Sport : नौकरी छूटी, तंगी में गुजारा जीवन, सुने समाज के ताने… जानिए कौन हैं जैकब मार्टिन? जिन्हें 22 साल पुराने केस में मिली क्लीन चिट #INA

Who is Jacob Martin : जैकब मार्टिन कौन हैं, जिनका नाम आज काफी तेजी से सामने आ रहा है. आज की चर्चा का विषय जैकब मार्टिन हैं, जिन्हें 22 साल के लंबे बनवास के बाद न्याय मिला है. जैकब पर 22 सालों से जालसाजी का एक केस चल रहा था, जिसके लिए उन्हें समाज के लोगों के लगातार ताने सुनने पड़े. उनकी रेलवे की नौकरी छुट गई. उनको तंगी में अपना जीवन गुजारना पड़ा. यही नहीं बल्कि उनका करियर भी बर्वाद हो गया. तो जैकब मार्टिन कौन हैं, आज हम आपको उनके बारे में विस्तार से बताने वाले हैं. इसके साथ ही हम आपको बताएंगे कि उन पर क्या मामले में केस दर्ज कराया गया था.

कौन हैं जैकब मार्टिन?

जैकब मार्टिन एक भारतीय क्रिकेटर हैं. उन्होंने भारत के लिए क्रिकेट खेला है. मार्टिन का जन्म 11 मई 1972 में गुजरात के बड़ौदा में हुआ था. वो भारतीय क्रिकेट टीम में मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज के तौर पर खेलते थे. इसके साथ ही वो लेफ्टआर्म लेग ब्रेक गेंदबाजी भी करते थे. दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने साल 1999 में अपना डेब्यू किया था. उनको वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला मैच खेलने का मौका मिला था. जैकब मार्टिन ने बड़ौदा और रेलवे की टीम की कप्तानी भी की है. उन्होंने सौरव गांगुली की कप्तानी में अपना पदापर्ण भारतीय क्रिकेट में किया था.

किस केस में 22 साल बाद बरी हुए जैकब मार्टिन?

जैकब मार्टिन को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 22 साल पुराने एक में बरी कर दिया है. साल 2004 में पूर्व क्रिकेटर पर फर्जी यूके आव्रजन स्टाम्प, यात्रा व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़ा आरोप लगाया गया था. ये आरोप अब जाकर साल 2026 में साबित नहीं किया जा सकता है. अब अदालत को वित्तीय लेनदेन या अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर उनके स्वामित्व या नियंत्रण से जुड़ा कोई भी ठोस और विश्वसनीय सबूत नहीं मिला. बता दें कि, कई गवाह भी इन आरोपों को साबित करने में विफल रहे.

मार्टिन ने इस मामले के बारे में बात करते हुए कहा कि, यह मामला 2004 में उनकी टीम के एक सदस्य द्वारा ब्रिटेन का वीजा समाप्त होने के बाद वहां रुकने और फर्जी आव्रजन स्टाम्प लगवाकर भारत लौटने के बाद शुरू हुआ था. मूल एफआईआर में उनका नाम नहीं था. इसके बाद में उनका नाम मामले में जोड़ दिया गया. 

ये पूरी घटना साल 2004 में हुई थी. टीम इंग्लैंड खेलने गई थी, जो टीम 2004 में इंग्लैंड गई थी, उसमें से एक लड़के को छोड़कर बाकी सब वापस आ गए. वीजा की वैधता छह महीने की थी, वह छह महीने तक रह सकता था. वह इससे अधिक समय तक रुका रहा. किसी के जरिए उसने वहां फर्जी स्टैंपिंग करवा ली. फर्जी स्टैंपिंग कराने के बाद जब वह भारत वापस आया, तो उसे ब्रिटेन से डिपोर्ट कर दिया गया था. उसे नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया और फिर उससे पूछताछ की गई. 

मार्टिन को रेलवे की नौकरी से धोना पड़ा हाथ

उन्होंने कहा, ‘मेरा नाम एफआईआर में नहीं था, लेकिन जब जांच हुई, तो एक बड़ा नाम होने के नाते मुझे इस मामले में घसीटा गया. इन 22 वर्षों के दौरान, मुझे बीसीसीआई से भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था. मैंने रेलवे में अपनी नौकरी खो दी. इसलिए इसकी वजह से मुझे बहुत तनाव था. मैंने बहुत बुरे दिन देखे हैं. अब मुझे क्लीन चिट मिल गई है. यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा यू-टर्न है’. 

कैसा रहा जैकब मार्टिन का क्रिकेटर करियर

घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा, असम और रेलवे के लिए खेलने वाले जैकब मार्टिन ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 10 वनडे मैच खेले हैं. उन्होंने 8 पारियों में उन्होंने 158 रन बनाए थे. लेकिन उनका घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन शानदार रहा है. उन्होंने 1998-99 में रणजी ट्रॉफी में 1,000 से अधिक रन बनाए. उन्होंने 1999 में टोरंटो में वेस्ट इंडीज के खिलाफ एक वनडे मैच में पदार्पण किया. उन्हें 1999-00 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भी चुना गया था. उन्होंने 2000-01 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 1,000 से अधिक रन बनाए. उन्होंने 2008-09 के प्रथम श्रेणी सीजन के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया, इसकी वजह उनके साथ जुड़ा हुआ जालसाजी का केस भी था.

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