Political – भगवान राम का मिला आशीर्वाद, अब सीता की नगरी पर ध्यान… क्यों महागठबंधन की विशलिस्ट में है सीतामढ़ी?- #INA

प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, राहुल गांधी
बिहार फतह करने के लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी वोट अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं. उनकी इस यात्रा में प्रियंका गांधी भी शामिल हो रही हैं. सुपौल में वह राहुल के साथ हैं. इसके बाद प्रियंका बुधवार को सीतामढ़ी जाएंगी, जहां वह मां जानकी के मंदिर में दर्शन करेंगी. प्रियंका के दौरे के अगले दिन अखिलेश यादव सीतामढ़ी पहुंचेंगे. महागठबंधन के नेताओं के इस दौरे को बड़े सियासी दांव के तौर पर देखा जा सकता है.
दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 में भगवान राम की नगरी अयोध्या में जीत दर्ज करने के बाद से ही महागठबंधन के हौसले बुलंद हैं. अब वो सीता की नगरी में चमत्कार की आस कर रही है. अयोध्या के अलावा कांग्रेस ने उत्तराखंड की बदरीनाथ सीट में भी झंडा बुलंद किया था.
क्या कहता है सीतामढ़ी का सियासी इतिहास?
सीतामढ़ी के जातीय समीकरण पर नजर डालें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा वैश्य मतदाता हैं. अति पिछड़ा समाज के वोटरों की संख्या भी अच्छी खासी है. सीतामढ़ी में मुस्लिम वोटरों की संख्या भी 2.5 लाख मानी जाती है. यादव जातियों के वोटरों की संख्या लगभग 2 लाख है.
अगड़ी जातियों के वोटरों की संख्या भी लगभग 2 लाख 60 हजार है. दलित महादलित वोटरों की संख्या 2 लाख के आसपास मानी जाती है. वहीं कोइरी-कुर्मी वोटरों की संख्या भी 1.5 लाख है. अगर जातीय गणित को देखें तो वैश्य समाज के मतदाता बीजेपी के कोर वोटर माने जाते हैं इसका फायदा एनडीए गठबंधन के जेडीयू को हाल के चुनावों में मिलता आया है.
बीजेपी का रहा है दबदबा
2010 के चुनाव में यहां से बीजेपी को जीत मिली थी. सुनील कुमार ने बाजी मारी थी. इसके बाद 2015 के चुनाव में आरजेडी के सुनील कुशवाहा को जीत मिली थी. 2020 में बीजेपी ने फिर वापसी की और मिथलेश कुमार ने जीत दर्ज की. देखा जाए तो हाल के वर्षों में यहां पर बीजेपी का जलवा रहा है.
सीतामढ़ी की ऐतिहासिक सीट पर कांग्रेस, जनता दल, सीपीआई और बीजेपी जैसी पार्टियां अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही हैं. हालांकि 2003 के बाद से यहां बीजेपी का दबदबा बढ़ा है. ऐसे में अखिलेश-प्रियंका इस सीट पर महागठबंधन की छवि को सुधारने और वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश करेंगे.
माता सीता का दर्शन प्रियंका का बहुसंख्यक वोटों को साधने की कवायद माना जा रहा है. कांग्रेस-आरजेडी की छवि मुस्लिम परस्त वाले पार्टी की बन गई है. माना जा रहा है कि प्रियंका अपनी यात्रा के दौरान माता सीता का दर्शन कर सियासी संदेश देने की रणनीति बना रही हैं. सीतामढ़ी में वह जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और महिला मतदाताओं से संवाद करेंगी.
कांग्रेस इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश बता रही है. बिहार का यह इलाका एनडीए का गढ़ माना जाता है और यहां की आधी आबादी यानी महिला वोटर चुनावी समीकरण बदल सकती हैं.
बिहार में खोई जमीन तलाश रही कांग्रेस
कांग्रेस बिहार में खोई जमीन तलाश रही है. वह महागठबंधन में आरजेडी के सहयोगी की भूमिका में है. 2020 के चुनाव में मिथिलांचल की 46 में से 31 सीटें एनडीए ने जीती थीं. प्रियंका गांधी का दौरा कार्यकर्ताओं में जोश तो लाएगा, लेकिन बीजेपी-जेडीयू का मजबूत गठजोड़ और नीतीश की मंडल राजनीति इसे चुनौती देगी. प्रियंका गांधी का सॉफ्ट हिंदुत्व कितना असरदार होगा, यह वोटरों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा.
प्रियंका का बिहार दौरा कांग्रेस के लिए एक मौका है, लेकिन सफलता मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा. मिथिलांचल में सॉफ्ट हिंदुत्व और महिला वोटरों पर फोकस से कांग्रेस को कुछ सीटें मिल सकती हैं, लेकिन महागठबंधन में आरजेडी की प्रमुखता इसे सीमित कर सकती है.
भगवान राम का मिला आशीर्वाद, अब सीता की नगरी पर ध्यान… क्यों महागठबंधन की विशलिस्ट में है सीतामढ़ी?
[ad_2]
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
[ad_1]
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,










