National-शेयर बाजार में हाहाकार! 2011 के बाद सबसे लंबी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक टूटा, निफ्टी लगातार 9वें दिन धड़ाम – #INA

Stock Market Down: भारतीय शेयर बाजारों आज 17 फरवरी को लगातार नौवें दिन गिरावट जारी रही, जिसने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा टूटकर 75,348.64 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी 196 अंक गिरकर 22,733.10 पर कारोबार कर रहा था। यह लगातार नौवां दिन है, जब निफ्टी लाल निशान में है। इससे पहले आखिरी बार साल 2011 में निफ्टी में इतनी लंबी गिरावट देखने को मिली थी।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, भारतीय रुपये में कमजोरी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय एक्सपोर्ट पर लगाए गए जवाबी टैरिफ जैसे कारणों से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और बाजार में जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि शेयर बाजार पर असर डालने के लिए अभी कोई मजबूत घरेलू ट्रिगर नहीं हैं। इसके चलते प्रतिभागी बाजार की चाल का संकेत पाने के लिए ग्लोबल मार्केट्स से जुड़ी खबरों, करेंसी में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की निकासी जैसे पहलुओं पर बारीकी से ध्यान दे रहे हैं।

सुबह 09:16 बजे, सेंसेक्स 590.57 अंक या 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,348.64 पर था। वहीं निफ्टी 196.15 अंक या 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,733.10 पर था। शुरुआती कारोबार के दौरान लगभग 765 शेयरों में तेजी आई, 1901 शेयरों में गिरावट आई और 158 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

छोटे और मझोले शेयरों में और भी तगड़ी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स दो प्रतिशत से भी अधिक लुढ़क गए। इस बीच वौलेटिलिटी इंडेक्स 7 फीसदी उछला गया।

यहां तक निफ्टी के सभी 13 सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में खुले। हालांकि बाद कुछ सेक्टर्स ने नुकसान कम किया और हल्की बढ़त के साथ कारोबार किया। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मीडिया इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट देखी गई और ये 1.5 से 2.5 प्रतिशत तक लुढ़क गए। दूसरी तरफ, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मीडिया इंडेक्स हरे निशान पर कारोबार कर रहे थे।

लगातार गिरावट से भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप ₹400 लाख करोड़ के नीचे गिर गया है, जो जून 2024 (पिछले 8 महीने) के बाद सबसे निचला स्तर है।

एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियों के Q3 नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे बाजार को झटका लगा। Nifty और BSE500 कंपनियों का शुद्ध मुनाफा सिंगल डिजिट में रहा, जिससे FII की बिकवाली तेज हो गई।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, “जब अर्निंग्स ग्रोथ कम होती है, तो ऊंचे वैल्यूएशन को जस्टिफाई करना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। डॉलर की मजबूती ने भी बाजार की हालत बिगाड़ी है।”

उन्होंने कहा, “सच तो यह है कि मामूली सिंगल डिजिट की अर्निंग ग्रोथ कहीं से भी ऊंचे वैल्यूएशन के लायक नहीं है। FIIs की निरंतर बिकवाली के पीछे यही मूल कारण है, जिसने बाजार को प्रभावित किया है। डॉलर के मूल्य में बढ़ोतरी ने समस्या को और बढ़ा दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “केवल अर्निंग्स में सुधार और डॉलर में गिरावट के संकेत ही कमजोर होते बाजार के ट्रेंड को पलट सकते हैं। यह जल्द ही हो सकता है। भारत के आर्थिक फंडामेंटल्स मजबूत हैं और ग्रोथ व अर्निंग्स में सुधार की संभावना है।”

आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए?

Religare Broking के SVP, रिसर्च हेड अजीत मिश्रा के अनुसार, “बाजार में 22,800 के स्तर पर सपोर्ट दिख रहा है, लेकिन मौजूदा स्ट्रक्चर अभी और गिरावट के संकेत दे रहा है। ऐसे में ट्रेडर्स को सावधानी से काम लेना चाहिए और मजबूत रिस्क मैनेजमेंट के साथ ट्रेडिंग करनी चाहिए।”

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शेयर बाजार में हाहाकार! 2011 के बाद सबसे लंबी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक टूटा, निफ्टी लगातार 9वें दिन धड़ाम


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