नए UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक:CJI ने कहा- शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता झलकनी चाहिए- INA NEWS

सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा- हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ भी हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं? CJI ने केंद्र से कहा- आप SC/ST स्टूडेंट्स के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं। कोर्ट ने आगे कहा- नियमों की परिभाषा पूरी तरह अस्पष्ट है। इसका दुरुपयोग हो सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स इसमें संशोधन की सलाह दे सकते हैं। हम यूनिवर्सिटी में एक स्वतंत्र और समान वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इधर, देशभर में सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स और आम नागरिकों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध जारी है। गुरुवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस के बाहर छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश की लखनऊ यूनिवर्सिटी के न्यू कैंपस में विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े स्टूडेंट्स नारेबाजी करते हुए सड़क पर बैठ गए। छात्रों का हंगामा जारी है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। कानपुर में भरत शुक्ला नाम के एक शख्स ने UGC के विरोध में सिर मुंडवाकर अनोखा प्रदर्शन किया। इधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने UGC के नए नियमों का समर्थन करते हुए केंद्र की सराहना की है। स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- UGC नियम 2026 भले ही देर से उठाया गया कदम है लेकिन भेदभाव और उदासीनता में डूबी हाइअर एजुकेशन सिस्टम में सुधार की दिशा में अच्छा फैसला है। बृजभूषण शरण बोले- एकतरफा कानून पर विचार की जरूरत भाजपा नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने UGC बिल के नए प्रावधानों का विरोध किया है। उन्होंने इसे समाज को बांटने वाला नियम बताया। उन्होंने कहा- एक समुदाय को शोषित और दूसरे को पीड़ित माना जा रहा है, जबकि कमेटी में शोषित समुदाय का कोई प्रतिनिधि नहीं है। बृजभूषण ने कहा- मुझे नहीं पता कि यह कानून किसने बनाया, लेकिन इससे समाज में तनाव पैदा हो रहा है। यह केवल उच्च जाति के समुदाय का दर्द नहीं है; यह सभी समुदायों का दर्द है। OBC और दलित समुदायों के जो बच्चे हालात को समझते हैं, उन्हें इसके विरोध में आगे आना चाहिए।
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