UP News: बागपत में मिले 4500 साल पुराने बेशकीमती अवशेष, इस सभ्यता से जुड़े तार – INA


उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का एक गांव इतिहास की सुर्खियों में है. यहां एक खेत से मिले प्राचीन अवशेषों को भारतीय उपमहाद्वीप की कांस्य युगीन संस्कृति (ओसीपी ओकर्ड कलर्ड पॉटरी) कल्चर का साक्ष मिला है. इतिहासकारों ने इसे अत्यंत महत्वपूर्ण खोज माना है. फिलहाल यह खोज स्थानीय लोगों के लिए उत्सुकता का विषय बन गई है.
जानकारी के अनुसार जिले के तिलवाड़ा गांव के किसान दुरजा के खेत में मिट्टी समतलीकरण के दौरान बड़ी आकार की ईंटें और प्राचीन मृदभांड (मिट्टी के पात्र) मिले है. संरचना को गहराई से देखने पर यह सामान्य दीवार नहीं बल्कि एक सुविकसित प्राचीन कुआं प्रतीत हुआ. इसके बाद रविवार को शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक और इतिहासकार डॉ. अमित राय जैन ने स्थल का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया. उनके अनुसार यह कुआं करीब 4500 वर्ष पुराना है और ओसीपी संस्कृति का दुर्लभ व अत्यंत महत्त्वपूर्ण अवशेष है.
पहले भी जिले में मिल संस्कृति अवशेष
डॉ. जैन ने बताया कि अब तक बागपत जिले में इस संस्कृति के चिह्न तो मिले थे, परंतु ओसीपी काल का कुआँ पहली बार मिला है, जो यहां के प्राचीन मानव बसावट, जल प्रबंधन और सामाजिक संरचना का प्रमाण देता है. इससे पहले जिले के बामनौली क्षेत्र से कुषाण काल (लगभग 1800 से 2000 वर्ष पुराना) का कुआं मिला था, परंतु तिलवाड़ा का यह कुआं उससे दोगुना प्राचीन माना जा रहा है. यह खोज यह भी संकेत देती है कि यह क्षेत्र एक समय उन्नत कृषि और जल संरचना के विकास में अग्रणी रहा होगा.
सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त गेरुआ रंग के छिद्रयुक्त बर्तन, काले पैटर्न वाली मिट्टी की हांडियां और सामान्य ईंटों से कहीं बड़ी आकार की पकी ईंटों ने यहां की सभ्यता की विशिष्टताओं को उजागर किया है. ओसीपी संस्कृति अक्सर उत्तर हड़प्पा और प्रारंभिक वैदिक काल के बीच का सांस्कृतिक पुल कहलाई जाती है, ऐसे में यह कुआं, मानव निवास, धार्मिक जीवन और स्थानीय समुदाय की संरचना को समझने में नई दिशा देगा.
इतिहासकारों ने क्या कहा?
इतिहासकारों का मानना है कि तिलवाड़ा क्षेत्र केवल एक गांव भर न होकर संभवतः एक प्राचीन बसावट या ग्राम-नगरीय केंद्र रहा होगा, जहां सामाजिक रूप से संगठित जीवन, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और कारीगरी का विकास मौजूद था.
यदि उत्खनन आगे बढ़ा, तो यहां मानवाकृत मूर्तियां, तांबे के उपकरण, अनाज भंडारण के अवशेष और आवासीय संरचनाएं मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. यह खोज पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भारतीय सभ्यताओं के मानचित्र पर और अधिक स्पष्टता तथा नई पहचान दिला सकती है.
ASI को भेजी जाएगी रिपोर्ट
खेत से लगातार मिट्टी उठान से इस धरोहर को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई थी. हालांकि किसान ने पुरातत्व विभाग के निर्देश पर खेत की जुताई व मिट्टी हटाने का कार्य रोक दिया है. डॉ. अमित राय जैन ने बताया कि स्थल की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक डॉ. युद्धवीर सिंह को सौंपा जाएगा.
इसके बाद यहां वैज्ञानिक उत्खनन के लिए औपचारिक अनुरोध किया जाएगा. ताकि, दबी सभ्यता को संरक्षित व अध्ययन किया जा सके. यह खोज न केवल बागपत बल्कि पूरे उत्तर भारत की सांस्कृतिक जड़ों को समझने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अध्याय जोड़ सकती है.
बागपत में मिले 4500 साल पुराने बेशकीमती अवशेष, इस सभ्यता से जुड़े तार
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