Political – तेजस्वी यादव पॉपुलर CM फेस लेकिन सरकार NDA की; कसौटी पर बिहार चुनाव के सर्वेक्षण- #INA

एनडीए और महागठबंधन में कड़ी टक्कर की संभावना
बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर यानी शुक्रवार को होने जा रहा है. इस दिन 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होने जा रही है. पहले चरण में तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी और मैथिली ठाकुर जैसे बड़े चेहरों की किस्मत दांव पर है. चुनावी रैलियों में सभी दलों के अपने-अपने दावे हैं. एनडीए नेताओं का दावा है महागठबंधन का सूपड़ा साफ होगा जबकि महागठबंधन के नेता कह रहे हैं इस बार एनडीए का बिहार से पलायन तय है. इस बीच ओपिनियन पोल और सर्वे में रुझानों के दिलचस्प आंकड़े आ रहे हैं. अलग-अलग एजेंसियों के अलग-अलग दावे हैं. इन जनमत सर्वेक्षणों पर यकीन करें तो बिहार की ज्यादातर जनता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है लेकिन सत्ता एनडीए की चाहती है. लेकिन ये कैसे हो सकता है? और ये रुझान क्या कहलाता है?
तेजस्वी यादव महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा हैं, जबकि एनडीए का चेहरा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं. सर्वे में जनता ने ऐसा रुझान भला क्यों दिया है? कई सर्वे में तो नीतीश कुमार जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर से भी पिछड़ रहे हैं, जिनकी पार्टी के सत्ता में आने की कोई संभावना नहीं. ज्यादातर सर्वे में जन सुराज को बमुश्किल 4 से 5 सीटें मिलती दिख रही हैं. लेकिन पॉपुलर चेहरे के तौर पर प्रशांत किशोर अपना नंबर बढ़ाए हुए हैं. आखिर सर्वे में नीतीश कुमार को कहीं दूसरे नंबर पर तो कहीं तीसरे नंबर पर क्यों दिखाया जा रहा है?
बीजेपी बन सकती है सबसे बड़ी पार्टी
अब जरा कुछ आंकड़े पर गौर कर लेते हैं. जेवीसी पोल ने दो दिन पहले अपने सबसे नए सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में एनडीए को 120 से 140 सीटें मिल सकती हैं जबकि महागठबंधन को 93 से 112 सीटें मिल सकती हैं. बीजेपी 70 से 81 सीटों जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है वहीं जेडीयू को 42 से 48 सीटें मिल सकती हैं. उधर महागठबंधन में आरजेडी को 69 से 78 तो कांग्रेस को 9 से 17 सीटें मिल सकती हैं.
CM के लिए तेजस्वी को सबसे अधिक वोट
जेवीसी पोल ने सीएम के लिए योग्य लोकप्रिय चेहरे का भी अनुमान पेश किया है, जिसके मुताबिक तेजस्वी यादव को सबसे अधिक 33 फीसदी, नीतीश कुमार को 29 फीसदी तो चिराग पासवान और प्रशांत किशोर को 10-10 फीसदी जनता ने पसंद किया है. सर्वेक्षण में एनडीए को 41 से 43 फीसदी वोट तो महागठबंधन को 39 से 41 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है, वहीं जन सुराज पार्टी को 6 से 7 फीसदी मिल सकते हैं.
सी वोटर्स ने दो तरह के अनुमान लगाए हैं
वहीं सी वोटर्स के जनमत सर्वे के मुताबिक भी मुख्यमंत्री के लिए योग्य चेहरे के रूप में सबसे आगे हैं. सी वोटर्स के आंकड़े के मुताबिक तेजस्वी को 37 फीसदी, प्रशांत किशोर को 24 फीसदी, नीतीश कुमार को 16 फीसदी वहीं सम्राट चौधरी और चिराग पासवान को 7-7 फीसदी जनता ने वोट किया है. हालांकि सी वोटर्स ने केवल नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव को सामने रखकर जब सर्वे किया तो उसमें नीतीश कुमार को 46 और तेजस्वी को 41 फीसदी वोट मिले हैं. सी वोटर्स ने एंटी इंकंबेंसी को लेकर भी आंकड़ा पेश किया है, जिसमें 62 फीसदी लोगों ने नीतीश कुमार के कामकाज में संतुष्टि जताई है.
अब अहम सवाल ये है कि सर्वे एजेसियों के ऐसे अनुमानों के क्या आशय निकाले जाएं? सुशासन बाबू और बिहार के विकास पुरुष के तौर विख्यात नीतीश कुमार हरेक मोर्चे पर सबसे अव्वल क्यों नहीं हैं? जेवीसी पोल में तेजस्वी यादव तो सी वोटर्स के सर्वे में तेजस्वी और प्रशांत किशोर से भी नीतीश कुमार पिछड़ रहे हैं. पूरा एनडीए कुनबा नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ रहा है, सी वोटर्स के एक सर्वे में 62 फीसदी जनता ने नीतीश कुमार के काम काज में संतुष्टि दिखाई तो अगली बार बतौर सीएम के लिए उनका नाम बिना किसी लाग लपेट के सबसे ऊपर क्यों नहीं आ रहा?
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण कितने सच होते हैं?
आमतौर पर मतदान पूर्व किसी भी पोल और सर्वे में सत्ता के पक्ष में हवा आम बात है. बहुत कम ही बार सर्वे सरकार को हराने वाले होते हैं. पिछले दिनों दैनिक भास्कर ने भी एक सर्वे प्रकाशित किया है, जिसमें कहीं एनडीए बढ़त बनाती दिख रही है तो कहीं एनडीए और महागठबंधन में कांटे की टक्कर भी बताया जा रहा है. पिछले विधानसभा के चुनाव में छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार को जीवनदान देने वाले कई सर्वे आए थे, लेकिन जब नतीजे आए तो कांग्रेस के होश उड़ाने वाले साबित हुए. इसी तरह पंजाब में कांग्रेस की हार की संभावना तो व्यक्त की गई थी लेकिन आम आदमी पार्टी इतने बड़े अंतर से जीतेगी, ऐसा अनुमान नहीं था. ऐसे उदाहरण और भी हैं.
एनडीए-महागठबंधन में 2 फीसदी का अंतर
ऐसे में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आए सर्वेक्षणों के मिजाज का क्या मतलब निकाला जाए? ये सर्वे कितने सही साबित होंगे? सर्वे नीतीश कुमार को दूसरे, तीसरे पायदान पर डाल रहे हैं जबकि एनडीए सरकार बनाने की भविष्यवाणी कर रहे हैं. जेवीसी पोल ने एनडीए और महागठबंधन की जीत का जो अनुमान जारी किया है, उसमें बहुत ज्यादा अंतर नहीं है. एनडीए को 41 से 43 फीसदी वोट तो महागठबंधन को 39 से 41 फीसदी. यानी महज 2 फीसदी का अंतर है. अगर ये आंकड़े परफेक्ट हैं तो जानकारों की राय में जन सुराज पार्टी एनडीए को करीब 6-7 फीसदी वोट का नुकसान पहुंचा रही है. सही तस्वीर 14 नवंबर को ही सामने आएगी.
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तेजस्वी यादव पॉपुलर CM फेस लेकिन सरकार NDA की; कसौटी पर बिहार चुनाव के सर्वेक्षण
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