन जब नतीजे घोषित हुए, तो गठबंधन 293 सीटों तक सीमित रह गया. बीजेपी की सीटें भी 2019 की तुलना में काफी कम 240 रह गईं. इस चुनाव में विपक्षी INDIA गठबंधन ने कई क्षेत्रों में मजबूत वापसी की और यह दिखाया कि सार्वजनिक राजनीतिक लहर और मतदाता की वास्तविक पसंद हमेशा एक जैसी नहीं होती.

2024 हरियाणा विधानसभा चुनाव

हरियाणा के 2024 विधानसभा चुनाव में भी यही पैटर्न दोहराया गया. जहां अधिकांश एग्जिट पोल्स ने कांग्रेस को बहुमत में दिखाया था, वहीं परिणामों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. इस एग्जिट पोल में कांग्रेस को 44 से 64 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था जबकि बीजेपी को सिर्फ 15 से 32 सीटें मिलने का अनुमान था. लेकिन बीजेपी ने 48 सीटें जीत लीं और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.

उत्तर प्रदेश 2017 विधानसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनाव को भी याद किया जाना चाहिए, जब लगभग सभी सर्वेक्षण हंग विधानसभा की बात कर रहे थे. लेकिन नतीजों में बीजेपी ने 300 से अधिक सीटें जीतकर ऐसा बहुमत हासिल किया, जिसकी कल्पना किसी भी एग्जिट पोल ने नहीं की थी. इससे स्पष्ट हुआ कि राजनीतिक माहौल को आंकने में कई बार ज़मीन की सच्चाई और सर्वेक्षणों के नमूनों के बीच भारी अंतर रह जाता है.

2014 लोकसभा चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में एग्जिट पोल ने एनडीए को बहुमत के करीब बताया था. लेकिन नतीजों में बीजेपी ने अकेले 282 सीटें जीतकर वह ऐतिहासिक परिणाम दिया, जिसने भारतीय राजनीति के कई दशकों की दिशा बदल दी. वहीं 2004 के आम चुनाव में एग्जिट पोल ने एनडीए की जीत का दावा किया था, लेकिन सत्ता कांग्रेस गठबंधन के हाथ में चली गई थी.

यह उन सबसे बड़े उदाहरणों में से एक है जब एग्जिट पोल ज़मीन के वास्तविक राजनीतिक वातावरण को समझ पाने में असफल रहे. ऐसे में यह सच साबित होता है कि एग्जिट पोल वास्तव में एक संकेत भर होते हैं, एक अंदाज़ा, जो कभी सही भी हो सकता है और कभी पूरी तरह गलत भी. जब तक असली मतगणना नहीं होती, कोई भी अनुमान सच्चाई नहीं होता.

Exit Poll 2025: एग्जिट पोल कितना होता है सही… कब-कब चुनावी सर्वे ने दिया धोखा, जानें पूरा इतिहास

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