Political – पटना से गहलोत की एक घोषणा ने कैसे नीतीश और BJP को दे दी टेंशन?- #INA

अशोक गहलोत, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव.
बिहार में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर चल रहे घमासान के बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत पटना पहुंचते हैं. राजद नेता तेजस्वी यादव से उनकी बातचीत होती है और यह निर्धारित होता है कि गुरुवार को महागठबंधन के सभी पार्टियां संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक गहलोत ने बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार करते हैं और उनके साथ, वीआईपी नेता मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाता है. साथ ही अशोक गहलोत ने यह सवाल कर भाजपा और नीतीश कुमार की टेंशन बढ़ा दी कि महागठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव हैं, लेकिन एनडीए के सीएम फेस कौन हैं?
अशोक गहलोत और तेजस्वी यादव ने सवाल किया कि पिछले चुनाव के दौरान एनडीए नीतीश कुमार को सीएम फेस बताती रही है, लेकिन इस चुनाव में नीतीश कुमार को सीएम फेस नहीं बताया जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है और चुनाव के बाद निर्वाचित विधायक विधायक दल के नेता का चयन करेंगे.
तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को एनडीए का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार न बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए दावा किया कि भाजपा नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी. उन्होंने साफ कहा कि चुनाव के बाद जदयू समाप्त हो जाएगी.
तेजस्वी का नीतीश पर तो भाजपा का राहुल पर वार
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रविशंकर प्रसाद ने तेजस्वी यादव और अशोक गहलोत के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोस्टरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर शामिल न करने पर राजद नेता तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि यहां विपक्षी गठबंधन “बहुत कमजोर” है और इसमें दोस्ताना लड़ाई में शामिल पार्टियां शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि महागठबंधन का कोई मिशन या विजन नहीं है. इसमें केवल विभाजन और भ्रम है. आज महागठबंधन एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर केवल तेजस्वी यादव की तस्वीरें देखी जा सकती हैं. कल तक पप्पू यादव दावा कर रहे थे कि राहुल गांधी महागठबंधन का चेहरा हैं. कल तक कांग्रेस बड़ा भाई होने का दावा कर रही थी, लेकिन अब वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं. “
खींचतान के बीच तेजस्वी सीएम फेस घोषित
तेजस्वी यादव लंबे समय से खुद को महागठबंधन का मुख्यमंत्री फेस बता रहे थे. कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कई बार ये सवाल पूछे गए थे, लेकिन राहुल गांधी हर बार सवाल टालते रहे थे. हालांकि तेजस्वी यादव ने वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी को प्रधानमंत्री फेस बता दिया था.
लेकिन सीट बंटवारे तक कांग्रेस की ओर से तेजस्वी यादव को सीएम फेस बनाए जाने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी और अब जब सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन में खींचतान चल रही थी और महागंठबंधन में फूट की बात होने लगी थी तो फिर से तेजस्वी यादव को सीएम फेस बताया गया.
नीतीश के सीएम फेस पर उठे सवाल
हालांकि तेजस्वी यादव ने सीएम फेस के ऐलान पर सहयोगी पार्टियों को धन्यवाद दिया और मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि हमसे ज्यादा इस घोषणा का इंतजार आपको था, लेकिन इसके साथ ही नीतीश कुमार और एनडीए पर हमला बोलते हुए कहा कि एनडीए का सीएम फेस इस बार कौन है? अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में भाजपा ने लड़ा था, लेकिन बाद में वहां सीएम भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस को बना दिया गया. उन्होंने बिहार को लेकर भी यही आशंका जताई.
बिहार में एनडीए में सीएम फेस को लेकर चुनाव से पहले ही सवाल उठते रहे हैं, लेकिन भाजपा ने हर बार इसे खारिज कर दिया है और कहा कि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ रही है, लेकिन विपक्षी पार्टी यह सवाल कर रहे हैं कि एनडीए चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है, लेकिन यह साफ नहीं कर रही है कि चुनाव के बाद यदि वो जीतते हैं कि नीतीश कुमार ही सीएम होंगे? तेजस्वी और अशोक गहलोत ने इस सवाल से चुनाव प्रचार का नैरेटिव सेट कर दिया और इस चुनाव में सीएम फेस पर अब घमासान मचने के आसार हैं.
भाजपा ने क्यों नहीं नीतीश को बताया सीएम फेस? ये है वजह
हालांकि वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ओमप्रकाश अश्क नीतीश कुमार के सीएम फेस को लेकर सवाल पर कहते हैं कि बिहार में भाजपा नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ती रही है. साल 2020 के चुनाव के बाद ऐसी स्थिति आई कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और जदयू तीसरे नंबर पर रही. ऐसे में भाजपा का कोई नेता सीएम हो सकता था, लेकिनभाजपा ने नीतीश कुमार को सीएम पद की कुर्सी सौंप दी, जबकि नीतीश कुमार इससे इनकार करते रहे. ऐसे में इस चुनाव से पहले यह बताना कि नीतीश कुमार ही सीएम होंगे. भाजपा जरूरी नहीं समझती है.
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने जितने राज्यों में चुनाव लड़ी है, उसमें पीएम मोदी का चेहरा सामने रखा है, कहीं भी सीएम पद के चेहरे का ऐलान नहीं किया है. सीएम पद का ऐलान चुनाव परिणाम के बाद ही हुआ है, लेकिनविपक्ष पर जिस तरह से एनडीए के नेता हमलावर थे. महागठबंधन में तालमेल की कमी के आरोप लग रहे थे. खुद तेजस्वी यादव बार-बार खुद को सीएम पद का चेहरा बता रहे थे. ऐसे में कांग्रेस को अंत में तेजस्वी को सीएम पद का चेहरा घोषित करना पड़ा.
पटना से गहलोत की एक घोषणा ने कैसे नीतीश और BJP को दे दी टेंशन?
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