Political – किसी ने 8 तो किसी ने 7 बार दर्ज की जीत… क्या बिहार चुनाव में फिर चलेगा इनका मैजिक?- #INA

किसी ने 8 तो किसी ने 7 बार दर्ज की जीत... क्या बिहार चुनाव में फिर चलेगा इनका मैजिक?

बिहार चुनाव में इन नेताओं पर रहेगी नजर

बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य में कुछ ऐसी भी सीटें हैं, जो किसी न किसी दल के लिए किले से कम नहीं हैं. इनमें आलम नगर, पटना साहिब, गयाजी, दरभंगा, दरभंगा ग्रामीण समेत कम से कम एक दर्जन ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जो किसी न किसी राजनैतिक पार्टी का गढ़ रहा है. इस साल भी इन सीटों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी.

राज्य का आलमनगर विधानसभा सीट ऐसी सीट है, जहां नरेंद्र यादव लगातार आठ बार चुनाव जीत चुके हैं. वहीं गया जी में डॉक्टर प्रेम कुमार लगातार सात बार चुनाव जीत चुके हैं. इसी प्रकार पटना साहिब से नंदकिशोर यादव सात बार विधायक बन चुके हैं. दरभंगा ग्रामीण से ललित यादव लगातार चार बार से राजद विधायक हैं. ऐसे ही मढ़ौरा, मनेर के अलावा कई और सीटें हैं, जहां पर राजद के विधायक हैट्रिक लगा चुके हैं. हम पार्टी इमामगंज से चार बार चुनाव जीत चुकी है. इस बार के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर लोगों की निगाहें टिकी रहेंगी. क्या यह प्रत्याशी अपना किला बचाने में सफल होंगे? पेश है एक रिपोर्ट

Narendra Yadav

नरेंद्र नारायण यादव

  • विधानसभा सीट– आलमनगर
  • विधायक — नरेंद्र नारायण यादव
  • कार्यकाल — 7 बार जीत

आलमनगर विधानसभा सीट एक ऐसी सीट है, जिस पर हर विधानसभा चुनाव में नज़रें टिकी रहती हैं. दरअसल इस सीट पर नरेंद्र नारायण यादव ने अपनी मजबूती कुछ इस कदर बनाई है कि इस सीट पर कोई भी आता है, वह नरेंद्र नारायण यादव के सामने हार मान लेता है. नरेंद्र नारायण यादव का ही यह जादू है कि वह इस सीट पर 1995 से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं. 1990 में इस सीट पर वीरेंद्र कुमार सिंह ने जीत हासिल की थी लेकिन 1995 में नरेंद्र नारायण यादव ने पहली बार जीत दर्ज की और अब तक वह इस सीट पर लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं. आलमनगर एक ऐसी सीट है जिसे जदयू का अभेद्य दुर्ग माना जाता है. इस सीट पर नरेंद्र नारायण यादव लगातार आठ बार जीत दर्ज कर चुके हैं.

Jitanram Manjhi

जीतन राम मांझी

  • विधानसभा सीट– इमामगंज
  • विधायक — जीतन राम मांझी
  • कार्यकाल — 3 बार जीत

राज्य के गया जिले में स्थित और झारखंड की पलामू जिले से सटे इमामगंज विधानसभा सीट को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का गढ़ माना जाता है. इस सीट पर समता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और उसके बाद हम पार्टी के गठन होने के बाद से जीतन राम मांझी का ही इस पर कब्जा रहा है. जीतन राम मांझी ने जब अपनी पार्टी बनाई, तब से लगातार तीन बार उनकी पार्टी का इस सीट पर परचम लहराता रहा है. मांझी जनता दल यूनाइटेड में रहते हुए भी इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं. 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में मांझी ने इमामगंज सीट से जीत हासिल की थी. हालांकि 2024 में गया सीट से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद जब वह नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने तो उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था.

बिहार विधानसभा की दरभंगा ग्रामीण सीट

  • विधानसभा सीट– दरभंगा ग्रामीण
  • विधायक — ललित यादव
  • कार्यकाल — 6 बार जीत

बिहार विधानसभा की दरभंगा ग्रामीण सीट एक ऐसी सीट है, जहां पर पिछले 30 सालों से राष्ट्रीय जनता दल का कब्जा है. इस सीट पर ललित यादव लगातार लालटेन की रोशनी को बुलंद किए हुए हैं. दरअसल दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र एक ऐसी सीट है, जहां पर राजद कभी कमजोर नहीं रही. 2005 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर पीतांबर पासवान ने जीत हासिल की थी. उसके बाद 2010 और 2015 में ललित कुमार यादव ने जीत हासिल की. हालांकि 2000 के चुनाव में रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी सुनीति रंजन ने जीत हासिल की लेकिन उसके बाद जितने भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें ललित यादव ने अपनी जीत के सिलसिले को बरकरार रखा है.

