वो शिव मंदिर जिसके लिए थाइलैंड-कंबोडिया के बीच छिड़ा युद्ध, जानिए उसकी रोचक बातें
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच स्थित हजार साल पुराना शिव मंदिर विवाद का कारण बन गया है। थाईलैंड ने कंबोडिया पर हवाई हमला कर दिया, जिससे 40 लोगों की मौत और 40 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। यह मंदिर अब राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया है।
HighLights
शिव मंदिर बना थाईलैंड-कंबोडिया के बीच टकराव का कारण
थाईलैंड ने कंबोडिया पर F16 से किया हमला
अब तक 40 से ज्यादा लोगों की हो चुकी मौत
डिजिटल डेस्क, इंदौर। Thailand Cambodia Conflict: हजार साल पुराने शिव मंदिर को लेकर दो एशियाई देश आपस में भिड़ गए हैं। यह मंदिर भारत में नहीं हैं। यह दो देश थाईलैंड और कंबोडिया हैं। बीते दिन थाईलैंड ने F16 लड़ाकू विमान से कंम्बोडिया के सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया। इस युद्ध में अभी तक 40 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
यह शिव मंदिर थाइलैंड और कंबोडिया की सीमा पर मौजूद है। इसके लिए दोनों देश लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसमें दो बार कंबोडिया की जीत भी हो चुकी है, लेकिन यह विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह मंदिर धार्मिक नहीं बल्कि दो देशों के बीच राष्ट्रवाद का मुद्दा बन गया है।
आइए आपको भारत से हजारों किलोमीटर दूर कंबोडिया में मौजूद इस भव्य व दिव्य शिव मंदिर की रोचक बातें बताएं…
प्रीह विहियर शिव मंदिर (Preah Vihear Temple)
भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का नाम प्रीह विहियर मंदिर है। यह कंबोडिया और थाईलैंड की सीमा पर एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है। मंदिर ऐतिहासिक है, इसलिए इसको यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO) में शामिल किया है।
मंदिर का इतिहास
1 हजार साल पहले प्रीह विहियर मंदिर को खमेर साम्राज्य के दौरान बनाया गया था। इस दौरान वहां कि संस्कृति सनातन धर्म का प्रभाव था। पहाड़ की ऊंची चोटी पर बना मंदिर काफी मनमोहक लगता है। इसके चारों तरफ सुंदर प्राकृतिक नजारे हैं।
मंदिर को बनाने के लिए वास्तुकला का शानदार उपयोग किया गया है। मंदिर के पत्थरों में उस दौर की कला और शिल्प दिखाई पड़ती है।
प्रीह विहियर मंदिर से जुड़ी रोचक बातें
कंबोडिया में स्थित एक ऐतिहासिक शिव मंदिर भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का जीवंत उदाहरण है। यह मंदिर पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित है, जहां शिवलिंग, नंदी और अन्य शिव से जुड़े चिन्ह प्रमुखता से देखे जा सकते हैं। यह दर्शाता है कि उस समय शिव भक्ति कितनी गहरी और व्यापक थी।
यह मंदिर भारत से दूर होने के बावजूद भारतीय मंदिरों जैसा आभास कराता है। इसकी बनावट और मूर्तिकला से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव कंबोडिया में कितना गहरा था। 9वीं से 12वीं सदी के बीच बने इस मंदिर का निर्माण खमेर साम्राज्य के उन राजाओं ने करवाया था, जो हिंदू धर्म को मानते थे।
वर्ष 2008 में इस मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर घोषित किया, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और भी मजबूत हो गई। यह अब दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। मंदिर लगभग 525 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।
पूर्व से पश्चिम दिशा में फैले इस मंदिर में पांच स्तरों पर बनी इमारतें खमेर वास्तुकला की बेमिसाल कला को दिखाती हैं।
मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है और ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। इसके रहस्यमय हिस्से, शिलालेख और जटिल मूर्तियां इसे और भी रोमांचक बनाती हैं। दरवाजों और खंभों पर की गई बारीक नक्काशी में पुराणों और देवताओं की कहानियां उकेरी गई हैं।
वो शिव मंदिर जिसके लिए थाइलैंड-कंबोडिया के बीच छिड़ा युद्ध, जानिए उसकी रोचक बातें
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use. Credit By :-This post was first published on https://jagran.com, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,
