Political – नई रणनीति से बिहार फतह की तैयारी में महागठबंधन, NDA से कितना बदला दिख रहा पैटर्न?- #INA

नई रणनीति से बिहार फतह की तैयारी में महागठबंधन, NDA से कितना बदला दिख रहा पैटर्न?

बिहार विधानसभा चुनाव में नई रणनीति के साथ उतरेगा महागठबंधन.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है. एनडीए के घटक दलों ने जहां अपनी सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, वहीं महागठबंधन के दल भी धीरे-धीरे अपने पत्ते खोलने लगे हैं. इस बार विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन नई रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरते दिखाई दे रहे हैं. दोनों ही गठबंधन के उम्मीदवारों की लिस्ट से ही उनकी बदली हुई रणनीति की झलक देखी जा सकती है. लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन से सबक लेते हुए एनडीए ने जहां कुशवाहा जाति पर फोकस किया है तो वहीं महागठंधन ने अभी तक जितने भी उम्मीदवारों की घोषणा की है, उसमें कुशवाहा समाज को कम जबकि भूमिहार समाज से आने वाले नेताओं की उपस्थिति ज्यादा दिखाई देती है.

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन और एनडीए ने अपनी-अपनी जीत पक्की करने के लिए नई रणनीति के साथ उतरने का फैसला किया है. चुनाव में जहां जेडीयू एक बार फिर लवकुश समीकरण को साधती हुई दिख रही है तो वहीं आरजेडी अपने पुराने एमवाई समीकरण पर फोकस करती नजर आ रही है. आइए जानते हैं कि एनडीए और महागठबंधन किस-किस समाज के उम्मीदवारों पर फोकस कर रहे हैं.

महागठबंधन में कुशवाहा समाज की उम्मीदवारों की घटी संख्या

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन इस बार कुशवाहा समाज की जगह भूमिहार पर फोकस करता दिख रहा है. यही कारण है कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार कुशवाहा उम्मीदवारों की संख्या कम होती दिख रही है. महागठबंधन में अभी केवल 12 कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट दिया है जबकि 17 भूमिहार उम्मीदवारों को टिकट दिया जा चुका है.

243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में महागठबंधन में जिस तरह से सीटों का बंटवारा किया है उसमें आरजेडी को 135, कांग्रेस को 61, वीआईपी को 16 और वामपंथी दलों को 31 सीटें मिली हैं. कांग्रेस ने 61 सीट में से 48 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, वहीं आरजेडी ने 135 सीटों में से 48 सीटों पर ही उम्मीदवारों की घोषणा की है. अभी तक आई उम्मीदवारों की लिस्ट को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि महागठबंधन एनडीए के बराबर भी कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट नहीं दे सकेगा.

Nda Candidate

पीएम मोदी, अमित शाह, सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार.

एनडीए ने 23 कुशवाहा उम्मीदवारों को दिया टिकट

लोकसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए एनडीए ने बिहार विधानसभा चुनाव में कुशवाहा जाति पर फोकस किया है. एनडीए, जदयू से लेकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा तक ने कुशवाहा जाति के उम्मीदवारों को टिकट दिया है. लोकसभा चुनाव में औरंगाबाद, काराकाट, आरा और बक्सर जैसी सीटों पर लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी ने कुशवाहा वोटों में सेंधमारी कर दी थी, जिससे एनडीए का समीकरण बिगड़ गया और चारों सीटों पर एनडीए को हार का सामना करना पड़ा.

भाजपा ने इस बार के विधानसभा चुनाव में 7 कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट दिया है जबकि जदयू ने 13 और रालोमो ने 6 सीट में से 3 सीटों पर कुशवाहा उम्मीदवार उतारे हैं. बता दें कि साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में कुशवाहा मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग महागठबंधन की ओर शिफ्ट हो गया था जिसके कारण दक्षिण बिहार में एनडीए को बड़ा झटका लगा था.

NDA में किस पार्टी को कितनी सीट

बता दें कि NDA में बीजेपी, जदयू, लोजपा (रा), हम और रालोमो शामिल हैं. इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जदयू 101-101 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी है. इसी तरह चिराग पासवान की पार्टी ने 29 जबकि जीतन राम मांझी की हम पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो 6-6 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है.

2020 के चुनाव में कैसे बदला था समीकरण

साल 2020 में हुआ बिहार विधानसभा चुनाव तीन चरणों में हुआ था. पहले चरण में दक्षिण और दक्षिण पूर्ण बिहार के इलाकों में चुनाव हुए जिसमें महागठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया था और 71 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की थी. पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की लड़ाई देखने को मिली थी और महज कुछ सीटों की बढ़त के साथ नीतीश कुमार, सरकार बनाने में सफल रहे थे. पहले चरण में 14 जिलों की 71 सीटों पर चुनाव हुआ था जिनमें से 48 सीटों पर महागठबंधन को जीत मिली थी जबकि एनडीए को केवल 21 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. इन 48 सीटों में से 33 पर आरजेडी, 8 पर कांग्रेस और 7 सीटों पर सीपीआईएमएल ने जीत हासिल की थी. 14 में 6 जिले ऐसे थे जिनमें एनडीए का सूपड़ा साफ हो गया था.

चिराग और कुशवाहा से हुआ था एनडीए को नुकसान

पिछले विधानसभा चुनाव के पहले चरण में महागठबंधन की बंपर जीत की वजह चिराग पासवान की एलजेपी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी थी. हालांकि दोनों पार्टियां इस बार के विधानसभा चुनाव में एनडीए का हिस्सा हैं जबकि पिछली बार दोनों न एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था. जिन 48 सीटों पर इंडिया गठबंधन को जीत हासिल हुई थी उनमें से 20 सीटें ऐसी थीं जिसमें जीत का अंतर एलजेपी को मिले वोटों से कम था जबकि तीन सीटों पर एलजेपी दूसरे नंबर पर रही थी, वहीं 3 सीटें ऐसी रहीं जिस पर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को मिले वोट इंडिया गठबंधन की जीत के अंतर से ज़्यादा रहे.

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