Entertainment: आपातकाल में रिलीज से पहले ‘शोले’ के जो सीन काटे गए, 50 साल बाद उसे Uncut दिखा रहे रमेश सिप्पी – #iNA

बहुत कम फिल्में हैं, जिसके बारे में बहुत से किस्से बन चुके हैं. कुछ सच्चे तो कुछ झूठे. शोले इन्हीं में से एक है. इसके कई किस्से फैले हुए हैं. हर डायलॉग और सीन किस्से का हिस्सा है. लेकिन एक किस्सा यह है कि जिस वक्त यह फिल्म रिलीज हुई, उस वक्त देश में आपातकाल लगा था, जिसके चलते इस पर सेंसर बोर्ड की गाज गिरी और इसमें कई काटे गए. यहां तक कि उसका क्लाईमैक्स भी बदला गया. पिछले करीब पचास साल से ये सारे किस्से कहे-सुने जा रहे हैं और तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर वायरल भी हैं. दिलचस्प बात ये कि इन किस्सों में कितने सच हैं और कितने झूठ- इसकी पड़ताल करने का भी कोई ठोस आधार नहीं मिला. लेकिन अब पर्दे के पीछे की उन सचाइयों से रूबरू होने का समय आ गया है. सिप्पी फिल्म्स की ओर से इसके ओरिजिनल वर्जन को नए रंग-रूप में री-रिलीज किया जा रहा है.
सबसे पहले आपको बताएं कि रमेश सिप्पी निर्देशित शोले सन् 1975 की ऐसी फिल्म है, जो स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को रिलीज हुई थी. हालांकि फिल्म रिलीज के एक हफ्ते तक दर्शकों का ध्यान नहीं खींच पाई. कई हॉल खाली पड़े रहे. ऐसा लगा कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो जाएगी. समाचार पत्र-पत्रिकाओं ने भी शोले को लेकर कोई खास उत्साहजनक रिव्यू नहीं छापी. शुरुआत में इसे बहुत ही लाउड और बोर करने वाली फिल्म माना गया. लेकिन दूसरे, तीसरे हफ्ते के बाद फिल्म ने जब रफ्तार पकड़ी तो उसके बाद कहीं छह महीना तो कहीं साल भर फिल्म दिखाई जाती रही . इस दौरान देश भर के थिएटर कैंपस में दर्शकों का मेला-सा लग गया.
डायलॉग और फिल्म के सीन दर्शकों में चर्चा का विषय
तभी से शोले के डायलॉग्स ने बच्चे-जवान-बुजुर्ग सबकी जुबान पर अपना कब्जा जमा लिया. आज भी वह नॉस्टेल्जिया है. कुछ सालों के बाद शोले को लेकर कुछ और खास बातों ने सुर्खियां बटोर लीं. पहली बात तो ये कि लेखक सलीम-जावेद की जोड़ी ने इसके कई सीन देसी-विदेशी फिल्मों से प्रेरित होकर लिखे हैं. उन फिल्मों के नाम और सीन भी सामने रखे गए. बाद के दौर में अपने इंटरव्यूज में सलीम-जावेद ने अपनी राइटिंग पर प्रभाव से इनकार नहीं किया. लेकिन फिल्म के कई सीन काटे जाने और इसका क्लाईमैक्स बदले जाने के किस्से जारी रहे. रमेश सिप्पी ने भी अपने कुछ इंटरव्यूज में इसे कुबूल किया था.
अनोखी बात ये कि शोले के जो सीन काटे गए वे केवल उस फिल्म से जुड़े कलाकारों ने ही देखे थे. उसे बाद में फिल्म निर्माण टीम से बाहर और किसी ने देखा नहीं था. लेकिन अब फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन और सिप्पी फिल्म्स की संयुक्त पहल से अनकट शोले का वर्ल्ड प्रीमियर रखा गया है. रिलीज के पचास साल पूरे होने के मौके पर फिलहाल इटली के बोलोग्ना में शोले का रीस्टोर्ड वर्जन रिलीज किया जा रहा है.
किस वजह से बदला गया था फिल्म का क्लाईमैक्स
इस दौरान दर्शकों को शोले का मूल वर्जन देखना निश्चय ही अनूठा अनुभव देगा. दर्शक अब इसके ओरिजिनल क्लाईमैक्स को देख सकेंगे, साथ ही फिल्म के बीच में जितने सीन काटे गए थे, उसे भी देख सकेंगे. जानकारों के मुताबिक शोले को जिस वक्त सेंसर बोर्ड से रिलीज सर्टिफिकेट मिला था, तब देश में राष्ट्रीय आपातकाल लगा था. आपातकाल के चलते सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर फिल्म निर्माण को लेकर एक विशेष गाइडलाइन जारी की गई थी. किसी भी फिल्म में हिंसा, खून-खराबा या फिर अधिक आक्रोश और गुस्सा दिखाने की मनाही थी.
