Nation- मराठी भाषा का सम्मान करें और इसे सीखने की कोशिश करें… गैर-मराठी भाषियों को अजित पवार का सुझाव- #NA

अजित पवार
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने गुरुवार को महाराष्ट्र में गैर-मराठी भाषियों से स्थानीय भाषा के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक होने का आग्रह किया. उन्होंने उन्हें मराठी को स्वीकार करने और इसे सीखने की इच्छा दिखाने की सलाह दी, और कहा कि यह सरल कदम राज्य में बढ़ते भाषाई तनाव के बीच अनावश्यक संघर्ष को रोकने में मदद कर सकता है.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “अगर कोई कहता है कि हम महाराष्ट्र में रहते हैं, लेकिन अच्छी मराठी नहीं बोल सकते, तो उसे कुछ नहीं होगा. हालांकि, हम भाषा का सम्मान करते हैं और इसे सीखने की कोशिश करेंगे.”
राज्य की भाषा का करें सम्मान: अजित पवार
पवार ने जोर देकर कहा कि जिस राज्य में रहते हैं, उसकी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “ऐसा हमेशा नहीं होता, लोग कई बार बुरी प्रतिक्रिया देते हैं. आपको उस राज्य की भाषा का सम्मान करना चाहिए, कम से कम थोड़ा तो.”
VIDEO | Here’s what Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar (@AjitPawarSpeaks) said on the language row:
“Nothing will happen to someone who says that we are living in Maharashtra but can’t speak very good Marathi. However, we respect the language and will try to learn it. It doesn’t pic.twitter.com/2I1tJMdiOz
— Press Trust of India (@PTI_News) July 24, 2025
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में भाषा विवाद बढ़ता जा रहा है और अब संसद तक पहुंच गया है. इससे पहले, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे महाराष्ट्र की महिला सांसदों के निशाने पर आ गए थे, क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्रियों के संदर्भ में “तुमको पटक पटक के मारेंगे” टिप्पणी की थी. स्पष्टीकरण की मांग कर रही नाराज महिला सांसदों से घिरे दुबे ने तुरंत अपनी बात वापस लेते हुए कहा, “जय महाराष्ट्र.”
महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर मचा है बवाल
भाजपा सांसद की यह टिप्पणी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के उस बयान पर प्रतिक्रिया थी जिसमें उन्होंने गैर-मराठी भाषियों को “डुबो-डुबो के मारेंगे” की धमकी दी थी.
“भूमिपुत्रों” के मुद्दे पर अपने आक्रामक रुख के लिए जानी जाने वाली मनसे ने भाषा के मुद्दे को गंभीरता से लिया है. राज ठाकरे लगातार तीखे भाषण दे रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें “अपने सैनिकों पर गर्व है.”
महाराष्ट्र में भाषा विवाद उस समय तूल पकड़ा, जब राज्य सरकार ने पहली से पांचवीं कक्षा तक त्रिभाषा नीति लागू की और मराठी के साथ-साथ हिंदी पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया. शिव सेना (उद्धव ठाकरे) और राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने इसका विरोध किया और विपक्षी पार्टियों के विरोध के बाद सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा, लेकिन उसके बावजूद भाषा विवाद को लेकर राज्य में घमासान मचा हुआ है.मनसे के कार्यकर्ताओं द्वारा मराठी नहीं बोलने पर गैर मराठी भाषियों की पीटने की कई घटनाएं घटी हैं.
मराठी भाषा का सम्मान करें और इसे सीखने की कोशिश करें… गैर-मराठी भाषियों को अजित पवार का सुझाव
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