वो शिव मंदिर जिसके लिए थाइलैंड-कंबोडिया के बीच छिड़ा युद्ध, जानिए उसकी रोचक बातें
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच स्थित हजार साल पुराना शिव मंदिर विवाद का कारण बन गया है। थाईलैंड ने कंबोडिया पर हवाई हमला कर दिया, जिससे 40 लोगों की मौत और 40 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। यह मंदिर अब राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया है।
HighLights
शिव मंदिर बना थाईलैंड-कंबोडिया के बीच टकराव का कारण
थाईलैंड ने कंबोडिया पर F16 से किया हमला
अब तक 40 से ज्यादा लोगों की हो चुकी मौत
डिजिटल डेस्क, इंदौर। Thailand Cambodia Conflict: हजार साल पुराने शिव मंदिर को लेकर दो एशियाई देश आपस में भिड़ गए हैं। यह मंदिर भारत में नहीं हैं। यह दो देश थाईलैंड और कंबोडिया हैं। बीते दिन थाईलैंड ने F16 लड़ाकू विमान से कंम्बोडिया के सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया। इस युद्ध में अभी तक 40 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
यह शिव मंदिर थाइलैंड और कंबोडिया की सीमा पर मौजूद है। इसके लिए दोनों देश लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसमें दो बार कंबोडिया की जीत भी हो चुकी है, लेकिन यह विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह मंदिर धार्मिक नहीं बल्कि दो देशों के बीच राष्ट्रवाद का मुद्दा बन गया है।
आइए आपको भारत से हजारों किलोमीटर दूर कंबोडिया में मौजूद इस भव्य व दिव्य शिव मंदिर की रोचक बातें बताएं…
प्रीह विहियर शिव मंदिर (Preah Vihear Temple)
भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का नाम प्रीह विहियर मंदिर है। यह कंबोडिया और थाईलैंड की सीमा पर एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है। मंदिर ऐतिहासिक है, इसलिए इसको यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO) में शामिल किया है।
मंदिर का इतिहास
1 हजार साल पहले प्रीह विहियर मंदिर को खमेर साम्राज्य के दौरान बनाया गया था। इस दौरान वहां कि संस्कृति सनातन धर्म का प्रभाव था। पहाड़ की ऊंची चोटी पर बना मंदिर काफी मनमोहक लगता है। इसके चारों तरफ सुंदर प्राकृतिक नजारे हैं।
मंदिर को बनाने के लिए वास्तुकला का शानदार उपयोग किया गया है। मंदिर के पत्थरों में उस दौर की कला और शिल्प दिखाई पड़ती है।
प्रीह विहियर मंदिर से जुड़ी रोचक बातें
कंबोडिया में स्थित एक ऐतिहासिक शिव मंदिर भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का जीवंत उदाहरण है। यह मंदिर पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित है, जहां शिवलिंग, नंदी और अन्य शिव से जुड़े चिन्ह प्रमुखता से देखे जा सकते हैं। यह दर्शाता है कि उस समय शिव भक्ति कितनी गहरी और व्यापक थी।
यह मंदिर भारत से दूर होने के बावजूद भारतीय मंदिरों जैसा आभास कराता है। इसकी बनावट और मूर्तिकला से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव कंबोडिया में कितना गहरा था। 9वीं से 12वीं सदी के बीच बने इस मंदिर का निर्माण खमेर साम्राज्य के उन राजाओं ने करवाया था, जो हिंदू धर्म को मानते थे।
वर्ष 2008 में इस मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर घोषित किया, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और भी मजबूत हो गई। यह अब दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। मंदिर लगभग 525 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।
पूर्व से पश्चिम दिशा में फैले इस मंदिर में पांच स्तरों पर बनी इमारतें खमेर वास्तुकला की बेमिसाल कला को दिखाती हैं।
मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है और ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। इसके रहस्यमय हिस्से, शिलालेख और जटिल मूर्तियां इसे और भी रोमांचक बनाती हैं। दरवाजों और खंभों पर की गई बारीक नक्काशी में पुराणों और देवताओं की कहानियां उकेरी गई हैं।
वो शिव मंदिर जिसके लिए थाइलैंड-कंबोडिया के बीच छिड़ा युद्ध, जानिए उसकी रोचक बातें
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use. Credit By :-This post was first published on https://jagran.com, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,