Political – निशांत, ओसामा और अभिमन्यु… बिहार चुनाव को दिलचस्प बनाएगी बाहुबली और नेताओं की अगली पीढ़ी!- #INA

लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा चुनाव. हर चुनाव में ऐसे नेता जरूर मिल जाते हैं जो अपनी आने वाली पीढ़ी को चुनावी मैदान में उतारते हैं. लगभग हर चुनाव में ये नजारा देखने को मिलता है. लेकिन इस बार बिहार में जो विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, यह कई मायनों में अलग हैं. दरअसल इस विधानसभा चुनाव में एक दो नहीं बल्कि कम से कम एक दर्जन ऐसे नेता हैं, जिनकी अगली पीढ़ी चुनाव में अपनी दस्तक दे सकती है. अहम यह कि यह नेता किसी एक दल में नहीं बल्कि सभी दलों में हैं.

1- क्या नीतीश की विरासत को संभालेंगे निशांत कुमार?

इस सूची में जो नाम सबसे पहले हैं, वह सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की है. दरअसल पिछले कुछ वक्त से राज्य में यह बात हर तरफ चर्चा में है कि सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार इस चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. कई बार तो ऐसी विधानसभा सीट का भी जिक्र सामने आ चुका है, जिसके बारे में यह कहा जा रहा है कि निशांत चुनावी मैदान में इसी सीट से अपनी ताल ठोक सकते हैं. पिछले कुछ दिनों से निशांत भी मीडिया में दिखाई दे रहे हैं, जबकि इसके विपरित वो मीडिया से दूर ही रहना पसंद करते थे.

Nishant Kumar

पिता का रहा है रुतबा:- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा का चुनाव भले ही एक बार जीता हो पर लोकसभा का चुनाव 6 बार जीत चुके हैं और केंद्र में मंत्री भी बनाए गए हैं.

कुल कितनी संपत्ति:- साल 2023 में नीतीश कुमार की कुल संपत्ति 16,484,632.69 रुपये थी, जो 2024 में 1.64 करोड़ रुपये हो गई.

2- शहाबुद्दीन के सीवान में ओसामा शहाब दिखाएंगे दम

इस सूची में सिवान के मरहूम सांसद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब का नाम शामिल है. ऐसी सूचना आ रही है कि ओसामा शहाब सिवान जिले के रघुनाथपुर से चुनावी मैदान में अपनी ताल ठोक सकते हैं. चुनावी मैदान में उतरने की ओसामा शहाब की चर्चा बहुत दिनों से चल रही थी. हाल ही में रघुनाथपुर में उन्हें हरी पगड़ी भी पहनाई गई थी. जिसके बाद से यह अंदेशा हो गया था कि आने वाले विधानसभा चुनाव में ओसामा शहाब चुनावी मैदान में उतर सकते हैं और राष्ट्रीय जनता दल उन्हें अपना उम्मीदवार बना सकती है.

Osama Shahab

पिता का रहा है रुतबा:- शहाबुद्दीन ने साल 1990 में जीरादेई से निर्दलीय विधायक चुने गए. इसके बाद साल 1995 में वो आरजेडी से विधायक बने. शहाबुद्दीन ने इसके बाद लोकसभा चुनाव में कदम रखा और साल 1996 में पहला चुनाव जनता दल से लड़ा और बीजेपी के जनार्दन तिवारी को हराकर चुनाव जीता. शहाबुद्दीन ने साल 2004 में जेल में रहकर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. शहाबुद्दीन ने सीवान से 1996 से 2004 तक लगातार चार चुनाव में जीत हासिल की. साल 2021 में कोविड से शहाबुद्दीन की मौत हो गई. शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब साल 2009, 2014 और 2019 में चुनाव मैदान में उतरीं लेकिन तीनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

कुल संपत्ति:- चुनाव आयोग में साल 2004 में जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक शहाबुद्दीन की कुल संपत्ति 34 लाख 47 हजार के करीब थी जबकि उनकी पत्नी ने जो जानकारी साल 2024 के लोकसभा चुनाव में दी है उसके मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 14 करोड़ से ज्यादा की है.

3- बाहुबली आनंद मोहन के बेटे अंशुमान भी लड़ेंगे चुनाव

कभी बिहार पीपुल्स पार्टी की नींव रखने वाले बाहुबली आनंद मोहन के छोटे बेटे अंशुमन भी इस विधानसभा चुनाव में अपनी पारी का आगाज कर सकते हैं. अंशुमन के बड़े भाई चेतन आनंद शिवहर से राष्ट्रीय जनता दल के विधायक चुने गए थे. हालांकि आज की तारीख में वह पार्टी के बागी विधायक हैं. खुद आनंद मोहन और उनकी मां लवली आनंद की गिनती राज्य के अहम नेताओं में होती है. अंशुमान पिछले साल ही जदयू में शामिल हुए थे.

Bahubali Anand Mohan Singh

पिता का रहा है रुतबा:- बाहुबली आनंद मोहन ने साल 1990 में जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता था. इसके बाद उन्होंने बिहार पीपुल्स पार्टी बनाई. साल 1993 में पार्टी गठन के बाद वह तत्कालीन सीएम लाले प्रसाद यादव के धुर विरोधी के रूप में सामने आए. साल 1996 में जब वह जेल में थे तब शिवहर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए. साल 2020 में उनके बड़े बेटे चेतन आनंद को आरजेडी से टिकट दिया गया और वो विधायक बने.

