Tach – भारत में कम iPhone बनाने के बावजूद Apple कैसे कमाता है अरबों डॉलर? जानें कंपनी की कमाई का खेल

आईफोन 18 सीरीज़ की लॉन्चिंग में बस कुछ ही घंटे बाकी हैं. सब आईफोन खरीद पाएं या न पाएं, लेकिन इसे लेकर एक्साइटेड ज्यादातर लोग रहते ही हैं. बहुत से लोग कई बार ये भी सोचते हैं कि ऐपल भारत में कम आईफोन बनाती है, फिर भी कंपनी इतनी कमाई कैसे कर लेती है. असल में ऐपल की कमाई सिर्फ भारत में बने फोन तक सीमित नहीं है. कंपनी का बिजनेस मॉडल पूरी दुनिया में फैला हुआ है और कई तरीके से पैसा आता है.
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ऐपल दुनिया भर में हर साल करीब 22-23 करोड़ आईफोन बनाती और बेचती है. भारत में उत्पादन तेजी से बढ़ा है. अब लगभग हर चौथा आईफोन भारत में असेंबल होता है. फिर भी चीन अभी भी बड़ा हिस्सा संभालता है. लेकिन कमाई का मुख्य स्रोत वैश्विक बिक्री है.
अमेरिका, यूरोप, चीन और दूसरे देशों में आईफोन ऊंचे दामों पर बिकते हैं. ऐपल की खास बात यह है कि उसके प्रॉडक्ट की प्रॉफिट मार्जिन बहुत ऊंची होती है. एक आईफोन बनाने में लागत कम होती है और बेचने पर मुनाफा ज्यादा.
दूसरा बड़ा हिस्सा सर्विसेज से आता है. ऐपल सिर्फ फोन नहीं बेचती. ऐप स्टोर, आईक्लाउड, ऐपल म्यूजिक, ऐपल टीवी प्लस और ऐपल केयर जैसी सेवाएं लगातार पैसा कमाती रहती हैं. एक बार आईफोन खरीदने के बाद यूजर इन सर्विसेज का इस्तेमाल करता है और कंपनी को नियमित आमदनी होती रहती है. यह मॉडल बहुत मजबूत है क्योंकि हार्डवेयर एक बार बिकता है, लेकिन सर्विसेज सालों तक चलती हैं.
भारत में भी ऐपल की कमाई बढ़ रही है. देश में आईफोन की बिक्री लगातार ऊपर जा रही है. प्रीमियम सेगमेंट में ऐपल की पकड़ मजबूत है. लोग किस्तों पर फोन ले रहे हैं, पुराना फोन बदल रहे हैं और ऐपल के दूसरे प्रॉडक्ट जैसे एयरपॉड्स, वॉच और मैकबुक भी खरीद रहे हैं. भारत से ऐपल को सालाना एक अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हो रही है. लोकल मैन्युफैक्चरिंग से कंपनी को टैक्स और टैरिफ में भी फायदा मिलता है. भारत में बने फोन अमेरिका जैसे बाजारों में निर्यात होते हैं, जिससे लागत नियंत्रण में रहती है.
ऐपल का इकोसिस्टम भी कमाई बढ़ाता है
एक बार कोई आईफोन ले लेता है तो वह आसानी से दूसरे ब्रांड पर नहीं जाता. सॉफ्टवेयर, ऐप्स और सेवाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं. इससे ग्राहक लंबे समय तक जुड़ा रहता है और कंपनी को बार-बार फायदा होता है.
भारत में उत्पादन कम होता तो भी ऐपल को नुकसान नहीं होता क्योंकि उसकी असली ताकत ब्रांड वैल्यू, डिजाइन और ग्लोबल डिमांड में है. लोग ऐपल प्रॉडक्ट इसलिए खरीदते हैं क्योंकि वे इसे प्रीमियम और भरोसेमंद मानते हैं. ऊंची कीमत के बावजूद डिमांड बनी रहती है.
यानी कि ऐपल की कमाई कई फैक्टर पर टिकी है- दुनिया भर में हार्डवेयर की बिक्री, ऊंची मार्जिन, सर्विसेज की नियमित आमदनी और बढ़ता भारतीय बाजार. भारत में उत्पादन बढ़ना कंपनी के लिए अतिरिक्त फायदे की बात है, लेकिन कमाई का असली इंजन ग्लोबल बिजनेस मॉडल है. इसी वजह से ऐपल दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शुमार है.
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