Nandkishore Yadav

नंद किशोर यादव

  • विधानसभा सीट– पटना साहिब
  • विधायक — नंद किशोर यादव
  • कार्यकाल — 7 बार जीत

पटना साहिब सीट पर वर्तमान में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंदकिशोर यादव जमे हुए हैं. मजेदार बात ये है कि नंदकिशोर यादव पटना साहिब सीट से लगातार सात बार विधायक चुने जा चुके हैं. नंद किशोर यादव के सामने कोई भी उम्मीदवार टिक नहीं सका है. 2020 के विधानसभा चुनाव में नंदकिशोर यादव ने करीब 52% मत हासिल किया था. तब उन्होंने अपनी नजदीकी प्रतिबंध कांग्रेस के प्रवीण सिंह को हराया था. नंदकिशोर यादव की गिनती प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में होती है. अपने मृदुभाषी स्वभाव के लिए जाने जानेवाले नंदकिशोर यादव बिहार की राजनीति की अजातशत्रु कहे जाते हैं.

मोतिहारी में क्या बरकरार रहेगा प्रमोद कुमार का जलवा?

  • विधानसभा सीट– मोतिहारी
  • विधायक — प्रमोद कुमार
  • कार्यकाल — 5 बार जीत

2005 से ही भारतीय जनता पार्टी या यूं कहे एनडीए का मजबूत किला बनकर मोतिहारी विधानसभा क्षेत्र हमेशा राजनीति में केंद्र बिंदु बना रहता है. इस सीट से पहले आरजेडी से रमा देवी जीत हासिल करके मंत्री बन चुकी है. उसके बाद प्रमोद कुमार ने जीत हासिल की. दो बार वह भी मंत्री बन चुके हैं. दरअसल इस सीट पर 2005 की विधानसभा चुनाव में पहली बार प्रमोद कुमार ने राजद की प्रत्याशी रमा देवी को हराया था और विधायक बने थे. उसके बाद से अब तक राजद यहां विपक्ष की ही भूमिका में है. प्रमोद कुमार 2005 से लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं. प्रमोद 2017 से लेकर 2020 तक राज्य के पर्यटन मंत्री रहे. उसके बाद 2020 से 2022 तक गन्ना व विधि मंत्री रहे. लगातार पांच जीत दर्ज कर चुके प्रमोद इस बार सिक्सर लगाने की तैयारी में है.

Prem Kumar

डॉ प्रेम कुमार

  • विधानसभा सीट– गया
  • विधायक — डॉ प्रेम कुमार
  • कार्यकाल — 8 बार जीत

राज्य की गया सीट भी एक ऐसी विधानसभा सीट है, जिस पर इस चुनाव में लोगों की नज़रें टिकी रहेंगी. दरअसल इस सीट को भारतीय जनता पार्टी के मजबूत किले के रूप में जाना जाता है. वर्तमान में बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ प्रेम कुमार इस सीट से विधायक हैं. दिलचस्प की डॉक्टर प्रेम कुमार इस सीट पर लगातार आठ बार निर्वाचित हो चुके हैं. डॉक्टर प्रेम कुमार की गिनती बिहार प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में होती है. 1990 में भारतीय जनता पार्टी ने प्रेम कुमार को टिकट दिया था, जिसमें उन्होंने पहली बार जीत हासिल की थी. 1990 से लेकर अब तक हुए कुल आठ विधानसभा चुनाव में डॉक्टर प्रेम कुमार ने लगातार जीत दर्ज करके एक इतिहास बनाया है.

Sanjay Kumar

संजय सरावगी

  • विधानसभा सीट– दरभंगा
  • विधायक — संजय सरावगी
  • कार्यकाल — 5 बार जीत

उत्तर बिहार की अहम विधानसभा सीट में गिनी जाने वाली दरभंगा सीट पर भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व रहा है. इस सीट पर 14 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा पांच बार भारतीय अंतर पार्टी ने कमल खिलाने में सफलता हासिल की है. पिछले पांच विधानसभा चुनाव से भारतीय जनता पार्टी के नेता संजय सरावगी लगातार जीत दर्ज करते चले आ रहे हैं. संजय सरावगी वर्तमान में बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री हैं. साल 2005 से ही यह विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के कब्जे में है. 2005 से ही विपक्ष भाजपा के इस मजबूत किले को ध्वस्त करने के लिए पूरा जोर लगाता रहा है लेकिन अब तक विपक्ष को कामयाबी नहीं मिली है.

गोपालगंज विधानसभा सीट भी बीजेपी की अभेद किला

  • विधानसभा सीट– गोपालगंज
  • विधायक — स्वर्गीय सुभाष सिंह अब कुसुम देवी
  • कार्यकाल — 5 बार जीत

राज्य का गोपालगंज विधानसभा सीट भी बीजेपी के अभेद किले के रूप में गिना जाता है. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मंत्री रहे स्वर्गीय सुभाष सिंह ने लगातार चार बार जीत हासिल की थी. 2022 में उनके निधन के बाद उनकी पत्नी कुसुम देवी को चुनावी मैदान में बीजेपी ने उतारा था. कुसुम देवी ने अपने पति के जीत के सिलसिले को जारी रखा और उन्होंने 1794 मतों से उपचुनाव में जीत हासिल किया था. इस सीट पर 2005 से ही भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. एक तरह से इस सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. दिलचस्प है कि इस सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या ज्यादा है.

किसी ने 8 तो किसी ने 7 बार दर्ज की जीत… क्या बिहार चुनाव में फिर चलेगा इनका मैजिक?

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