Political – खेसारी लाल, मैथिली ठाकुर, रितेश पांडे… बिहार चुनाव में सुरों का ‘संग्राम’, जानें गायकों की एंट्री के सियासी मायने- #INA

खेसारी लाल, मैथिली ठाकुर, रितेश पांडे... बिहार चुनाव में सुरों का 'संग्राम', जानें गायकों की एंट्री के सियासी मायने

खेसारी लाल, मैथिली ठाकुर और रितेश पांडे.

बिहार चुनाव की बिसात बिछ चुकी है और विभिन्न राजनीतिक दल के नेता चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं और बिहार के विकास के वादे किए जा रहे हैं, लेकिन इस सियासी मैदान में सुरों का भी संग्राम मचा हुआ है. सियासत के हैवीवेट किरदारों के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में गायकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके और अपने सुरों से सभी को लुभाने वाले कई सिंगर भी चुनावी मैदान में हैं और चुनाव प्रचार के दौरान उनके गीत मतदाताओं को लुभा रहे हैं.

राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने की होड़ में मुख्य पार्टियां गायकों और फिल्मी हस्तियों पर अपनी किस्मत दांव पर लगाते रही हैं. इन फिल्मी हस्तियों के लाखों प्रशंसक हैं, जो इनकी कला के मुरीद हैं. इन हस्तियों के जरिए राजनीतिक पार्टियों लाखों लोगों तक ऑफलाइन और ऑनलाइन पहुंच रहे हैं और उन्हें वोट की अपील कर रहे हैं.

विधानसभा चुनाव से पहले भोजपुरी सिंगर पवन सिंह का नाम प्रस्तावित उम्मीदवार के रूप में उछला था, लेकिन अंत में पत्नी से विवाद के कारण उन्हें चुनावी दौड़ से खुद पीछे हटना पड़ा, लेकिन अब बिहार चुनाव में भोजपुरी सुपर स्टार खेसारी लाल यादव, लोकगायिका मैथिली ठाकुर और अभिनेता-गायक रितेश पांडे चुनावी मैदान में हैं और अपनी लोकप्रियता को भुनाने की हर कोशिश कर रहे हैं.

तेजस्वी के बिना सुधार न होई… खेसारी के गानों की धूम

राजद ने छपरा सीट पर भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव पर दांव लगाया है, जहां उनका मुकाबला भाजपा की छोटी कुमारी से है. 2020 और 2015 में इस सीट से राजद रणधीर कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह भाजपा के डॉ सीएन गुप्ता से पराजित हुए थे. इस बार तेजस्वी यादव ने भाजपा को मात देने के लिए खेसारी लाल यादव को चुनाव मैदान में उतारा है.

Khesari Lal Yadav 5

इस बार खेसारी का करिश्मा और प्रशंसक वर्ग चर्चा का विषय बना हुआ है. उनके चुनावी गीत, जैसे “तेजस्वी के बिना सुधार न होई, लालू बिना चालू बिहार न हुई,” सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं, युवा समर्थकों में जोश भर रहे हैं और सभी प्लेटफॉर्म पर छाए हुए हैं.

लोकगीतों से वोटरों को लुभा रही हैं मैथिली ठाकुर

वहीं, भाजपा ने दरभंगा की अलीनगर सीट से लोक गायिका मैथिली ठाकुर को राजद के बिनोद मिश्रा के खिलाफ मैदान में उतारा है. छठ और लोकगीतों के माध्यम से ठाकुर की सांस्कृतिक गूंज मैथिल ब्राह्मण वोट बैंक को आकर्षित करती रही है. मैथिली ठाकुर को चुनावी मैदान में उतार कर भाजपा ने महिला उम्मीदवार के साथ-साथ मैथिलाचंल को लुभाने का कार्ड खेला है.

