UP News: 400 टन स्क्रैप, 650 जानवर और 6 जोन… कचरे से बने नोएडा के ‘जंगल ट्रेल पार्क’ में और भी है बहुत कुछ – INA


नोएडा शहर लगातार आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस बार उसने कुछ ऐसा किया है जो देश में ही नहीं, दुनिया भर में एक मिसाल बन गया है. सेक्टर 94 में बनाया गया जंगल ट्रेल पार्क सिर्फ एक पार्क नहीं है, बल्कि यह रचनात्मकता, पर्यावरण सुरक्षा और तकनीक का शानदार मेल है. खास बात यह है कि यह पूरा पार्क कबाड़ और बेकार पड़े स्क्रैप से बनाया गया है, जिसे कलाकारों और इंजीनियरों ने मिलकर जीवंत वन्यजीवन का रूप दिया है. 1 दिसंबर 2025 को जनता के लिए खोला गया यह पार्क अब नोएडा की शान बन चुका है और लोग इसे देश के सबसे अनोखे पर्यटन स्थलों में गिनने लगे हैं.
पहले इसे ट्रायल रन के लिए आम लोगों के सामने खोला गया था, ताकि सुझाव और प्रतिक्रिया ली जा सके. लगभग बीस करोड़ से अधिक की लागत से तैयार जंगल ट्रेल पार्क अब 18.27 एकड़ में फैला हरा-भरा संसार बन चुका है, जहां प्राकृतिक जंगल जैसी अनुभूति ही नहीं, बल्कि रोमांच से भरी गतिविधियां भी मौजूद हैं.
जंगल ट्रेल पार्क की सबसे खास पहचान उसका कलात्मक रूप है. जहां कचरा बेकार माना जाता है, वहीं इस पार्क में उसी कबाड़ को नए जीवन का रूप दिया गया है. पुराने लोहे के सरिए, मोटर के पुर्जे, जंग लगे विद्युत पोल, तार और 400 टन के करीब धातु-स्क्रैप को कलाकारों ने चुन-चुनकर इकट्ठा किया है. फिर इन्हें जोड़कर जानवरों, पक्षियों और समुद्री जीवों की ऐसी मूर्तियां बनाई हैं, जिन्हें देखकर किसी को भी यह अनुमान लगाना मुश्किल हो जाए कि यह सब कभी कचरा था.
स्क्रैप से बने जीव-जंतु दिखते हैं असली
करीब 650 से अधिक विशाल और आकर्षक इंस्टॉलेशंस पार्क में लगाए गए हैं. इन्हें सातों महाद्वीपों की वन्यप्रजातियों के आधार पर बनाया गया है. कहीं एशियाई बाघ गरजते दिखते हैं, तो कहीं अफ्रीका के शेरों का समूह. ऑस्ट्रेलिया के कंगारू और कोआला भी दर्शकों का ध्यान खींच लेते हैं. यूरोप की हिरन प्रजातियां और उल्लू भी बेहद वास्तविक लगते हैं. अमेरिका की पहाड़ियों में दिखने वाला ग्रिजली भालू और दक्षिण अमेरिका का जगुआर भी यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं. वहीं, समुद्री जीवों को समर्पित एक खास जोन में व्हेल, शार्क, ऑक्टोपस और डॉल्फिन का अनूठा संसार बनाया गया है, जो रात में रोशनी पड़ने पर बेहद मनमोहक दिखता है. दुनिया में स्क्रैप से बनी इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीव मूर्तियों वाला यह संभवतः पहला ही जंगल सफारी पार्क है.
मियावाकी फॉरेस्ट ने बनाया जंगल थीम
इस पार्क को विशेष बनाने में मियावाकी फॉरेस्ट ने एक और प्रमुख भूमिका निभाई है. यह पद्धति पौधों को बहुत कम समय में घना जंगल बनाने में मदद करती है. एक साल के भीतर 3.5 लाख से ज्यादा पौधों ने इस क्षेत्र को पूरी तरह बदल दिया. जहां पहले वीरान भूमि थी, अब वहां कई प्रकार के पेड़-पौधों की परतें हैं, जिनमें झाड़ियां, छोटे पेड़ और घने ऊंचे पेड़ शामिल हैं. यह घनत्व ऐसा अहसास कराता है मानो आप किसी प्राकृतिक जंगल में भटक रहे हों.
