Nation- फाइलों से निकली स्कीम ने बदली उत्तराखंड की तस्वीर, कैसे हुआ बरसों का सपना साकार?- #NA

फाइलों से निकली स्कीम ने बदली उत्तराखंड की तस्वीर, कैसे हुआ बरसों का सपना साकार?

उत्तराखंड में अटकी परियोजनाओं शुरू हुईं.

उत्तराखंड को अलग राज्य बने 25 साल पूरे हो चुके हैं. इन पच्चीस बरसों में उत्तराखंड ने कई उतार-चढ़ाव भी देखे हैं. उत्तराखंड में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं. जिन पर ताला लटक गया था. वे परियोजनाएं, जो दशकों तक सरकारी फाइलों में बंद रहीं, एक बार फिर जमीन पर उतरती नजर आ रही हैं. ऐसे ही परियोजनाओं में उत्तराखंड के कई नए डैम भी हैं. जहां पहुंचकर टीवी9 भारतवर्ष की टीम ने जायजा लिया कि आखिर वहां कितना काम हुआ है. इस ग्राउंड रिपोर्ट में इसे विस्तार से बताया गया है.

ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर जांच करने वाली टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट में सामने आया है कि नैनीताल से लेकर देहरादून तक लंबे समय से अटके डैम प्रोजेक्ट्स अब रफ्तार पकड़ चुके हैं. कुमाऊं क्षेत्र में गोला नदी पर बन रहा जमरानी बांध इसका बड़ा उदाहरण है. नैनीताल के पास रहने वाले 73 वर्षीय गंगाधर बताते हैं कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि वे अपनी आंखों से इस परियोजना को पूरा होते देख पाएंगे. दशकों बाद अब जब काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो स्थानीय लोगों में खुशी और भरोसा दोनों नजर आते हैं.

जमरानी बांध से लाखों को लोगों मिलेगा लाभ

जानकारी के मुताबिक, जमरानी बांध से हल्द्वानी और आसपास के इलाकों को पेयजल, सिंचाई और बिजली का बड़ा लाभ मिलेगा. सरकार का दावा है कि जमरानी बांध से हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों को पेयजल के अलावा 57 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई और बिजली मिलेगी. इससे हल्द्वानी और आसपास के 10.5 लाख से अधिक लोगों को 117 मिलियन लीटर प्रतिदिन ((MLD)) पानी मिलेगा. इसकी लागत 3808 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र 90% और राज्य सरकार 10% योगदान दे रही है. इस प्रोजेक्ट को साल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

लखबार बांध परियोजना से 6 राज्यों तक पहुंचेगा पानी

जमरानी की तरह देहरादून जिले में यमुना नदी पर लखबार बांध भी उत्तराखंड की एक बड़ी परियोजना है, जिसके पूरा होने से उत्तर भारत के छह राज्यों को सीधे फायदा होगा. 300 मेगावाट बिजली उत्पादन और 33,780 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के अलावा लखबार डैम से उत्तराखंड के साथ-साथ हिमाचल, हरियाणा, यूपी, राजस्थान और दिल्ली को भी 78.83 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा. देहरादून जिले में यमुना नदी पर बन रहा लखबार बांध भी उत्तराखंड की सबसे अहम परियोजनाओं में शामिल है. वर्ष 1976 में स्वीकृत यह परियोजना 1992 में ठप हो गई थी, लेकिन करीब तीन दशक बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में इसे फिर से शुरू किया गया. इस परियोजना को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

भगीरथ बने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- CM धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि जमरानी, लखबार और सौंग जैसी कई परियोजनाएं 40-50 सालों से इंतजार में थीं, लोगों को प्रतीक्षा थी कोई भगीरथ आएगा और इसे शुरू करेगा. भगीरथ हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. जब से उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम करना शुरू किया है, इन सभी योजनाओं को स्वीकृति मिली.


सीएम ने आगे कहा कि हमारे देहरादून में ही लखवार बांध परियोजना है. लंबे समय से लोग मांग कर रहे थे कि एक एम्स हमारा ऋषिकेश में खुले. एक एम्स और खुलना चाहिए. एक एम्स उधम सिंह नगर किच्छा में खुला. पिथौरागढ़ के लिए हवाई सेवा शुरू हुई. काम अब तेजी से हो रहा है.

देहरादून की लाइफलाइन बनेगा सौंग डैम

देहरादून के पास बन रहा सौंग डैम राजधानी की जल जरूरतों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. इस परियोजना की शुरुआत भले ही 2003 में हुई हो, लेकिन औपचारिक काम सितंबर 2024 से शुरू हुआ. साल 2050 तक देहरादून और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरतें पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है. बताया जाता है कि इस परियोजना से रोजाना 150 मिलियन लीटर पानी मिलने लगेगा. ग्राउंड वाटर लेवल बढ़ेगा, छोटे स्तर पर बिजली उत्पादन भी होगा. इस परियोजना में फ्रांस की एजेंसी 80% वित्तीय सहायता दे रही है. 2030 तक इस परियोजना पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

उत्तराखंड के विकास की नई कहानी

जमरानी, लखबार और सौंग जैसे परियोजनाएं यह संकेत दे रहे हैं कि उत्तराखंड में लंबे समय से रुकी विकास योजनाएं अब पटरी पर लौट रही हैं. इन परियोजनाओं के पूरा होने से न सिर्फ पानी, बिजली और सिंचाई की समस्या कम होगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की जिंदगी पर भी इसका असर पड़ेगा. देवभूमि उत्तराखंड में विकास की यह नई तस्वीर अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर साफ दिखाई दे रही है.

फाइलों से निकली स्कीम ने बदली उत्तराखंड की तस्वीर, कैसे हुआ बरसों का सपना साकार?

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