पुणे पोर्शे एक्सीडेंट केस-सुप्रीम कोर्ट से 3 आरोपियों को जमानत:जस्टिस नागरत्ना बोलीं- बच्चों को बिना कंट्रोल कार-पैसे देने के लिए माता-पिता जिम्मेदार- INA NEWS

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2024 के पुणे पोर्शे एक्सीडेंट मामले में तीन आरोपियों को जमानत दी। कोर्ट ने ब्लड सैंपल बदलने की साजिश में आरोपी आशीष मित्तल, आदित्य सूद और अमर गायकवाड़ को जमानत देते हुए कहा कि इसका मतलब आरोपों से बरी करना नहीं है। जमानत के बावजूद ट्रायल पूरी तरह मेरिट के आधार पर चलेगा। जस्टिस नागरत्ना ने कहा- दो बेगुनाह जानें चली गईं और फिर साजिशें हुईं। आपके पक्ष में सिर्फ यही है कि आप लंबे समय तक जेल में रहे। इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी और बाद में सबूतों से छेड़छाड़ की साजिश के आरोप सामने आए थे। इस दौरान कोर्ट ने माता-पिता की जिम्मेदारी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि बच्चों को बिना नियंत्रण कार और पैसे देना गंभीर सामाजिक समस्या है। ऐसे मामलों में मात-पिता को भी दोषी ठहराया जाना चाहिए। अगर माता-पिता बच्चों से बात नहीं कर पाते, तो उसकी जगह एटीएम कार्ड और कार नहीं दी जा सकती। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने शराब पीकर जश्न मनाने और तेज गाड़ी चलाने की आदत पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- सख्ती से कार्रवाई करनी होगी सुनवाई के दौरान मृतक लड़की की मां की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने ऐसे मामलों में एक तय पैटर्न की ओर इशारा किया, जिस पर जस्टिस नागरत्ना ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि कानून को ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करनी होगी। जानें पूरा मामला… यह मामला 19 मई 2024 की रात पुणे के कल्याणी नगर में हुए एक हादसे का है। नशे में बताए जा रहे नाबालिग ने पोर्श कार से बाइक को टक्कर मार दी, जिससे 24 साल के दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवक-युवती की मौत हो गई थी। आरोप है कि नाबालिग के पिता और कुछ लोगों ने अस्पताल के स्टाफ के साथ मिलकर ब्लड टेस्ट रिपोर्ट बदलवाई, ताकि शराब का सबूत न मिले। इसके लिए अस्पताल स्टाफ को पैसे दिए गए। बाद में ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में दो बिजनेसमैन गिरफ्तार हुए। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी और कहा था कि पैसे वाले आरोपियों के बाहर आने से गवाहों से छेड़छाड़ हो सकती है और न्याय में रुकावट आ सकती है। कोर्ट ने 300 शब्दों का निबंध लिखने के लिए कहा था पुणे पोर्श एक्सीडेंट के 42 दिन बाद नाबालिग आरोपी ने रोड एक्सीडेंट पर 300 शब्दों का निबंध लिखकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को सबमिट किया था। जुवेनाइल बोर्ड ने आरोपी को 300 शब्दों का निबंध लिखने सहित कुल 7 शर्तों पर जमानत दी थी। हालांकि, पुलिस की मांग और लोगों के आक्रोश के बाद जुवेनाइल बोर्ड ने अपने फैसले में संशोधन किया था। 22 मई 2024 को बोर्ड ने आरोपी को बाल सुधार गृह में भेजने का आदेश दिया था। हालांकि, 25 जून को बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग आरोपी को जमानत दे दी। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… पोर्श हिट-एंड-रन: मृतक के परिजन नाखुश, पिता बोले- ऐसे में बेटे को न्याय कैसे मिलेगा सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने की खबर अनीश अवधिया के परिवारजनों को मिली है। परिवार ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त की है। अनीश के दादाजी आत्माराम अवधिया ने कहा कि उन्हें तीनों आरोपियों की जमानत की जानकारी मिली है और सुप्रीम कोर्ट को पुणे मामले को संज्ञान में लेकर आरोपियों की जमानत रद्द करनी चाहिए थी। पूरी खबर पढ़ें…

Table of Contents

Source link
यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

Back to top button
Close
Crime
Social/Other
Business
Political
Editorials
Entertainment
Festival
Health
International
Opinion
Sports
Tach-Science
Eng News