कुल संपत्ति:- बिहार पीपुल्स पार्टी की नींव रखने वाले बाहुबली आनंद मोहन ने साल 1996 में लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है उसके मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 10 लाख 66 हजार रुपए है. हालांकि उनके बेटे ने 2020 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 67 लाख से ज्यादा की है.

4- पप्पू यादव के बेटे भी नहीं हैं पीछे

पूर्णिया से पिछले लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उतरकर के अपनी धमाकेदार जीत दर्ज करने वाले पप्पू यादव के बेटे सार्थक रंजन भी चुनावी किस्मत को आजमा सकते हैं. ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि पप्पू यादव सार्थक को अपने किसी मनपसंद विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतार सकते हैं.

Bahubali Pappu Yadav

पिता का रहा है रुतबा:- पप्पू यादव ने अपने 36 साल के राजनीतिक करियर में पहली बार 1990 में विधानसभा का चुनाव जीता. इसके बाद पप्पू यादव ने साल 1991, 1996, 1999 और 2004 और 2014 में लोकसभा चुनाव जीता. पप्पू यादव एक बार निर्दलीय विधायक और तीन बार निर्दलीय सांसद बने. उन्होंने 2015 में राजद से अलग होकर अपने पार्टी बनाई थी.

कुल संपत्ति:- साल 2019 के लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव की कुल संपत्ति 11,95,43,561 रुपये थी, जो 2024 में 12 करोड़, आठ लाख के ज्यादा हो गई.

5- अभिमन्यु भी भेदेंगे राजनीति का चक्रव्यूह

कभी राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेताओं में शुमार होने वाले और अब भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक पारी को खेल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव के बेटे अभिमन्यु भी इस चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. दरअसल अभिमन्यु अभी से नहीं काफी पहले से ही सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेते रहते हैं. उनकी अपनी टीम अभिमन्यु नाम की संस्था भी है, जो बढ़-चढ़कर सामाजिक कार्यों को करती रही है.

Ram Kripal Yadav

पिता का रहा है रुतबा:- पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव ने साल 1993 पटना से जनता दल के टिकट पर उपचुनाव लड़ा औश्र 10वीं लोकसभा के लिए चुने गए. इसके बाद साल 1996 के चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की. दो चुनाव हारने के बाद साल 2004 में 14वीं लोकसभा में उन्होंने सीपी ठाकुर को हराया. वे एक कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए भी चुने गए. इसके बाद साल 2014 में पाटलीपुत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव में कदम रखा और लालू यादव की बेटी मिशा भारती को हराया.

कुल संपत्ति:- पूर्व केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव ने 2004 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग को जो जानकारी दी थी उसके मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 14 लाख के करीब थी जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी कुल संपत्ति 3 करोड़, 24 लाख के करीब बताई जा रही है.

6- चुनावी दंगल में अरिजीत दिखाएंगे दम

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजीत शाश्वत चौबे का नाम भी इन नेताओं के बेटे की सूची में शामिल है जो इस बार चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. चर्चा तो यहां तक है कि अर्जित शाश्वत को बक्सर के किसी विधानसभा क्षेत्र से उतारा जा सकता है.

पिता का रहा है रुतबा:- पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे साल 1995 में भागलुपर सीट से बिहार विधानसभा सदस्य चुने गए. इसके बाद साल 2000, 2005, 2010 वो एक बार फिर भागलुपर सीट से चुने गए. साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा सदस्य चुने गए. साल 2017 में चौबे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय राज्य मंत्री बने. इसके बाद साल 2019 में बक्सर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का राज्य मंत्री नियुक्त किया गया.

Former Union Minister Ashwini Choubey

कुल संपत्ति- पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग को जो जानकारी दी थी कि उसके मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 2 करोड़ 21 लाख रुपए से ज्यादा थी जबकि 2024 में उनकी कुल संपत्ति 4 करोड़ से ज्यादा है.

एक नहीं बल्कि कई और नाम भी हैं शामिल

इन नेताओं के अलावा कई और राजनेता हैं, जिनकी आने वाली पीढ़ी के बारे में कहा जा रहा है कि ये भी इस साल चुनाव में अपनी ताल ठोक सकते हैं. इनमें राजद के कद्दावर नेता जगदानंद सिंह के बेटे अजीत सिंह, राष्ट्रीय जनता दल के ही वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले अब्दुल बारी सिद्दीकी के बेटे अनीश बारी सिद्दीकी, कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं में गिने जाने वाले बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मदन मोहन झा के बेटे माधव झा, जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और दादा के नाम से मशहूर वशिष्ठ नारायण सिंह के बेटे भी सोनू सिंह और बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंदकिशोर यादव के बेटे नितिन भी अगर चुनावी मैदान में उतर जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा.

राजनीति में कदम रख चुके हैं ये चेहरे

वर्तमान में देखा जाए तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे के साथ उनकी बेटियां भी राजनीति में अपना दम दिखा रही हैं. वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान पहले ही राजनीति के फील्ड के स्थापित खिलाड़ी बन चुके हैं. ऐसी ही कुछ स्थिति केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे और वर्तमान में बिहार सरकार के मंत्री डॉ संतोष कुमार सुमन की है. डॉक्टर संतोष कुमार सुमन भी राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो चुके हैं.

निशांत, ओसामा और अभिमन्यु… बिहार चुनाव को दिलचस्प बनाएगी बाहुबली और नेताओं की अगली पीढ़ी!

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