चीन की टेंशन बढ़ाएगा ‘T-Dome’, जानें यह इजरायल के आयरन डोम से कैसे है बेहतर?
ताइवान ने चीन के बढ़ते सैन्य खतरे का मुकाबला करने के लिए अपनी सबसे बड़ी रक्षा परियोजना ‘टी-डोम’ की घोषणा की है। यह सिस्टम चीनी लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों सभी से निपटने के लिए बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘टी-डोम’ इजरायल के आयरन डोम से अधिक शक्तिशाली होगा, हालांकि इसे 2027 से पहले चालू करना असंभव माना जा रहा है।
HighLights
चीन विरोधी कवच: ताइवान ने चीन की मिसाइलों/ड्रोन हेतु ‘टी-डोम’ बनाया।
पावरफुल सिस्टम: यह आयरन डोम से ज्यादा खतरों से निपटेगा।
टारगेट 2027: $40 बिलियन का यह प्रोजेक्ट 2027 से पहले चालू नहीं होगा।
डिजिटल डेस्क। ताइवान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना ‘टी-डोम’ (T-Dome / Taiwan Dome) की आधिकारिक घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते द्वारा घोषित इस एयर डिफेंस सिस्टम की तुलना इजरायल के प्रसिद्ध आयरन डोम से की जा रही है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन के बढ़ते खतरों के कारण आयरन डोम से भी अधिक शक्तिशाली होगा।
चीन के बढ़ते खतरों का मुकाबला
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिए ‘टी-डोम’ के निर्माण में तेजी लाने का वादा किया है। इस परियोजना को विकसित करने के लिए ताइवान सरकार ने अगले कई वर्षों में रक्षा बजट में अतिरिक्त 40 बिलियन डॉलर जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। चीन लगातार ताइवान पर बलपूर्वक नियंत्रण करने की धमकी देता रहा है, जिसके जवाब में ताइवान अपनी रक्षात्मक ताकत बढ़ा रहा है।
‘टी-डोम’ की तुलना अक्सर इजरायल की आयरन डोम प्रणाली से की जाती है, लेकिन इन दोनों में एक महत्वपूर्ण अंतर है। ताइपे स्थित सुरक्षा विश्लेषक जे. माइकल कोल के अनुसार, आयरन डोम को मुख्य रूप से कम दूरी के रॉकेटों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जबकि ताइवान के ‘टी-डोम’ को “खतरों की एक बहुत व्यापक श्रृंखला” का सामना करना पड़ेगा।
‘टी-डोम’ को एक साथ चीनी लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और यहां तक कि ड्रोनों के संभावित हमलों से लोकतांत्रिक द्वीप की रक्षा के लिए डिज़ाइन किया जाएगा। यह व्यापक सुरक्षा क्षमता ही इसे आयरन डोम से अलग और अधिक जटिल बनाती है। हालांकि, इस पूरी रक्षा प्रणाली को 2027 से पहले पूरी तरह से चालू करना लगभग असंभव माना जा रहा है। यह परियोजना ताइवान के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है, जो चीन की आक्रामकता के सामने अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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