Tach – निखिल कामत और एलन मस्क के बीच क्या बातचीत हुई? कॉफी, खिलखिलाते चेहरे, सीरियस डिस्कशन

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निखिल कामत के पॉडकास्ट People by WTF में स्पेसएक्स के फाउंडर और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क पहुंचे थे. लगभग दो घंटे की इस बातचीत में दोनों ने कई मुद्दों को छुआ और एलन मस्क ने बेबाकी से अपनी राय रखी.

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निखिल कामत के पॉडकास्ट People by WTF में स्पेसएक्स के फाउंडर और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क पहुंचे थे. लगभग दो घंटे की इस बातचीत में दोनों ने कई मुद्दों को छुआ और एलन मस्क ने बेबाकी से अपनी राय रखी.

एलन मस्क अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक (Starlink) को भारत में जल्द ही लॉन्च करने वाले हैं. इस सर्विस के शुरू होते ही भारत में पहाड़ों, जंगलों और दूरदराज गांवों तक भी तेज इंटरनेट मिल सकेगा. हाल ही में जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामत के साथ एक पॉडकास्ट पर उन्होंने इस बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि कैसे हजारों तेज रफ्तार सैटेलाइट पृथ्वी के ऊपर से लगातार इंटरनेट भेजते हैं, कैसे ये तकनीक बाढ़, भूकंप जैसी आपदाओं में लोगों की जान बचाती है, और क्यों भारत उनके मिशन में एक बेहद खास जगह रखता है.

निखिल कामत के पॉडकास्ट People by WTF में बातचीत के दौरान एलन मस्क ने बड़े उत्साह के साथ कहा कि स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, हमें भारत में काम करने में बहुत मजा आएगा. उन्होंने बताया कि दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में स्टारलिंक पहले से ही इंटरनेट पहुंचा रहा है. उनकी बातों से यह साफ झलक रहा था कि भारत उनके वैश्विक मिशन का अगला बडा पड़ाव है.

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मस्क ने सहजता से समझाया कि स्टारलिंक वास्तव में काम कैसे करता है. उन्होंने बताया कि यह तकनीक धरती से करीब 550 किलोमीटर ऊपर कम-ऊंचाई वाले ऑर्बिट में मौजूद हजारों छोटे-छोटे सैटेलाइट्स पर आधारित है. ये सैटेलाइट 25 गुना तेज आवाज की रफ्तार से पृथ्वी के चारों ओर घूमते हैं, जिससे इंटरनेट की लेटेंसी बेहद कम रहती है. उन्होंने कहा कि इन सभी सैटेलाइट्स को लेजर लिंक्स के जरिए एक-दूसरे से जोड़ा गया है. यानी अगर धरती पर कहीं केबल कट भी जाए, तो ये सैटेलाइट एक-दूसरे से ही कम्यूनिकेट करके इंटरनेट जारी रख सकते हैं.

उन्होंने भारत जैसे विशाल और कई तरह की भौगोलिक स्थितियों वाले देश का उदाहरण देते हुए समझाया कि शहरों में तो मोबाइल टावर एक-दूसरे से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर होते हैं, इसलिए नेटवर्क अच्छा मिल जाता है. लेकिन दूरदराज इलाकों में न तो टावर आसानी से लगाए जा सकते हैं, न ही फाइबर केबल बिछाना आसान होता है. ऐसे में स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस वहां बड़ा बदलाव ला सकती है. मस्क ने यह भी कहा कि स्टारलिंक मौजूदा टेलीकॉम नेटवर्क का सहयोगी बनकर काम करेगा, किसी का प्रतिस्पर्धी नहीं.

मस्क ने यह भी बताया कि आपदा के समय स्टारलिंक सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होता है. उन्होंने कहा कि जब किसी देश में बाढ़, भूकंप या किसी भी तरह की बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है, तो उनकी टीम वहां के लोगों को बिल्कुल मुफ्त स्टारलिंक इंटरनेट उपलब्ध कराती है. उनके अनुसार, मुश्किल वक्त में स्टारलिंक हमेशा मददगार की भूमिका निभाता है, न कि मुनाफा कमाने वाले की.

हालांकि उन्होंने एक सीमा भी स्पष्ट की. मस्क ने कहा कि घनी आबादी वाले शहरों में स्टारलिंक हमेशा उतना अच्छा काम नहीं कर पाएगा, जितना स्थानीय इंटरनेट कंपनियां करती हैं. इसका कारण तकनीक की सीमाएं हैं. उन्होंने कहा दुर्भाग्य से, फिजिक्स इसकी अनुमति नहीं देती. 550 किलोमीटर दूर मौजूद सैटेलाइट्स का सिग्नल शहरों की विशाल भीड़ को तेज गति पर लगातार सपोर्ट नहीं कर सकता. उन्होंने यह भी बताया कि ऊंचाई को 350 किलोमीटर तक कम कर देने पर भी यह समस्या पूरी तरह हल नहीं हो सकती.

फिर भी, ग्रामीण इलाकों, पहाड़ी राज्यों, तटीय क्षेत्रों और उन जगहों के लिए जहां अब तक इंटरनेट एक सपना जैसा है, स्टारलिंक किसी वरदान से कम नहीं दिखता. मस्क की पूरी बातचीत से यह बात साफ होती है कि भारत जैसे देश के लिए यह तकनीक डिजिटल अंतर को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

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