Tach – स्मार्टफोन रखना भी है स‍िर दर्द, 42% भारतीय यूजर्स र‍िपेयर करने में लगा देते हैं 2001 से 5,000 रुपये

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78% से अधिक यूजर्स रोजाना ओवरहीटिंग, बैटरी की समस्याएं, फोन गिरने, पानी से नुकसान और डेटा खोने जैसी चिंताओं का सामना करते हैं.

स्मार्टफोन रखना भी स‍िर दर्द, र‍िपेयर करने में हो जाता है 5,000 रुपये तक खर्च
नई द‍िल्‍ली. स्‍मार्टफोन आमतौर पर महंगे ही आते हैं और आप जब इसे अपनी जेब के ह‍िसाब से खरीद लेते हैं, तो उसे संभलने की ज‍िम्‍मेदारी भी बढ़ जाती है. क्‍योंक‍ि स्‍मार्टफोन र‍िपेयर कराने का खर्च भी ज्‍यादा ही होता है. Counterpoint Research और OPPO India ने इसे लेकर जुलाई-अगस्त में एक स्‍टडी कराई, ज‍िसे नाम द‍िया गया “India Smartphone Durability Consumer Study 2025”. इस स्‍टडी के नतीजे बताते हैं क‍ि स्मार्टफोन खरीदने से पहले यूजर्स उसकी मजबूती जरूर जानना चाहते हैं. ये एक फैक्‍टर उनकी पसंद और भावनाओं पर गहरा असर डालता है.

स्‍टडी में हुआ खुलासा
इस अध्ययन में 26 शहरों के 4500+ स्‍मार्टफोन यूजर्स को शामिल किया गया, जिसमें पाया गया कि स्मार्टफोन की मजबूती अब यूजर्स के लिए चिंता का विषय बन गई है. 78% यूजर्स बारिश, पानी या अत्यधिक गर्मी में अपने फोन का उपयोग करने से बचते हैं क्योंकि उन्हें नुकसान का डर होता है. 56% ने कहा कि जब उनका फोन गिरता या टूटता है तो वे परेशान हो जाते हैं, 39% बहुत चिंतित और घबराए हुए महसूस करते हैं, और केवल 5% को कोई फर्क नहीं पड़ता. इसके अलावा, 35% ने स्वीकार किया कि वे लगातार अपने डिवाइस को नुकसान पहुंचाने की चिंता करते हैं, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि स्मार्टफोन की मजबूती मानसिक शांति से जुड़ी हुई है.

स्‍मार्टफोन रखने का ह‍िडन कॉस्‍ट
चिंताजनक बात यह भी है कि स्‍मार्टफोन माल‍िक को छिपी हुई लागत भी उठानी होती है. सर्वेक्षण में पता चला कि 42% स्‍मार्टफोन यूजर्स ने मरम्मत पर 2,001 से 5,000 रुपये तक खर्च किए, 21% ने 5,001 से 10,000 रुपये खर्च किए और 8% ने 10,001 से अधिक खर्च किए. स्मार्टफोन हमारे जीवन को कई तरह से आसान बना रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं है. लेक‍िन इसे र‍िपेयर कराने में आने वाली लागतें घरेलू बजट पर एक्‍स्‍ट्रा दबाव डाल रही हैं.

मामला भावनात्‍मक है
अध्ययन में पाया गया क‍ि टूटे हुए फोन का भावनात्मक असर हार्डवेयर से परे है. यानी लोग फोन में मौजूद डेटा और यादों के कारण उसे र‍िपेयर कराने को मजबूर हो जाते हैं. 52% लोग कहते हैं कि वे अपने स्मार्टफोन पर दैनिक जीवन और काम के लिए निर्भर हैं और दुर्घटनाओं के कारण होने वाले व्यवधानों को बर्दाश्त नहीं कर सकते. 72% उपयोगकर्ताओं को डर है कि उनके डिवाइस के नुकसान या चोरी के कारण वे अपने व्यक्तिगत डेटा जैसे परिवार की तस्वीरें और वीडियो खो सकते हैं. 40% यूजर्स खोई हुई तस्वीरें, संपर्क और डेटा को दोबारा प्राप्त करने के लिए 5,000 रुपये से अधिक खर्च करने के लिए तैयार हैं.

भारतीय यूजर्स को मजबूत फोन की जरूरत
स्‍टडी के दौरान भारतीय यूजर्स ने फोन में मजबूती की मांग की. भारतीय उपभोक्ता ऐसे स्मार्टफोन चाहते हैं जो रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना कर सकें बिना प्रदर्शन में कमी के.

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए टिकाऊपन अब एक आवश्यक आवश्यकता बन गई है. Oppo ने कहा क‍ि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि 79% लोग स्मार्टफोन खरीदते समय टिकाऊपन को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं और 76% लोग मानते हैं कि जब उनका डिवाइस टिकाऊ होता है तो वे अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं. साथ ही, 39% उपयोगकर्ता तब चिंता या घबराहट महसूस करते हैं जब उनके फोन गिरते हैं या टूटते हैं. स्पष्ट रूप से टिकाऊपन को मानसिक शांति से जोड़ते हैं. दिलचस्प बात यह है कि 86% OPPO उपयोगकर्ताओं ने ब्रांड को टिकाऊपन पर सकारात्मक रूप से रेट किया, जो दर्शाता है कि OPPO उपभोक्ता की जरूरतों को समझता है और लगातार उन पर खरा उतरता है.

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स्मार्टफोन रखना भी स‍िर दर्द, र‍िपेयर करने में हो जाता है 5,000 रुपये तक खर्च

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