Political – यादवलैंड में ही पिट गई आरजेडी, बिहार की सबसे बड़ी जाति ने क्यों छोड़ा तेजस्वी का साथ?- #INA

यादवों ने छोड़ा आरजेडी का साथ
बिहार के चुनावी नतीजों ने आरजेडी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव को दोहरा झटका दिया है. एक तो आरजेडी बिहार चुनाव में बुरी तरह हारी है. उससे इस बार सिंगल लार्जेस्ट पार्टी का भी तमगा छीन गया है. 2020 की तुलना में आरजेडी की सीटें आधी हो गई है. आरजेडी को दूसरा झटका उसके कोर वोटरों ने दिया है. बिहार में यादव को लालू यादव की पार्टी आरजेडी का कोर वोटर्स माना जाता है.
चुनाव आयोग के आंकड़ों को देखा जाए तो आरजेडी यादवलैंड में ही बुरी तरह पिट गई है. यादव के दबदबा वाले सीटों पर ही तेजस्वी यादव के उम्मीदवार जीत नहीं पाए हैं. इस चुनाव में आरजेडी ने यादव समुदाय के 51 लोगों को टिकट दिया था, जिनमें बमुश्किल 10 को ही जीत मिली है.
बिहार में सबसे ज्यादा 14 प्रतिशत यादव हैं
बिहार सरकार के मुताबिक राज्य में यादवों की आबादी सबसे ज्यादा है. सरकारी आंकड़ों में यादव की संख्या 14 प्रतिशत है. बिहार की 70 से ज्यादा सीटों पर यादव मतदाता ही जीत-हार तय करते हैं. बिहार में यादवों को लालू यादव का कोर वोटर्स माना जाता है. पिछले चुनाव में यादवों ने लालू के पक्ष में जमकर मतदान किया था. महागठबंधन से पिछली बार 40 यादव जीतकर सदन पहुंचे थे.
इस बार भी तेजस्वी ने यादवों पर खूब भरोसा जताया था. महागठबंधन की तरफ से 67 यादव मैदान में उतारे गए थे, लेकिन अधिकांश सीटों पर यादव उम्मीदवारों को हार का ही सामना करना पड़ा है. इस चुनाव में महागठबंधन से बमुश्किल 10 यादव ही जीतकर सदन पहुंच रहे हैं.
यादवलैंड की इन सीटों पर हारी आरजेडी
यादवलैंड की पटना साहिब, दानापुर, छपरा, सीवान, महुआ, खजौली, गायघाट, बांका, सूर्यगढ़ा, बाबूबरही, अलीनगर, बहादुरपुर, पीपरा, झंझारपुर, आरा, केवटी, मोहिद्दुनगर, दीघा, सीतामढ़ी, दरौंदा, सोनपुर, केसरिया, मसौढ़ी, कुर्था, बेलागंज, शिवहर, सुरसंड, निर्मली, सुपौल, आलमनगर पर आरजेडी को हार का सामना करना पड़ा है.
इसी तरह दरभंगा ग्रामीण, हसनपुर, बेलहर, हिलसा, संदेश, जगदीशपुर, घोषी, रफीगंज, गोविंदपुर, नवादा, शेरघाटी जैसी हॉट सीट भी आरजेडी हार गई है. यादवलैंड की इन सीटों पर पिछली बार आरजेडी का दबदबा था. इतना ही नहीं, तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से हारते-हारते जीते हैं. तेजस्वी को बीजेपी के सतीश यादव ने राघोपुर में फंसा लिया था.
सवाल- यादवलैंड में क्यों हारी आरजेडी?
राष्ट्रीय जनता दल और महागठबंधन ने चुनाव से ठीक पहले तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया था. महागठबंधन की यह कवायद आरजेडी वोटों को इंटैक्ट करने के लिए ही किया गया था. इसके बावजूद यादवलैंड में आरजेडी और महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है.
वरिष्ठ पत्रकार बीरेंद्र यादव के मुताबिक यादवलैंड में जो सेंध लगी है, उसके पीछे 10 हजारी योजना है. नीतीश कुमार की सरकार ने चुनाव से ठीक पहले 1.5 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए ट्रांसफर किए. ये पैसे जीविका दीदी के नाम पर दिए गए थे.
बीरेंद्र यादव का कहना है कि सरकार ने पैसे देने में जब कोई भेदभाव नहीं किया. सभी वर्ग और समुदाय के लोगों को एक साथ पैसे दिए गए. जब सब टूटे तो फिर यादव क्यों नहीं टूटेगा? यादव समुदाय की महिलाओं ने भी एनडीए के पक्ष में मतदान किया है.
चुनाव आयोग के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल को पूरे चुनाव में 22 प्रतिशत मत मिले हैं. महागठबंधन को करीब 35 प्रतिशत मत मिले हैं.
मुसलमान भी हो गए तेजस्वी से दूर
बिहार चुनाव 2025 में मुसलमान भी आरजेडी से दूर हो गए. मुसलमान आरजेडी के कोर वोटर्स माने जाते रहे हैं. लालू यादव MY समीकरण के बूते मुसलमानों को साधते रहे हैं, लेकिन इस बार सीमांचल और मिथिलांचल इलाके में महागठबंधन को मुस्लिम बहुल सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा है.
महागठबंधन ने 29 मुसलमानों को टिकट दिया था, लेकिन सिर्फ 4 उम्मीदवारों को जीत मिल पाई है. दूसरी तरफ एनडीए ने 5 उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिसमें से 4 ने जीत दर्ज की है. ओवैसी की एआईएमआईएम ने 5 सीटों पर जीत हासिल की है.
यादवलैंड में ही पिट गई आरजेडी, बिहार की सबसे बड़ी जाति ने क्यों छोड़ा तेजस्वी का साथ?
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