पार्क में जैसे-जैसे शाम ढलती है, रोशनी और ध्वनि का संयोजन पूरे माहौल को और भी जीवंत कर देता है. स्पीकरों के जरिए जानवरों की आवाजें, हवा की सरसराहट और जंगल के माहौल को दर्शाने वाली ध्वनियां सुनाई देती हैं. बच्चे इन ध्वनियों को पहचानने की कोशिश करते हैं और बड़ों को भी यह एक रोमांचक अनुभव देता है.
रात होते ही बदल जाता है पूरा वातावरण
जंगल ट्रेल पार्क की एक और खासियत है उसका नाइट-व्यू अनुभव. जैसे ही सूरज ढलता है, जानवरों के आकार वाली स्क्रैप मूर्तियां रंग-बिरंगी रोशनियों से चमकने लगती हैं. समुद्री जीवों वाली मूर्तियां नीली और हरी रोशनी में अलग ही दुनिया रचती हैं, जबकि जंगल जोन में लगी लाइटें वन्यजीवों की छाया को और प्रभावशाली बना देती हैं. ऐसा महसूस होता है मानो आप किसी नाइट सफारी का हिस्सा हों. यह अनुभव न सिर्फ रोमांच देता है, बल्कि बच्चों को यह भी समझाता है कि कला और तकनीक मिलकर कैसे प्रकृति का आभासी संसार निर्मित कर सकते हैं.
रोमांच से भरपूर गतिविधियां
जंगल ट्रेल पार्क केवल देखने भर के लिए नहीं बनाया गया है. यहां हर उम्र के लोग एडवेंचर और मनोरंजन दोनों का आनंद ले सकते हैं. पार्क में लगाई गई गतिविधियां खास तौर पर युवाओं और परिवारों को आकर्षित करती हैं. जिप-लाइनिंग और जिप-साइक्लिंग के माध्यम से हवा में उड़ने का मजा लिया जा सकता है. पत्थरों जैसी बनावट वाले कृत्रिम ढलानों पर रॉक क्लाइम्बिंग की सुविधा भी उपलब्ध है.
नाव चलाने का अनुभव चाहने वालों के लिए एक छोटा तालाब बनाया गया है. बच्चों के लिए अलग खेल क्षेत्र बनाए गए हैं, जहां वे सुरक्षित माहौल में खेल सकते हैं. बंजी-स्टाइल एडवेंचर सेटअप भी यहां बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करते हैं. इन सभी गतिविधियों के लिए अलग टिकट शुल्क रखा गया है.
जंगल ट्रेल पार्क क्या है समय समय
- पार्क हर दिन सुबह 9:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है.
जंगल ट्रेल पार्क में कितने का है टिकट
- इस पार्क को घूमने के लिए प्रति व्यक्ति 120 रुपये देने होते हैं.
- 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पार्क में प्रवेश निःशुल्क है
- टिकट ऑनलाइन और काउंटर दोनों तरीके से उपलब्ध हैं.
- एडवेंचर गतिविधियों के लिए अलग शुल्क लिया जाता है.
पार्क में मिलने वाली सुविधाएं भी हैं खास
एक बड़े पार्क की तरह, जंगल ट्रेल में भी विजिटर्स की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है. पार्क के भीतर एक सुंदर फूड कोर्ट बनाया गया है, जिसमें कई तरह के फूड काउंटर हैं. इसके अलावा 1000 सीटों वाला एक एम्फीथिएटर भी है जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्कूल इवेंट और सार्वजनिक बैठकें आयोजित की जा सकती हैं.
पार्क में पार्किंग की व्यवस्था भी बेहतरीन है. आठ बसों और 76 कारों के लिए पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध है. अंदर घूमने के लिए ई-कार्ट सेवा भी दी गई है, खासकर उन लोगों के लिए जो पैदल चलने में कठिनाई महसूस करते हैं. शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था, खुले में बैठने का स्थान इसे और आकर्षण स्थल बनाते हैं.
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