चूंकि शोले के मूल क्लाईमैक्स में ठाकुर बलदेव सिंह अपने जूतों तले गब्बर सिंह को कुचलकर मार देते हैं. बोर्ड को यह मंजूर नहीं हुआ. तर्क ये दिया गया कि इस तरह से समाज में कानून को अपने हाथों में लेने की परिपाटी बढ़ेगी. यह अत्यंत क्रूर सीन कहलाएगा. इसके बाद रमेश सिप्पी ने अमजद खान, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी आदि को दोबारा इकट्ठा कर क्लाईमैक्स बदले, जिसमें बाद में मौके पर पुलिस आ जाती है और गब्बर सिंह को गिरफ्तार कर ले जाती है.
शोले ने भारतीय सिनेमा और जनमानस पर डाला प्रभाव
शोले भारतीय सिनेमा जगत की एक ऐसी आईकॉनिक फिल्म है, जिसकी सफलता के बाद इंडस्ट्री में कई बदलाव देखने को मिले. फिल्म की कहानी, पटकथा, संवाद, लोकेशन सब पर इस फिल्म ने गहरा प्रभाव डाला. देश भर युवाओं के भीतर फिल्म अभिनेता बनने की चेतना विकसित हुई और वे मुंबई की ओर रुख करने लगे थे. भारतीय सिनेमा जगत की शोले एक मात्र ऐसी फिल्म है, जिसके डायलॉग सबसे अधिक लोगों की जुबान पर हैं.
जानकारी के मुताबिक इटली में शोले के रिस्टोर्ड वर्जन के वर्ल्ड प्रीमियर होने के बाद भारत में इसका औपचारिक प्रदर्शन रखा जाएगा. यकीनन भारतीय दर्शकों के लिए अनकट शोले को देखना बहुत ही रोमांचक होगा. खास बात ये कि दर्शक शोले के अनकट वर्जन के साथ-साथ इसे नए फॉर्मेट में देख सकेंगे. नई पीढ़ी के आकर्षण के लिए शोले के मूल प्रिंट का डिजिटली पुनरुद्धार किया गया है. इस काम में फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने खासी भूमिका निभाई है. करीब तीन साल की मेहनत के बाद शोले का नया डिजिटल वर्जन तैयार किया गया है.
शोले की री-रिलीज पर क्या बोले धर्मेंद्र-अमिताभ
शोले के री-रिलीज और इसके प्रिंट के पुनरुद्धार को लेकर फिल्म से जुड़े कलाकारों ने प्रसन्नता जताई है. हालांकि इस मौके को देखने के लिए फिल्म के कई अहम कलाकार मसलन अमजद खान, संजीव कुमार, एके हंगल आदि जीवित नहीं हैं. लेकिन फिल्म में प्रमुख जय की भूमिका निभाने वाले अमिताभ बच्चन, वीरू का रोल करने वाले धर्मेंद्र ने अपना-अपना उदगार व्यक्त किया है. अमिताभ बच्चन ने कहा कि शोले एक ऐसी फिल्म है, जो जीवन का अविस्मरणीय हिस्सा बन चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि तब मुझे यह अहसास नहीं था कि शोले भारतीय सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित होगी. उम्मीद है 50 साल बाद भी शोले दर्शकों को आकर्षित कर सकेगी.
वहीं धर्मेंद्र ने एक इंटरव्यू में ये कहा कि- बहुत कम लोग जानते हैं कि गब्बर और ठाकुर की भूमिका की पेशकश सबसे पहले मुझे की गई थी. लेकिन मैंने वीरू का रोल पसंद किया. क्योंकि उसका मिजाज मेरे मिजाज से मिलता था. पानी की टंकी और मंदिर वाले सीन मेरे सबसे पसंदीदा हैं.
हर किरदार की विशेष संवादों के साथ यादगार छाप
शोले में संजीव कुमार, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, अमजद खान और हेमा मालिनी के अलावा जया भादुड़ी, सचिन, लीला मिश्रा, जगदीप, असरानी, एके हंगल, मैक मोहन, बीजू खोटे, केस्टो मुखर्जी, सत्येन कप्पू, ओम शिवपुरी, इफ्तेखार, हेलन और जलाल आगा आदि ने भी यादगार रोल निभाए थे. खास बात ये कि इस फिल्म के सारे किरदार अपने-अपने स्पेशल डायलॉग और सीन के साथ दर्शकों के जेहन में आज भी बने हुए हैं.
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