Political – अमेरिका-वेनेजुएला वॉर की आहट से शेयर बाजार में मचेगी खलबली, अंबानी से जिंदल तक संकट में ये बाहुबली- #INA

अमेरिका ने जब से वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है, तब से भारत की वो लिस्टेड कंपनियां फोकस में आ गई हैं, जिनका संबंध वेनेजुएला के साथ एनर्जी असेट्स, कच्चे तेल, इंजीनियरिंग सर्विसेज और फार्मा के साथ जुड़ा हुआ है. वेनेजुएला के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर किए गए ये हमले, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार पर महीनों से बढ़ते दबाव के बाद हुए हैं, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वेनेजुएला में कारोबार करने वाली या वहां मौजूद कंपनियों पर इसका क्या असर देखने को मिल सकता है.
रिलायंस और ओएनजीसी को फायदा या नुकसान
वेनेजुएला में भारत का कारोबार कई सेक्टर्स में फैला हुआ है, जिनमें तेल और गैस क्षेत्र प्रमुख है. ONGC की देश में दो तेल प्रोजेक्ट्स में इक्विटी हिस्सेदारी है, जिससे इसकी सीधी अपस्ट्रीम उपस्थिति है. रिफाइनिंग सेक्टर में, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ऐतिहासिक रूप से वेनेजुएला के कच्चे तेल का एक प्रमुख इंपोर्टर रहा है. इंटरनेशल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुसार, दोनों कंपनियों को वेनेजुएला के तेल उद्योग के संभावित अमेरिकी नेतृत्व वाले अधिग्रहण और पुनर्गठन से प्रमुख लाभार्थी के रूप में देखा जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि कराकस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दिए जाने या उन्हें हटाए जाने पर दोनों कंपनियों को सप्लाई, कैश फ्लो और समय के साथ-साथ वैल्यूएशन के मामले में लाभ होगा. रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर सोमवार को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए, जबकि ओएनजीसी के शेयर लगभग 2 फीसदी गिरकर बंद हुए.
इन कंपनियों पर भी दिख सकता है असर
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन वेनेजुएला की काराबोबो हैवी ऑयल प्रोजेक्ट में एक कंसोर्टियम भागीदार है और इक्विटी हिस्सेदारी के माध्यम से इसमें शामिल है. ऑयल इंडिया, ओएनजीसी और इंडियन ऑयल के साथ वेनेजुएला के एक ज्वाइंट वेंचर में अल्पसंख्यक भागीदार है.
- मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स ने भी अतीत में वेनेजुएला से तेल प्राप्त किया है. अमेरिकी हमलों के बाद वेनेजुएला के तेल उत्पादन, निर्यात या लॉजिस्टिक्स में किसी भी प्रकार की बाधा इन कंपनियों को प्रभावित कर सकती है.
- एनर्जी सेक्टर के अलावा, इंजीनियर्स इंडिया का कराकस में एक विदेशी कार्यालय है जो इसकी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों को समर्थन देता है, जिससे देश में इसकी जमीनी उपस्थिति बनी रहती है.
- भारतीय दवा कंपनियां भी देश से जुड़ी हुई हैं. सन फार्मा की वेनेजुएला में एक पंजीकृत सहायक कंपनी है, जबकि ग्लेनमार्क फार्मा वेनेजुएला में एक स्थानीय रूप से पंजीकृत सहायक कंपनी के माध्यम से काम करती है.
- सिप्ला ने ऐतिहासिक रूप से वेनेजुएला को आवश्यक दवाओं का निर्यात किया है, जो व्यापारिक जुड़ाव को दर्शाता है. डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज की पहले देश में एक सहायक कंपनी थी, लेकिन उसने 2024 में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी, जिससे देश में उसका जुड़ाव कम हो गया.
- मेटल सेक्टर में, जिंदल स्टील वेनेजुएला के सबसे बड़े लौह अयस्क परिसर का संचालन करती है, जिससे देश में उसका महत्वपूर्ण जुड़ाव है.
सामने आ रहे हैं मिलेजुले रिस्पांस
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला की एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने और कराकस में त्वरित सैन्य छापे की वजह से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी जैसे अभियानों पर इंटरनेशनल लेवल पर मिले-जुले रिस्पांस मिले हैं. संयुक्त राष्ट्र और कई कानूनी विशेषज्ञों ने इस कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए हैं. वेनेजुएला से जुड़े भारतीय कंपनियों के लिए, ये नया घटनाक्रम भू-राजनीतिक तनाव वाले क्षेत्रों और सीमा पार अभियानों से जुड़े जोखिमों की ओर इशारा करता है, विशेष रूप से उन सेक्टर्स में जहां लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है.
अमेरिका-वेनेजुएला वॉर की आहट से शेयर बाजार में मचेगी खलबली, अंबानी से जिंदल तक संकट में ये बाहुबली
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