Political – क्या 2015 में नीतीश कुमार और लालू को साथ लाने का पछतावा है? प्रशांत किशोर ने दिया ये जवाब- #INA

क्या 2015 में नीतीश कुमार और लालू को साथ लाने का पछतावा है? प्रशांत किशोर ने दिया ये जवाब

जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर

जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर उन्हें कोई पछतावा नहीं है. साल 2015 में उनके साथ काम करने को लेकर कोई पछतावा नहीं है और न ही आज उनका विरोध करने पर कोई पछतावा है. उनका कहना है कि उन्होंने जिन नीतीश कुमार की मदद 2015 में की थी तब उनकी छवि सुशासन वाले नेता की थी, वो राजनीतिक लोकलाज का ख्याल रखते हैं, लेकिन अब उनके साथ ऐसा नहीं है.

टीवी9 डिजिटल के साथ एक खास इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने लालू यादव और सीएम नीतीश कुमार को फिर से साथ लाने से जुड़े सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. साल 2015 में नीतीश और लालू को साथ लाने और किसी तरह के पछतावे से जुड़े सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा, “नहीं, ऐसा नहीं है. 2015 में नीतीश कुमार की मैंने मदद की. वो मदद इसलिए की क्योंकि बिहार की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी. बिहार से जुड़ा होने के नाते मैंने लालू का जंगल राज देखा था. नीतीश कुमार का 2005 के बाद का शासन देखा. शुरुआती 6-7 सालों में मैंने देखा कि बिहार में सुधार हो रहा है. नीतीश 2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार में बुरी तरह से हार गए. उनकी पार्टी को महज 2 सीटें ही आईं.”

मैं आज के नीतीश का विरोध कर रहाः प्रशांत

उन्होंने आगे कहा, “उसके बाद (लोकसभा में खराब प्रदर्शन) नीतीश कुमार ने पद छोड़ दिया और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया. उसी दौर में किसी ने मुझे नीतीश कुमार से दिल्ली में मिलाया. जब नीतीश कुमार से मुलाकात हुई तब मैंने उनसे पूछा कि आप मुख्यमंत्री थे, बिहार में सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई थी तो आपने पद छोड़कर मांझी को सीएम क्यों बना दिया, इस पर उन्होंने कहा, “हमने इतना काम किया फिर भी हमारी पार्टी चुनाव हार गई, तो हम किस मुंह से मुख्यमंत्री के पद पर रहें. जबकि मेरा कहना था कि चुनाव में जनता ने आपको लोकसभा में हराया था विधानसभा में हराया नहीं. आपको यह अधिकार भी नहीं है कि जनता ने आपको सीएम चुना और आप किसी और को बना दीजिए.”

प्रशांत किशोर ने आगे कहा, “तब यह तय हुआ कि आप वापस मुख्यमंत्री बनिए, मैं उनकी जो मदद कर सकता था वो किया. जिन नीतीश कुमार की मदद की थी 2015 में उनकी छवि थी सुशासन की. उन नीतीश की जो संवेदनशील प्रशासक थे. वो राजनीतिक लोकलाज को मानने वाले नेता थे. लेकिन आज जिन नीतीश कुमार का विरोध कर रहा हूं जिनके शासनकाल को बिहार का भ्रष्टतम सरकार बताई जा रही है. ये वो नीतीश हैं जिन्होंने राजनीतिक लोकलाज को ताक पर रखी दिया कभी वो लालटेन के साथ जाते हैं तो कभी कमल के साथ. किसी भी तरीके से चुनाव में हार के बाद भी वह मुख्यमंत्री बने हुए हैं.”

जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने नीतीश पर हमला करते हुए कहा, “2014-15 के नीतीश कुमार और आज के नीतीश कुमार में जमीन-आसमान का अंतर है. प्रशासक के तौर पर, नेता के तौर पर और व्यक्ति के तौर पर. मुझे कोई अफसोस नहीं है कि मैंने उनकी 2015 में मदद की, क्योंकि तब के दौर में नीतीश कुमार बेहतर विकल्प थे और आज मुझे कोई अफसोस नहीं है कि मैं नीतीश कुमार का विरोध कर रहा हूं.”

सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर का बड़ा हमला

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी हमला करते हुए कहा, “आप उपमुख्यमंत्री हैं. मैं कैमरे के सामने कह रहा हूं कि 1998 से पहले वहां पर सदानंद सिंह वहां पर कांग्रेस के प्रत्याशी थे, उनकी 6 लोगों के साथ हत्या कर दी गई. आप उस मामले में नामजद अभियुक्त बनाए गए. हम लोगों के पास जो खबर है कि आप जेल गए. कोर्ट से आपको राहत तब मिली जब आपने साबित किया कि आप नाबालिग हैं. इस बात की चर्चा उन्होंने न अपने हलफनामे में की और न ही सार्वजनिक तौर पर की, अगर यह गलत बात है कि आपको अपनी बात रखनी चाहिए.”


सम्राट चौधरी की पढ़ाई को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा, “उन्होंने 1998 के अपने हलफनामे में लिखा कि वो सातवीं पास हैं. बाद में वह लिखते हैं कि कामराज यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं.यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से डॉक्टरेट भी की है. जबकि सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज में दर्ज है कि 1998 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का कहना है कि सम्राट चौधरी (तब यही नाम लिखते थे सम्राट कुमार मौर्य) ने तब परीक्षा दी थी, लेकिन वो फेल हो गए थे. उन्होंने कहा कि मेरा सीधा सवाल यही है कि 1998 के बाद किस साल उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की.

क्या 2015 में नीतीश कुमार और लालू को साथ लाने का पछतावा है? प्रशांत किशोर ने दिया ये जवाब

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