Maithali Thakur Ali

इसके साथ ही बेहद महत्वपूर्ण करगहर सीट पर जन सुराज के प्रशांत किशोर ने मौजूदा कांग्रेस विधायक संतोष कुमार मिश्रा और जदयू के बशिष्ठ सिंह को चुनौती देने के लिए अभिनेता-गायक रितेश पांडे को चुनावी मैदान में उतारा है. पांडे का आधिकारिक पार्टी गीत, “हर घर की आवाज बरुए, आने वाला जन सुराज बरुए,” पहले से ही ऑनलाइन लोकप्रियता हासिल कर रहा है. यह समर्थन जुटाने में डिजिटल अभियानों के बढ़ते महत्व का संकेत देता है.

तीनों हस्तियों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाखों फॉलोअर्स हैं, जो एक नए चुनावी रणनीति को दर्शाता है. इन हस्तियों का करिश्मा, मीडिया अपील और वायरल कंटेंट पारंपरिक राजनीतिक कार्यों पर भारी पड़ सकते हैं.

हस्तियों के प्रशंसकों को लुभाने की रणनीति

राजनीतिक विश्लषेक और वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क कहते हैं कि लोकसभा के साथ राज्यसभा की परिकल्पना संविधान निर्माताओं ने इसलिए की थी कि ताकि समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट लोगों को वहां प्रतिनिधित्व दिया जा सके, लेकिन बाद के दिनों में राजनीतिक दलों ने इनके प्रशंसकों को देखते हुए इनका मूल्याकंन करना शुरू कर दिया. खासकर फिल्मी हस्तियां और गायक न केवल उम्मीदवार बनाए जाने लगे, बल्कि चुनाव प्रचार में भी इनका इस्तेमाल होने लगा.

Ritesh Pandey Actor Bhojpuri

उन्होंने कहा किचुनाव जीतने के लिए इनकी लोकप्रियता को हथियार बनाया जाता है. वर्तमान में मनोज तिवारी, रवि किशन जैसे कई अभिनेता और गायक जनप्रतिनिधि हैं. इससे पहले भी कई अभिनेताओं ने चुनाव लड़ा है और जीत भी हासिल की है. कुल मिलाकर इन फिल्मी हस्तियों के प्रशंसकों का लाभ राजनीति दलों का मिल सके, इसलिए इनका चुनाव में इस्तेमाल होता है.

हस्तियों की राजनीति में एंट्री का विरोध

हालांकि एक वर्ग इन हस्तियों की राजनीति में एंट्री का विरोध भी करता रहा है. मैथिली ठाकुर के राजनीति में एंट्री को लेकर कई सवाल उठे हैं और कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की है. सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना भरी हुई हैं. विरोध करने वाले आलोचकों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है, हालांकि यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन आजकल हो यह रहा है कि जिन मशहूर हस्तियों को अपने क्षेत्र का भी ज्यादा अनुभव नहीं है, उन्हें टिकट मिल रहे हैं. इसका मतलब है कि हमारी राजनीति निचले स्तर पर पहुंच गई है, और सबसे बड़ा नुकसान जनता का है.

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी ने पूर्व क्रिकेटर यूनुस पठान को बहरामपुर लोकसभा केंद्र से उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने कांग्रेस के हैवीवेट उम्मीदवार अधीर चौधरी को पराजित कर तृणमूल कांग्रेस को जीत दिलाई, लेकिन अब खुद तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमांयू कबीर अपने ही सांसद की आलोचना कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि वह एमपी लैड के धन का इस्तेमाल जनता के हित में नहीं कर रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि ऐसा पहले ही अनुभव रहा है कि फिल्मी हस्तियां भले ही अपनी लोकप्रियता के बल पर चुनाव जीत जाते हैं, लेकिन वे जनता की आकांक्षाओं पर खरे नहीं उतरते हैं.

खेसारी लाल, मैथिली ठाकुर, रितेश पांडे… बिहार चुनाव में सुरों का ‘संग्राम’, जानें गायकों की एंट्री के सियासी मायने

[ad_2]


देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

[ad_1]

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button