Nation- Gen-Z को राष्ट्रवाद से जोड़ने की पहल, ‘शब्दोत्सव’ करेगा जिहादी और नक्सली सोच का खात्मा- #NA

Gen-Z को राष्ट्रवाद से जोड़ने की पहल, 'शब्दोत्सव' करेगा जिहादी और नक्सली सोच का खात्मा

दिल्ली में 3 दिवसीय “दिल्ली शब्दोत्सव 2026” का शुभारंभ.

दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में शुक्रवार से 3 दिवसीय भारतीय साहित्यिक और सांस्कृतिक उत्सव “दिल्ली शब्दोत्सव 2026” समारोह के शुभारंभ में Gen-Z को राष्ट्रवाद से जोड़ने पर चर्चा हुई. इस दौरान दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली को नक्सली विचारधारा से ऐसे आयोजन दूर करेंगे. झूठे इतिहास को रचने का कुचक्र जो रचा गया उसपर यहां चर्चा की जाएगी. GenZ कहां है शाम 7 बजे यहां आ जाना. GenZ सनातनी है.

कपिल मिश्रा ने कहा कि आज से दिल्ली में शब्दोत्सव शुरू हो रहा है जिसमें 100 से ज्यादा वक्ता आएंगे. अभी दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन किया है. आने वाले दिनों में भारत की आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर, भारत के असली इतिहास के मुद्दे पर, बहुत सारे विषयों पर गंभीर चर्चाएं होंगी और यहां तक की GenZ की यहां पर आप भागीदारी देख सकते हैं. हजारों युवा यहां पर आया हुआ है. कपिल मिश्रा ने कहा कि हमारा उद्देश्य है जो जिहादी और नक्सली वैचारिक आतंकवाद देश में घोलने की कोशिश की जाती है, उसके ऊपर राष्ट्रवाद के विचार की वैचारिक सर्जिकल स्ट्राइक यह दिल्ली शब्दोत्सव का उद्देश्य है.

शब्दोत्सव वैचारिक आंतकवाद को मुंहतोड़ जवाब

कपिल मिश्रा ने कहा कि यह बात सच है कि जब कोई नक्सली या आतंकवादी बंदूक उठाता है तो पहले वह अपने दिमाग में उठता है. बाद में हाथ में उठाता है कि जो वैचारिक जहर धर्म और राष्ट्रय के खिलाफ भरने की कोशिश की जाती है. उसका उत्तर देना और सार्थक जवाब देना इस कार्यक्रम और समारोह का उद्देश्य है इस पर एक गंभीर सार्थक चिंतन यहां पर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये शब्दोत्सव वैचारिक आंतकवाद को मुंहतोड़ जवाब है. वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री कपिल मिश्रा, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सुरुचि प्रकाशन के राजीव तुली समेत कई जानी मानी हस्तियों की मौजूदगी में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ है.

जड़ों से जुड़े रहने वालों की हस्ती नहीं मिटती

इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पहली बार सरकारी मंच से ऐसा कार्यक्रम हो रहा है. भारत कहीं ना कहीं अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य से संवाद कर रहा है. भारत पर अनेकों बार आक्रमण हुए, हमले हुए, जमाने ने बहुत कोशिश की लेकिन हमारी हस्ती नहीं मिटती, क्योंकि हम अपनी जड़ों से जुड़े हैं. एक साथ में विज्ञान हो तो दूसरे में संस्कार भी होना चाहिए. ये जवाब है उनके अभिभावकों के लिए जो पूछते हैं कि इस आधुनिकता के जमाने में अपने बच्चों को संस्कारों और जड़ों से कैसे जोड़े. हमने छठ पर्व से, डांडिया, गणेश चतुर्थी और दीपावली पर कर्तव्य पथ पर 1.5 लाख दिए जलाए. दिल्ली में हर त्योहार को मनाया गया.

संस्कृति को ठीक से समझें तो बच्चे सुरक्षित

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि भारत की विशेषता यही रही कि हर युग में विचारों को कभी छोड़ा नहीं. जब कोई भारतीय नागरिक या नेता विदेश में जाकर हल्की बातों का इस्तेमाल करे तो ये इस बात का परिचायक है कि वो देश को समझ नहीं पाया. देश की मिट्टी से जुड़ा नहीं है. जब एक्जीबिशन में केरल स्टोरी की वो किताब मैने देखी, तो मैने सोचा कि अगर उन बच्चों को अपनी संस्कृति को ठीक से समझा पाए होते तो वो हमारी बेटी सुरक्षित रह पाती.

100 से ज्यादा वक्ता और 40 से ज्यादा किताबों का विमोचन

आयोजक सुरुचि प्रकाशनके राजीव तुली के मुताबिक, 2 जनवरी से 4 जनवरी तक चलने वाले इस शब्दोत्सव में साहित्य संगीत और संस्कृति का समागम देखने को मिलेगा. इन 3 दिनों में 100 से ज्यादा वक्ता और 40 से ज्यादा किताबों का विमोचन होगा. साथ ही दिल्ली साहित्य और संस्कृति का केंद्र बनेगा. शब्दोत्सव 2026 में अलग अलग क्षेत्रों के दिग्गज हस्तियां शामिल होंगे. इनके अलावा भरतनाट्यम, कथक और कवि सम्मेलन भी देखने को मिलेगा.

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