Political – वोट चोरी Vs घुसपैठिया वोटर… क्या सेट हो गया बिहार चुनाव का एजेंडा?- #INA

वोट चोरी Vs घुसपैठिया वोटर... क्या सेट हो गया बिहार चुनाव का एजेंडा?

तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और अमित शाह.

बिहार चुनाव की तारीख का हालांकि अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन चुनाव से पहले ही बिहार चुनाव का एजेंडा तय हो गया है. इंडिया गठबंधन की पार्टियां कांग्रेस और आरजेडी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और लोकसभा चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगा रही हैं. वहीं, भाजपा ने SIR के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों को घेरना शुरू कर दिया है और घुसपैठियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया है. सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के चुनाव केंद्र और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लेकर धांधली का आरोप लगाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह घुसपैठिए को मुद्दे पर हमला बोल रहे हैं.

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी हरियाणा और मध्य प्रदेश के चुनाव के बाद से ही चुनाव आयोग पर धांधली का आरोप लगा रहे हैं और बीजेपी के साथ सांठगांठ कर चुनाव के नतीजे में हेराफेरी का आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस ने पार्टी ने हरियाणा और मध्य प्रदेश चुनाव में ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर भाजपा पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया और चुनाव आयोग पर हमला बोला.

Tejashvi Vote

वहीं, बिहार में SIR के ऐलान के साथ ही इंडिया गठबंधन की पार्टियों ने संयुक्त रूप से इसका विरोध किया और इसके खिलाफ इंडिया गठबंधन के 300 सांसदों ने संसद से लेकर चुनाव आयोग तक मार्च किया. इस बीच, राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्नाटक के महादेवपुरा लोकसभा केंद्र में एक लाख मतदाताओं के फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाये. पहली बार चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया गया. चुनाव आयोग ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी को नोटिस भेजा है.

लेकिन वोट चोरी अब विपक्ष का मुद्दा बन चुका है. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा नेताओं पर अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत झूठ और निराधार दावे फैलाने का आरोप लगाया. तेजस्वी यादव ने कहा, “मैं चुनौती देता हूं कि एक नाम भी घुसपैठिया बताएं जिसका एसआईआर में सामने आया हो या डिलीट हुआ हो.”

वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा कैंपेन

कांग्रेस के सोशल साइट फेसबुक, ट्वीटर, इस्टाग्राम पर वोट चोरी के खिलाफ कैंपेन चलाया जा रहा है और वोट चोरी का आरोप न केवल चुनाव आयोग पर लगाया जा रहा है, बल्कि भाजपा और मोदी सरकार पर भी निशाना साधा जा रहा है.

Rahul Vote Chori

इस बीच, 17 अगस्त से राहुल गांधी बिहार का दौरा करेंगे. वह 16 दिनों तक बिहार में रहेंगे और मतदाता अधिकार यात्रा के दौरान करीब 1300 किलोमीटर की यात्रा करेंगे. इस यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव, वामपंथी पार्टियों के नेता और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दल के नेता शामिल होंगे. कांग्रेस इस मतदाताधिकार यात्रा को लोकतंत्र और संवैधानिक हक को बचाने की लड़ाई बता रही है और बिहार चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है.

विपक्ष पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने का आरोप

वहीं, कांग्रेस और आरजेडी के वोट चोरी के आरोप पर भाजपा हमला शुरू कर दिया है. हाल में बिहार के सीतामढ़ी में मां जानकी के मंदिर के पुरुद्धार कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नेराहुल गांधी पर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के SIR का विरोध करके बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जो लोग भारत में पैदा नहीं हुए हैं, उन्हें वोट देने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है.

Amit Shah Vote

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिला से अपने भाषण के दौरान घुसपैठिए का जिक्र किया. उन्होंने एक जनसांख्यिकी मिशन की भी घोषणा की, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह नागरिकों को किसी भी जनसांख्यिकीय परिवर्तन से बचाएगा. उन्होंने कहा कि वह देश को एक चिंता, एक चुनौती के प्रति सचेत करना चाहते हैं. एक सोची-समझी साजिश के तहत, देश की जनसांख्यिकी बदली जा रही है और एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं. ये घुसपैठिए देश के युवाओं की आजीविका छीन रहे हैं. वे बहनों और बेटियों को निशाना बना रहे हैं. वे आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं और उनकी जमीनें हड़प रहे हैं. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

वहीं, भाजपा ने विपक्षी नेताओं द्वारा जीती गई सीटों के रिकॉर्ड भी खंगालने शुरू कर दिए और उन पर भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं. पार्टी न केवल चुनाव आयोग का बचाव कर रही थी, बल्कि एक व्यापक जवाबी हमला भी कर रही थी, जिसमें कांग्रेस और उसके सहयोगियों को उस “वोट चोरी” रैकेट का दोषी बताया जा रहा था.

Pm Modi Infiltrator

वोट चोरी के आरोप पर भाजपा का आक्रमण तेज

विवाद बढ़ने के साथ ही भाजपा की जवाबी रणनीति और भी आक्रामक हो गई है. भाजपा के आला मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव ने एसआईआर के मुद्दे पर राहुल गांधी पर हमला बोला. मंत्रियों ने राहुल गांधी पर जानबूझकर चुनाव आयोग के आंकड़ों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया. लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच महाराष्ट्र की मतदाता सूची में उनके दावे के एक करोड़ के बजाय 40 लाख की वृद्धि का हवाला दिया और बताया कि सबसे ज्यादा वृद्धि वाली कई सीटें कांग्रेस या उसके इंडिया ब्लॉक सहयोगियों ने जीती थीं.

भाजपा के नेता लगातार आरोप लगा रहे हैं कि जब भी कांग्रेस हारती है, तो वह व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश करते हैं. भाजपा ने विपक्ष के नेता पर देश की संवैधानिक संस्थाओं, सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग से लेकर पड़ोसी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान सेना तक, पर सवाल उठाने का आरोप लगाया.

भाजपा के हमले में गांधी परिवार भी शामिल है. पार्टी के आईटी सेल प्रमुख ने 1980 के दशक के आंकड़े खोज निकाले और आरोप लगाया कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता बना दिया गया था.

विपक्ष के आला नेताओं पर भाजपा का सवाल

धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल पूरी तरह से वोट बैंक की राजनीति में लगे हुए है. वे अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए घुसपैठियों को मतदाता बनाना चाहते हैं. जब चुनाव आयोग उन्हें सही तथ्य प्रस्तुत करता है, तो वे उसी चुनाव आयोग को भंग करने की बात करते हैं.” यह आरोप-प्रत्यारोप और तब तेज हो गया.

पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दिग्गजों द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया. इनमें रायबरेली ( जो कभी सोनिया गांधी की सीट थी) और अब राहुल गांधी की सीट है; वायनाड — केरल में राहुल गांधी की दूसरी सीट; डायमंड हार्बर — टीएमसी के अभिषेक बनर्जी; कन्नौज — सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सीट; मैनपुरी — डिंपल यादव की सीट; और कोलाथुर — तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि वे “वोट चोरी” — फर्जी मतदाता पंजीकरण, फर्जी मतदाता सूची और अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देकर जीते हैं.

दोनों पक्षों द्वारा मतदाता सूची में विसंगतियों के आरोप लगाए जाने के बाद, मतदाता सूचियों और मतदाता पहचान पत्रों की पवित्रता सवालों के घेरे में आ गई है, जिसका मतदाताओं के मन में व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और मतदान के दिन उनके विश्वास पर असर पड़ सकता है क्योंकि ‘वोट चोरी’ नया चलन बन सकता है.

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