NASA से पहले इस देश ने अंतरिक्ष में स्थापित किया था अपना स्पेस स्टेशन, जहां पहुंचे थे भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा
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Salyut Space Station: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला पिछले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से धरती पर वापस लौट आए. उन्होंने आईएसएस पर 20 दिन गुजारे और कई प्रयोग किए. वे पहले भारतीय हैं जो नासा के अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंचे. हालांकि उनसे 41 साल पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्रा राकेश शर्मा ने भी अंतरिक्ष में कई दिन गुजारे. ऐसे में आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर राकेश शर्मा अंतरिक्ष में कहां ठहरे थे, जैसे शुभांशु शुक्ला आईएसएस पर 20 दिन रुके. दरअसल, पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा 3 अप्रैल 1984 को अंतरिक्ष में पहुंचे थे. इस मिशन के दौरान वह सोवियत संघ के अंतरिक्ष केंद्र सैल्यूट पर एक सप्ताह तक रुके, जहां उन्होंने कई प्रयोग किए.
कब लॉन्च किया गया था सैल्यूट?
अंतरिक्ष की दुनिया इंसानों के लिए हमेशा कौतूहल से भरी रही है. दुनियाभर के देश अंतरिक्ष और ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने की सदियों से कोशिश करते रहे हैं. नासा के आईएसएस से पहले सोवियत संघ अंतरिक्ष में अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित किया था. जिसका नाम था सैल्यूट. सोवियत संघ ने सैल्यूट को 19 अप्रैल, 1971 को लॉन्च किया था. इस अंतरिक्ष स्टेशन को सिर्फ 6 महीने अंतरिक्ष में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया था. सैल्यूट पर सबसे पहले जॉर्जी टी. डोब्रोवोल्स्की, व्लादिस्लाव एन. वोल्कोव और विक्टर आई. पात्सेयेव पहुंचे थे. जो करीब 24 दिन अंतरिक्ष में रहे थे.
हालांकि जब वह धरती पर वापस लौट रहे थे तब उनका सोयुज 11 नाम का अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से कुछ समय पहले ही यान में अचानक दबाव कम होने की वजह से सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई थी. इसके बाद दशकों तक सोवियत और बाद में रूसी इंजीनियरों ने मूल सैल्यूट डिज़ाइन में लगातार सुधार किया और सैल्यूट श्रृंखला के कई अंतरिक्ष स्टेशनों को लॉन्च किया. उसके बाद तमाम सुधारों के बाद रूस ने मीर स्टेशन के बेस ब्लॉक को लॉन्च किया.
सोवियत संघ ने 1966 में शुरू किया था मिशन
बता दें कि सोवियत संघ ने 1966 में अल्माज़ नामक एक गुप्त सैन्य अंतरिक्ष स्टेशन परियोजना पर काम करना शुरू किया था. जिसका पहला प्रक्षेपण 1970 के दशक की शुरुआत में निर्धारित था. जैसा कि कल्पना की गई थी, अल्माज़ में 20 टन का एक मॉड्यूल शामिल था, जिसका समय-समय पर सोयुज़ क्रू ट्रांसपोर्ट अंतरिक्ष यान का उपयोग करके 2 से 3 अंतरिक्ष यात्रियों के दल द्वारा दौरा किया जाता था. जुलाई 1969 में अपोलो 11 के चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के बाद, सोवियत सरकार ने दुनिया का पहला नागरिक पृथ्वी कक्षीय अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने का निर्णय लिया.
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