Political – प्रशांत किशोर भी पीछे नहीं, बदलाव की बात करते-करते राजनीतिक वारिसों को बांट रहे टिकट- #INA

प्रशांत किशोर की पार्टी में भी राजनीतिक वारिसों को टिकट
बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल बनी हुई है. पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया जारी है. हालांकि एनडीए और महागठबंधन में सीटों को लेकर घटक दलों में कोई सहमति नहीं बन सकी है. बातचीत जारी है. वहीं रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने उम्मीदवारों की एक और लिस्ट जारी कर दी है. पार्टी 243 सीटों वाली विधानसभा के लिए जन सुराज अब तक 116 उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है. राजनीति में वंशवाद पर निशाना वाले प्रशांत भी राजनीतिक वारिसों को टिकट बांट रहे हैं. पार्टी ने एक पूर्व मुख्यमंत्री की पोती को भी टिकट दिया है.
जनसुराज पार्टी ने कल सोमवार को 65 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी लिस्ट जारी की. इस तरह से अब तक 116 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान हो चुका है. पार्टी की दूसरी लिस्ट पर नजर डालें तो इस बार भी कई डॉक्टरों को टिकट दिया गया है. दूसरी लिस्ट में 9 डॉक्टर मैदान में उतर रहे हैं. पहली लिस्ट में भी कई डॉक्टरों के नाम शामिल किए गए थे. इसके अलावा इस लिस्ट में 7 वकील और 4 इंजीनियर शामिल हैं.
दूसरी लिस्ट में 17 दलबदलुओं को टिकट
दूसरी लिस्ट में 17 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया है जो दल बदल कर पार्टी में शामिल हुए हैं. साथ ही टिकट पाने वालों में एक ऐसे उम्मीदवार का नाम शामिल है जिस पर हत्या करने का मामला चल रहा है और कई महीने तक जेल में रह भी चुका है.
जनसुराज पार्टी की ओर से अब तक जो 2 लिस्ट जारी की गई है, उसमें राजनीतिक वंशवाद को भी बढ़ावा दिया जाता दिख रहा है. पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर राजनीति में वंशवादी के घोर आलोचक रहे हैं, लेकिन राजनीतिक परिवार से नाता रखने वाले को टिकट दिया गया है. जारी 2 लिस्ट में कुल 4 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया है जो किसी न किसी राजनीतिक परिवार से नाता रखते हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री के वारिस को भी टिकट
पहली लिस्ट जारी करते समय जब प्रशांत किशोर से वंशवाद को बढ़ावा दिए जाने से जुड़े मसले पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जागृति ठाकुर सिर्फ कर्पूरी ठाकुर की पोती नहीं हैं बल्कि वो एक डॉक्टर भी हैं, वो पढ़ी-लिखी महिला भी हैं, मोरवा में काफी समय से काम कर रही हैं. इसी तरह लता के बारे में भी इसी तरह की सफाई दी थी.
पार्टी की दूसरी लिस्ट में तथागत हर्षवर्धन को बक्सर सीट से टिकट दिया गया है. तथागत के पिता केके तिवारी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. केके तिवारी बिहार की राजनीति में बड़ा चेहरा थे, वह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और 1980 और 1984 में बक्सर लोकसभा सीट से सांसद भी चुने गए थे.
केके तिवारी राजीव गांधी सरकार में मंत्री रहे थे. तथागत सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं. जनसुराज में आने से पहले वह 11 साल तक बक्सर में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के रूप में रहे.
7 बार चुनाव जीतने वाले के बेटे को भी टिकट
जन सुराज ने चैनपुर सीट से हेमंत चौबे को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है. वह लालमुनि चौबे के बेटे हैं. लालमुनि चौबे बक्सर से 4 बार के सांसद चुने गए थे. इसके अलावा कैमूर जिले की चैनपुर सीट से 3 बार विधायक भी रहे. केंद्र की राजनीति के अलावा लालमुनि बिहार सरकार में मंत्री भी रहे थे.
पहली लिस्ट में पूर्व CM की पोती का नाम
इसके अलावा प्रशांत किशोर की पार्टी अपनी पहली लिस्ट के जरिए वंशवाद की राजनीति को बढ़ाती दिखी थी. समाजवादी नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर को पार्टी ने मैदान में उतारा. जागृति पेशे से डेंटिस्ट हैं और वह समस्तीपुर की मोरवा सीट से अपनी किस्मत आजमा रही हैं. खास बात यह है कि जागृति के बड़े पापा रामनाथ ठाकुर केंद्र में मंत्री भी हैं.
नीतीश के करीबी रहे RCP की बेटी भी
साथ ही नालंदा की अस्थावां सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह (रामचंद्र प्रसाद सिंह) की बेटी लता सिंह को मैदान में उतारा गया है. आईएएस रहे आरसीपी सिंह पहले जनता दल यूनाइटेड में थे और एक समय नीतीश कुमार के बेहद करीबी हुआ करते थे. बाद में वह जेडीयू से अलग होकर जन सुराज के साथ जुड़ गए.
आरसीपी सिंह की छोटी बेटी लता सिंह वकील हैं और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं. इससे पहले वह पटना हाई कोर्ट में वकालत करती थीं और अब सुप्रीम कोर्ट में आ गई हैं
इस तरह से देखा जाए तो प्रशांत किशोर जिस वंशवाद की राजनीति का विरोध किया करते थे, अब उसी के सहारे वह बिहार चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की चाह रख रहे हैं. अब तक 116 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया जा चुका है और इसमें 4 वारिसों को पार्टी ने मौका दिया है. अब देखना होगा शेष 127 पर कितने राजनीतिक वारिसों को मौका देते हैं.
प्रशांत किशोर भी पीछे नहीं, बदलाव की बात करते-करते राजनीतिक वारिसों को बांट रहे टिकट
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