यूपी- बागपत की दुल्हनिया चढ़ी घोड़ी, गाजे-बाजे के साथ पूरे शहर में घूमी… 7 फेरों से पहले क्यों किया ऐसा? – INA

[ad_1]

बागपत की दुल्हनिया चढ़ी घोड़ी, गाजे-बाजे के साथ पूरे शहर में घूमी… 7 फेरों से पहले क्यों किया ऐसा?

यूपी के बागपत में एक दुल्हनिया ने सात फेरे लेने से पहले ऐसी रस्म निभाई जिसके कारण उसकी हर जगह चर्चा हो रही है. दुल्हनिया घोड़ी पर चढ़ी. फिर बैंड बाजे के साथ वो पूरा शहर घूमी. इस दौरान उसके रिश्तेदारों ने नाच-गाना किया. आजाद नगर कॉलोनी की रहने वाली नमन की शादी है. उससे पहले नमन ने घुड़चढ़ी की रस्म पूरी की. बैंडबाजे के साथ नमन की घुड़चढ़ी नगर में निकली तो लोग देखते रह गए.

सेवानिवृत्त शिक्षक विक्रम की बेटी नमन देहरादून में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में सहायक शाखा प्रबंधक हैं. पिता विक्रम ने अपनी बेटी नमन को दूल्हे की तरह घोड़ी पर बैठाया और पूरे शहर में घुड़चढ़ी कराई. शनिवार शाम साढ़े छह बजे नमन घर से बैंडबाजों के साथ बाहर निकलीं और भाई पीयूष, पिता विक्रम, मां राकेश, बहन मृदुल समेत अन्य रिश्तेदारों ने नमन को घोड़ी पर बैठाया. घुड़चढ़ी घर से चलकर नगर के मुख्य रास्तों से होकर वापस घर पर समाप्त हुई. रास्ते में नमन अपने परिजनों, रिश्तेदारों व सहेलियों के साथ जमकर नाचीं.

क्या बोली दुल्हनिया?

नमन का कहना है कि वह संदेश देना चाहती हैं कि लड़कियां भी लड़कों से कम नहीं होती हैं. बाकी लोग भी इस तरह बेटियों की भावनाओं की कद्र करें. नमन की घुड़चढ़ी में चचेरा भाई राजकुमार, वरुण सिंह, बुआ राजबीरी देवी, मामा रत्नलाल, शेर सिंह आदि शामिल रहे. 2 दिसंबर को नमन का दूल्हा हर्ष बल्लभगढ़ हरियाणा से बरात लेकर आया. फिर धूमधाम से दोनों की शादी हुई.

लड़कियां किसी से कम नहीं

इस अनोखी शादी ने न केवल नमन के परिवार, बल्कि पूरे समाज को एक मजबूत संदेश दिया है. नमन ने कहा, ‘हमारे समाज में बेटियों को हमेशा सीमाओं में बांधकर रखा जाता है. मैं चाहती थी कि मेरी शादी मेरी सोच का प्रतीक बने और यह दिखाए कि बेटियां भी अपने हक और परंपराओं को अपने तरीके से निभा सकती हैं.’ नमन ने घोड़ी पर चढ़कर शादी की अनोखी रस्म निभाई और कहा, ‘लड़के घुड़चढ़ी करते हैं तो यह शान मानी जाती है, फिर लड़कियां क्यों नहीं? हम किसी से कम नहीं.” नमन की पहल समाज में बेटियों के सशक्तिकरण का प्रतीक बन गई है.

[ad_2]
Source link

Back to top button