UP News: 105 साल पुरानी, हर हफ्ते लगता था मेला, अब बचा सिर्फ मलबा… कौन थे फागू शाह, जिनकी मजार पर चला बुलडोजर? – INA


उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में 105 साल पुरानी फागु शाह की मजार पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. मंगलवार की सुबह एडीएम, एसडीएम और एसपी के साथ भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मजार पर बुलडोजर कार्रवाई कर उसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया. 105 साल पुरानी इस मजार पर हफ्ते एक दिन मेला लगता था, जहां कुछ दिनों पहले तक लोगों का तांता लगा रहा था. वहां आज सब कुछ मलबे में मिल गया है.
सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बदलिया गांव में स्थित फागू बाबा की मजार को प्रशासन ने मंगलवार को ध्वस्त कर दिया है. यह मजार 105 साल पुरानी बताई जा रही है, जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोग आकर माथा टेका करते थे. यहां हर गुरुवार को मेला भी लगता था. बुलडोजर कार्रवाई के बाद मजार पूरी तरह से मलबे में मिल गई. फागू बाबा या फागू शाह एक सिद्ध तपस्वी माना जाता था, जो सिद्धार्थनगर के चौखड़ा क्षेत्र के पास कई सालों तक साधना में लीन रहे.
पेड़ के नीचे बनाई थी मजार
करीब 105 साल पहले उनकी मृत्यु के बाद बताया जाता है कि एक पेड़ के नीचे समाधि बना दी गई थी. इसके बाद बंजर इलाके में हरियाली फैल गई. यहां दूर से दूर भक्त आने लगे. भक्तों के भीड़ पहुंचने के बाद यहां मेला लगना शुरू हुआ. समय के साथ इस स्थान ने हिंदुओं और मुसलमानों दोनों समुदायों के लोगों की आस्थाओं को आकर्षित किया. वहां दोनों ही समुदाय मन्नत मांगने और चादर चढ़ाने आते थे.
धर्म पर उठा सवाल
फागू बाबा के धर्म पर लोग सवार उठा रहे हैं. कुछ लोग उन्हें फागू बाबा तो कुछ उन्हें फागू शाह बता रहे हैं. हिंदू धर्म से आने पर लोग इनकी समाधि बनाने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल फागू बाबा किस धर्म से थे. इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन दोनों ही समुदायों की उनकी प्रति गहरी आस्थाएं है. मजार परविवाद तक शुरू हुआ जब 25 जून को डुमरियागंज के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम डुमरियागंज को पत्र लिखकर मजार को समाधि बताया था.
‘आस्था और श्रद्धा का केंद्र’
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि बाबा फागूप्रसाद जी की समाधि एक आस्था और श्रद्धा का पवित्र केंद्र है. वर्तमान में उस समाधि स्थल पर कुछ मौलानाओं द्वारा हर बृहस्पतिवार को भारी संख्या में लोगों को एकत्र कर दुआए भभूत व चमत्कार के नाम पर भ्रमित कर धार्मिक अंधविश्वास फैलाया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन गतिविधियों में 60 से 70 प्रतिशत तक हिंदू समाज की महिलाएं और लड़कियां शामिल हो रही हैं. उन्हें गुमराह कर उस पवित्र स्थल का धार्मिक स्वरूप बदलने की कोशिश की जा रही है.
पूर्व विधायक ने की थी कार्रवाई की मांग
इससे क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक तनाव उत्पन्न हो गया है और यह गंभीर चर्चा का विषय बन चुका है. यह स्थिति न केवल स्थानीय जनमानस की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है बल्कि क्षेत्रीय शांति व व्यवस्था के लिए भी खतरा उत्पन्न कर रही है. आगे पूर्व विधायक राघवेंद्र, एसडीएम से इस मामले को संज्ञान में लेकर इन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की थी.
पूर्व विधायक ने लिखा था कि समाधि स्थल की सुरक्षा स्वच्छता व धार्मिक मर्यादा सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. साथ ही उन्होंने वहां पर 26 जून गुरुवार को हनुमान चालीसा पाठ करने की घोषणा की, जिसके चलते प्रशासन हरकत में आया और तहसील प्रशासन ने उक्त स्थल के आसपास धारा 144 लागू कर दिया.26 जून गुरुवार से वहां पर किसी को भी आने जाने नहीं दिया गया.
स्थगित किया था हनुमान चालीसा पाठ
साथ ही वहां चल रहे सभी क्रियाकलापों पर प्रशासन ने रोक लगा दी. पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने भी प्रशासन की कार्रवाई से संतुष्ट होकर 26 जून को होने वाले हनुमान चालीसा पाठ कार्यक्रम को स्थगित कर दिया था. डुमरियागंज के विधायक सैयदा खातून ने इसको लेकर प्रशासन से आपत्ति दर्ज कराई थी कि उक्त स्थल पर सैकड़ों वर्षों से मजार स्थित है.
प्रशासन ने मजार को किया जमींदोज
विधायक सैयदा खातून ने भाजपा के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप भी लगाया है. प्रशासन की माने तो फागू शाह मजार पशुचर की जमीन पर अवैध तरीके से बनी हुई थी. मंगलवार को प्रशासन ने बुलडोजर से फागू शाह बाबा की मजार को पूरी तरह जमींदोज कर दिया. इस दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल, अपर पुलिस अधीक्षक, एडीएम और एडीएम मौजूद रहे.
(रिपोर्ट- संजय त्रिपाठी/सिद्धार्थनगर)
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