Tach – टेक में अमेरिकी दबदबे को फ्रांस ने दिया तगड़ा झटका! मैक्रों ने लिया वो फैसला, कसमसा कर रह जाएंगे ट्रंप

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फ्रांस ने अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार ने फैसला किया है कि वह अपने सरकारी कंप्यूटरों से अमेरिकी सॉफ्टवेयर Microsoft Windows को हटाकर ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम Linux का इस्तेमाल शुरू करेगी.

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फ्रांस ने उठाया बड़ा कदम, Windows छोड़ Linux पर होगा शिफ्ट

नई दिल्ली. फ्रांस ने अमेरिकी टेक कंपनियों के दबदबे को चुनौती देते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अगुवाई में फ्रांस अब अपने सरकारी सिस्टम को माइक्रोसॉफ्ट विंडोज (Windows) से हटाकर लिनक्स (Linux) पर शिफ्ट करने की तैयारी में है. इसे डिजिटल इंडिपेंडेंस की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इस कदम से डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी टेक लॉबी में बेचैनी बढ़ सकती है.

Windows छोड़ Linux पर क्यों शिफ्ट होगा फ्रांस
टेकक्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों पर बहुत ज्यादा निर्भरता उसकी सुरक्षा और ऑटोनॉमी के लिए ठीक नहीं है. फ्रांसीसी मंत्री डेविड एमिएल के अनुसार, यह कदम अपनी ‘डिजिटल डेस्टिनी’ पर दोबारा कंट्रोल पाने के लिए उठाया गया है. फ्रांस अब अपनी डेटा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमान किसी और के हाथ में नहीं छोड़ना चाहता.

ट्रंप प्रशासन की पॉलिसी को लेकर यूरोप में बढ़ रही चिंता
ट्रंप सरकार की नीतियों का असर यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की पॉलिसीज को लेकर यूरोप में चिंता बढ़ रही है. हाल के महीनों में जिस तरह से अमेरिका ने प्रतिबंधों को हथियार बनाया है और कई इंटरनेशनल सर्विसेज तक पहुंच रोकी है, उससे फ्रांस अलर्ट हो गया है. उसे डर है कि भविष्य में अमेरिकी तकनीक पर निर्भरता उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है.

सिर्फ Windows ही नहीं, और भी बहुत कुछ बदला
फ्रांस सरकार की डिजिटल एजेंसी (DINUM) से इसकी शुरुआत होगी. फ्रांस पहले ही ‘Microsoft Teams’ को छोड़कर स्वदेशी टूल ‘Visio’ अपना चुका है. हेल्थ डेटा को भी इस साल के अंत तक एक नए सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करने की तैयारी है.

डिजिटल सॉवरेनिटी की ओर बढ़ रहा है फ्रांस
फ्रांस अब डिजिटल सॉवरेनिटी की ओर बढ़ रहा है, ताकि उसे अपनी तकनीक के लिए किसी दूसरे देश का मुंह न ताकना पड़े. बता दें कि डिजिटल सॉवरेनिटी या डिजिटल इंडिपेंडेंस या डिजिटल संप्रभुता आज हर देश के लिए बेहद जरूरी बन गई है. यह किसी देश के डेटा, तकनीक और डिजिटल सिस्टम पर पूरी तरह अपने कंट्रोल को दिखाती है.

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विनय कुमार झा

प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें


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