नरसंहार से भारत में शरण और अब मृत्युदंड… शेख हसीना की सत्ता, संघर्ष और विवादों की पूरी कहानी
.jpg)
नरसंहार से भारत में शरण और अब मृत्युदंड… शेख हसीना की सत्ता, संघर्ष और विवादों की पूरी कहानी
Sheikh Hasina Death Sentence: ढाका की अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा सुनाई है। 2024 तख्तापलट के बाद वह भारत में निर्वासन में हैं। उन पर आंदोलन के दौरान 1400 लोगों की हत्या और दमन के आदेश देने के आरोप लगे थे। बांग्लादेश अब उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
HighLights
- ढाका अदालत ने शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई।
- 2024 तख्तापलट बाद हसीना भारत में निर्वासन में हैं।
- बांग्लादेश ने भारत से प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की।
डिजिटल डेस्क: शेख हसीना का जीवन त्रासदी, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति का अद्भुत मिश्रण है। 1975 में हुए सैन्य तख्तापलट के दौरान उन्होंने पूरा परिवार खो दिया और इसके बाद उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ी। 1981 में देश लौटने के बाद वे अवामी लीग की अध्यक्ष बनीं और आगे चलकर बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक पद संभालने वाली प्रधानमंत्री बनीं। हालांकि, उनके कार्यकाल पर मानवाधिकार उल्लंघन और दमनकारी नीतियों के आरोपों ने कई बार विवाद भी खड़ा किया।
हाल ही में ढाका की एक अदालत ने मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई (Sheikh Hasina Death Sentence) है। 78 वर्षीय हसीना वर्तमान में भारत में निर्वासन में हैं और उन्होंने इस फैसले को “नकली मुकदमा” बताते हुए इसे खारिज किया है। अदालत ने कहा कि जुलाई आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों की हत्या और सुरक्षा में विफलता के लिए हसीना को जिम्मेदार माना गया है।
5 अगस्त 2024 को तख्तापलट के बाद हसीना देश छोड़कर भारत आई थीं। उनके खिलाफ कई गंभीर आरोपों पर सुनवाई जारी थी, और अब अदालत ने उन्हें सभी मामलों में दोषी ठहराकर मृत्युदंड दिया है।
पिछले वर्ष हुए छात्र आंदोलन और हिंसा के दौरान हसीना पर प्रदर्शनकारियों की हत्या करवाने का आरोप लगा था। 12 मई को कोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट में भी यह दावा किया गया कि हसीना ने ही कठोर कार्रवाई का आदेश दिया था। अदालत ने इन आरोपों को सही माना है।
1975 के सैन्य तख्तापलट के समय हसीना जर्मनी में थीं। उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान, उनकी मां, तीनों भाई और दो भाभियों की घर में हत्या कर दी गई थी। इस नरसंहार में 36 लोग मारे गए थे। इसके बाद हसीना भारत आईं और कई वर्ष यहां रहीं।
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के फैसले के बाद बांग्लादेश ने भारत से हसीना को सौंपने की मांग की है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को उन्हें वापस भेजना चाहिए। बांग्लादेश ने यह भी कहा कि हसीना को शरण देना “अमित्रतापूर्ण कदम” और “न्याय में बाधा” है।
कानून मंत्रालय के सलाहकार डॉ. आसिफ नजरुल ने कहा है कि बांग्लादेश अब भारत को हसीना के प्रत्यर्पण के लिए एक और औपचारिक पत्र भेजने जा रहा है।
कौन सा बयान बना विवाद की वजह?
अपने चौथे कार्यकाल के कुछ महीनों बाद उन्होंने आरक्षण को लेकर एक टिप्पणी की, “अगर मुक्तियुद्धा के पोते-पोतियों को लाभ नहीं मिलना चाहिए, तो क्या यह लाभ राजाकारों के पोते-पोतियों को दिया जाए?”
यह बयान व्यापक विरोध का कारण बना। आंदोलन तेज हुआ और दावा किया गया कि सरकार की कड़ी कार्रवाई में 1,000 से अधिक लोग मारे गए। इसके बाद हसीना को भारत भागना पड़ा।
प्रधानमंत्री कब बनीं?
1981 में अवामी लीग की अध्यक्ष बनने के बाद हसीना 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद 2009 में सत्ता में लौटकर 2024 तक देश की सबसे लंबे समय तक पद संभालने वाली नेता बनीं। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते उनके दौर में सबसे अच्छे स्तर पर रहे। 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत ने उन्हें शरण दी।
शेख हसीना पर क्या हैं आरोप?
- बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) में मामले दर्ज थे। पहला उनपर विपक्षी नेताओं को जबरन गायब करवाने का आरोप है।
- दूसरा शेख हसीना पर हिंसा के दौरान हत्याओं में शामिल होने का आरोप है। 12 मई 2025 को आई जांच रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि शेख हसीना ने हत्याओं के आदेश दिए थे, जिसके कारण हिंसा और भी ज्यादा भड़क गई। इस दौरान महिलाओं, बच्चे समेत 1400 लोगों की हत्या कर दी गई और 25000 के आसपास लोग घायल हुए थे।
- शेख हसीना, अभियुक्त असदुज्जमां खान कमाल और चौधरी अब्दुल्ला अल पर बिना किसी उकसावे के बेगम रोकैया विश्वविद्यालय के छात्र अबू सईद की हत्या करवाने का आरोप है।
- पूर्व पीएम पर ढाका के चंखर पुल में 6 लोगों की हत्या का भी आरोप लगाया गया है।
- मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम का कहना है कि शेख हसीना के खिलाफ 5 आरोपों में 13 लोगों की हत्या का आरोप है। ढाका छोड़ने से पहले अशुलिया में 5 लोगों की गोली मारकर हत्याकर उनके शवों को जला दिया गया और एक व्यक्ति को जिंदा ही आग के हवाले कर दिया गया था।
अदालत ने सजा का क्या आधार बताया?
ढाका की अदालत ने कहा कि शेख हसीना-
- प्रदर्शनकारियों पर हमले भड़काने,
- हत्या के आदेश देने,
- नागरिकों की सुरक्षा न करने,
- और समन के बाद अदालत में पेश न होने के आधार पर दोषी हैं।
- हसीना का कहना है कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है और अदालत निष्पक्ष नहीं है।
यह भी पढ़ें- Sheikh Hasina को सजा-ए-मौत, मानवता के खिलाफ अपराध केस में बांग्लादेश की पूर्व PM को सबसे बड़ी सजा
नरसंहार से भारत में शरण और अब मृत्युदंड… शेख हसीना की सत्ता, संघर्ष और विवादों की पूरी कहानी
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
[ad_1] #INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://jagran.com, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,



-1763370450332.jpg)
-1763370480406.jpg)








