Political – दो जगह से चुनाव लड़ेंगे बिहार के ‘सिंघम’ शिवदीप लांडे, जानें अररिया के बाद जमालपुर को क्यों चुना- #INA

बिहार के ‘सिंघम’ शिवदीप लांडे,
पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे बिहार के अररिया सदर सीट और मुंगेर जिले के जमालपुर विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे. इसको लेकर वे एक महीने पहले से ही तैयारी में जुट चुके थे. अररिया शहर के प्रमुख चौक चौराहों के अलावा ऑटो, टोटो रिक्सा में बैनर के माध्यम से जबरदस्त प्रचार प्रसार हो रहा था. वहीं शिवदीप लांडे खुद फेसबुक लाइव आकर लोगों को 2 जगह से चुनाव लड़ने की जानकारी दी.
हालांकि वो सिर्फ अररिया सदर विधानसभा सीट पर ही तैयारी कर रहे थे, मगर लोगों के सुझाव के बाद जमालपुर विधानसभा से भी उन्होंने चुनाव लड़ने की बात कही. इस बारे में शिवदीप लांडे ने बताया कि एक आईपीएस के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग मुंगेर ही हुई थी. मुंगेर में किए गए कार्य की वजह से ही वहां के लोगों ने मुझे शिवदीप लांडे बनाया. उन्होंने जमालपुर के लोगों से आग्रह किया कि यह चुनाव शिवदीप लांडे नहीं बल्कि आप लड़ रहे हैं, इसलिए सारे जमालपुर की जनता का सहयोग चाहिए.
शिवदीप लांडे से थर थर कांपते थे अपराधी
बता दें कि पूरे देश मे ‘मुंगेरी कट्टा’ फेमस हैं. 90 के दशक में अवैध देशी हथियार मुंगेर में कुटीर उधोग का रूप ले लिया था. कोई ऐसा हथियार नहीं था जो मुंगेर में न बनाया जाता हो. 90 के दशक में मुंगेर में अपराध चरम पर था. नक्सल प्रभावित मुंगेर में जब शिवदीप लांडे की पोस्टिंग हुई तो 2 साल के कार्यकाल में मुंगेर से अपराध का नामो निशान मिटा दिया. अपराधी मुंगेर छोड़कर भागने लगे. उनके द्वारा किये गए कार्यो को आज भी जमालपुर के लोग याद करते हैं. यही वजह है कि जमालपुर से उनका काफी लगाव रहा है.
उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर जब राजनीति में कदम रखा तब भी ‘रन फॉर सेल्फ’ कार्यक्रम की शुरुआत मुंगेर से ही की थी. मुंगेर में ASP के रूप में 2 साल के कार्यकाल के बाद शिवदीप लांडे अररिया, पूर्णियां, किशनगंज के एसपी बने. यहां उनके योगदान देते ही अपराधी पहले ही जिला छोड़कर भाग गए. सीमांचल के लोगों को पहली बार किसी ने हेलमेट पहनाना सिखाया तो वो थे शिवदीप लांडे. अररिया, किशनगंज जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में जहां लोग बाइक पर हेलमेट नहीं पहनते थे, उनके सड़क सुरक्षा अभियान के तहत सिर्फ कान पकड़ कर उठक बैठक कराने के मात्र से ही सीमांचल में हेलमेट की जबरदस्त बिक्री हुई.
