Political – Exit Poll vs Opinion Poll: एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल में क्या है अंतर, बिहार चुनाव परिणाम से पहले फिर चर्चा? जानिए सबकुछ- #INA

आसान भाषा में जानें एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल में अंतर
बिहार में अगले पांच साल किसकी होगी सरकार? ये तय करने के लिए राज्य में दो चरणों में मतदान कराए जा रहे हैं. 121 सीट पर पहले चरण के लिए मतदान 6 नवंबर को किया जा चुका है, जबकि दूसरे चरण की 122 सीटों पर वोटिंग 11 नवंबर को होगी. इसके बाद 14 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे. हालांकि नतीजों से पहले ही 11 नवंबर की शाम से टीवी चैनलों पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो जाएगी, क्योंकि इस दिन अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने एग्जिट पोल पेश करेंगी.
इन्हीं एग्जिट पोल को देखकर लोग अनुमान लगाते हैं कि बिहार में किस पार्टी की सरकार बनने के आसार हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर एग्जिट पोल होते क्या हैं और यह कैसे तैयार किए जाते हैं.
चुनाव के बीच कैसे होता है एग्जिट पोल?
एग्जिट पोल को सरल भाषा में समझें तो यह एक चुनावी सर्वे है, जो वोटिंग के दिन ही किया जाता है. जब कोई व्यक्ति मतदान केंद्र पर वोट डालकर बाहर निकलता है, तो सर्वे एजेंसी के प्रतिनिधि उससे कुछ सवाल पूछते हैं. उनसे यह जानने की कोशिश की जाती है कि उन्होंने किस उम्मीदवार या किस पार्टी को वोट दिया. यह बातचीत काफी सामान्य तरीके से होती है, ताकि वोटर को किसी दबाव का एहसास न हो.
कई बार मतदाता अपनी पहचान गुप्त रखते हुए एक पर्ची या छोटे फॉर्म में अपनी पसंद लिखकर एक बॉक्स में डाल देते हैं. यह तरीका इसलिए अपनाया जाता है, ताकि मतदाता खुलकर अपनी राय दे सकें. इन सभी जवाबों को इकट्ठा करके बाद में उनका विश्लेषण किया जाता है और अनुमान लगाया जाता है कि किस पार्टी के पक्ष में कितना जनसमर्थन है.
कितने लोगों से किए जाते हैं सवाल?
एग्जिट पोल में यह तय नहीं होता कि किससे पूछना है. वोट डालकर बाहर निकलते किसी भी मतदाता से सवाल किया जा सकता है. एक मजबूत एग्जिट पोल के लिए आम तौर पर 30 हजार से लेकर एक लाख तक मतदाताओं से बात की जाती है. कोशिश यह होती है कि सर्वे में हर क्षेत्र, हर जाति, हर उम्र और हर वर्ग के लोग शामिल हों. जितना बड़ा डेटा इकट्ठा होता है, उतना ही अनुमान सही होने की संभावना बढ़ जाती है.
ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल में क्या होता है अंतर?
ओपिनियन पोल : ओपिनियन पोल कराने वाली एजेंसियां चुनाव से पहले इस सर्वे को कराती है. इसमें उन सभी लोगों को शामिल किया जाता है जो मतदाता है और जो नहीं है. इस सर्वे में चुनावी मुद्दों को अहमियत दी जाती है. ओपिनियन पोल के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के अहम मुद्दों के बारे में जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश की जाती है. इस सर्वे के जरिए यह जानने की कोशिश होती है कि जनता के मन में सत्ताधारी पार्टी के प्रति नाराजगी है या फिर वो उसके काम से पूरी तरह से संतुष्ट हैं.
एग्जिट पोल: एग्जिट पोल वोटिंग के तुरंत बात कराया जाता है. इस सर्वे में केवल मतदाताओं को ही शामिल किया जाता है जो चुनाव के दौरान मतदान करके वापस लौट रहे होते हैं. एग्जिट पोल निर्णायक दौर में होता है. इसके जरिए अनुमान लगाया जाता है कि इस बार सत्ता में किस दल का दबदबा दिखाई पड़ रहा है और जनता ने किस पार्टी पर अपना भरोसा जताया है. एग्जिट पोल का प्रसारण मतदान के पूरी तरह से खत्म होने के बाद ही किया जाता है. बता दें कि 11 नवंबर को मतदान पूरी तरह से खत्म होने के बाद एग्जिट पोल दिखाए जाएंगे.
कब और कैसे शुरू हुई सर्वे की यह परंपरा
- दुनिया में चुनाव सर्वे की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में हुई. वहां जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने जनता की राय जानने के लिए ओपिनियन पोल करना शुरू किया. बाद में यह पद्धति ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों में फैल गई.
- एग्जिट पोल की शुरुआत नीदरलैंड में समाजशास्त्री मार्सेल वॉन डैम ने 1967 में की थी और उनकी भविष्यवाणी उस चुनाव में बिलकुल सही साबित हुई थी.
- भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन के प्रमुख एरिक डी कोस्टा ने की.
- 1996 और 1998 के चुनावों में एग्जिट पोल ने खूब चर्चा बटोरी और पहली बार टीवी पर इसे प्रसारित किया गया.
क्या एग्जिट पोल हमेशा सही होते हैं?
एग्जिट पोल सिर्फ एक अनुमान होते हैं, कोई अंतिम नतीजा नहीं हैं. कई बार मतदाता अपनी वोट की पसंद बताने में हिचकते हैं या गलत जानकारी देते हैं. कई बार सीटों का अंतर बहुत कम होता है, जिससे अनुमान बदल सकता है. इसलिए एग्जिट पोल को केवल रुझान माना जाता है. असली फैसला 14 नवंबर को मतगणना के दौरान ही सामने आएगा. इसलिए एग्जिट पोल देखना दिलचस्प जरूर होता है, लेकिन इसे परिणाम बिल्कुल भी नहीं माना जा सकता.
Exit Poll vs Opinion Poll: एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल में क्या है अंतर, बिहार चुनाव परिणाम से पहले फिर चर्चा? जानिए सबकुछ
[ad_2]
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
[ad_1]
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,