लोगों को हेलमेट लगाने की आदत पड़ गई और सड़क दुर्घटना में भी काफी कमी आयी. अररिया के एसपी रहते हुए सड़क सुरक्षा के मानकों को लोगो को सिखाते हुए वे हीरो बन गए. वे अररिया में जिस रास्ते से गुजरते वहां अफरातफरी मच जाती थी. शिवदीप लांडे को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी. अररिया के चांदनी चौक के बीच सड़क पर पैर फैलाकर युवक की बाइक रोकते उनका फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. अररिया से उनका ट्रांसफर होते ही वहां के लोगो में मायूशी छा गई थी, दूर दूर से ग्रामीण पहुंचकर उन्हें न जाने की विनती कर रहे थे. यही वजह है कि राजनीति का केंद्र बिंदु पहला अररिया ही रहा फिर लोगों के सुझाव के बाद जमालपुर सीट का चयन किया गया. शिवदीप लांडे ने बताया कि उनका सपना है कि वे जहां से भी जीते उस विधानसभा को एक आदर्श विधानसभा बनाएं.
शिवदीप लांडे के पास काफी लड़कियों के नंबर होते थे
शिवदीप लांडे का काम करने का तरीका ही अलग था. जिस भी जिले में जाते वहां पहले अपना नंबर आप पब्लिक में देते थे, जिसकी वजह से उन्हें गलत कार्य करने वालो की पूरी कुंडली मिल जाती थी. कई जगह वे खुद छापेमारी करने चले जाते थे और एरिया के एसएचओ को भनक तक नहीं लगती थी. 20 के दशक में स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाली लडकिया कॉलेज के आसपास मंडराने वाले मजनुओं से परेशान रहती थी. लड़कियों को पता था उनकी सुरक्षा सिर्फ शिवदीप लांडे ही कर सकते थे.
लड़कियों को तंग करने वाले शोहदों को तो लड़किया शिवदीप लांडे के नाम से डराने लगी थी. वही जब शोहदों नहीं मानते थे तो लड़किया शिवदीप लांडे को फोन कर देती थी, फिर एक प्लानिंग के तहत लड़कों को रंगे हाथ पकड़ा जाता था. वहीं शिवदीप लांडे का सजा देने का भी अपना स्टायल था. लड़कों को माता-पिता, रिश्तेदारों को बुलाकर उनके सामने उसकी पिटाई करते थे. ताकि मां-बाप को भी बेटे की करतूत पता चल सके. शिवदीप लांडे की इस तरकीब से वे लड़कियों के बीच हीरो बन गए थे. लगभग सभी लड़किया अपनी सेफ्टी के लिए शिवदीप लांडे का मोबाइल नंबर रखने लगी थीं.
कौन हैं शिवदीप बामनराव लांडे?
2006 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे शिवदीप लांडे का पूरा नाम शिवदीप बामनराव लांडे हैं. वे मूलतः महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. सूत्र बताते है कि सरकार से नाराजगी के बाद उन्होंने 19-09-2024 को पूर्णियां के आईजी पद से इस्तीफा दे दिया. अपने कामों की वजह से लोग उन्हें सिंघम और सुपरकॉप कहते थे. मगर अच्छे काम करने के बाबजूद भी सरकार ने उनकी अनदेखी की.
भारत-नेपाल सीमा के अररिया में अपराध खत्म करने के बाबजूद उन्हें सरकार ने राज्यपाल का एडीसी बना दिया. फिर कुछ दिन बाद पटना का एसपी बनाया. लेकिन सरकार की अनदेखी के बाद वे सेंट्रल प्रतिनियुक्ति पर चले गए. मुंबई पुलिस में डिप्टी कमिश्नर (एंटी नारकोटिक्स सेल) के रूप कार्य करते फिर एकबार सुर्खिया बटोरी. फिर समय पूरा होने के बाद बिहार आने पर उन्हें आईजी बनाया गया.
मगर वे खुलकर काम नहीं कर पा रहे थे. पूर्णियां आईजी रहते उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. फिर हिन्द सेना नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई और बिहार की राजनीति में कूद गए. उनकी पार्टी हिन्द सेना का रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से अब वे निर्दलीय ही चुनाव लड़ेंगे.
दो जगह से चुनाव लड़ेंगे बिहार के ‘सिंघम’ शिवदीप लांडे, जानें अररिया के बाद जमालपुर को क्यों चुना
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