UP News: एक लार टपकी और बन गई शापित नदी, नहाने से खत्म हो जाते हैं सभी पुण्य… नाम से भी डरते हैं लोग, जानें क्या है इतिहास – INA

उत्तर प्रदेश के चंदौली में कर्मनाशा नदी है. इतिहासकारों का मानना है कि इस नदी का नाम लोक कथाओं से जुड़ा है, जिसका मतलब कर्म का नाश करने वाला माना जाता है. ऐसे में इस नदी के पानी को छूने या पीने से लोग परहेज करते हैं. कहा जाता है कि जो भी इस नदी में नहाता है. उसके सारे पुण्य खत्म हो जाते हैं. इसलिए इस नदी को अपवित्र माना जाता है.
कुछ विद्वानों के मुताबिक राजा त्रिशंकु जो शरीर समेत स्वर्ग जाना चाहते थे. उन्होंने अपने गुरु से शरीर समेत स्वर्ग जाने की इच्छा जताई, लेकिन उनके गुरु वशिष्ठ ने उन्हें वरदान देने से इनकार कर दिया. फिर त्रिशंकु यानी राजा हरिश्चंद्र के पिता सत्यव्रत वशिष्ठ के दुश्मन ऋषि विश्वामित्र के पास गए. वशिष्ठ और ऋषि विश्वामित्र के बीच पुरानी दुश्मनी थी. इसलिए विश्वामित्र ने त्रिशंकु को शरीर समेत स्वर्ग भेजने का फैसला किया.
विश्वामित्र ने अपने तब के बल पर सत्यव्रत को सशरीर स्वर्ग भेजा था, जिससे इंद्रदेव क्रोधित हो गए. उन्होंने सत्यव्रत को स्वर्ग से उल्टा करके वापस धरती पर गिरा दिया, लेकिन विश्वामित्र ने अपने तप के बल से सत्यव्रत को धरती और स्वर्ग के बीच रोक दिया. ऐसे में वह बीच में लटक गए और त्रिशंकु बन गए. उनके मुंह से लार टपकी और कर्मनाशा में रूप में नदी बनी. त्रिशंकु को वशिष्ठ का श्राप मिला था. इसलिए कर्मनाशा नदी को भी शापित माना जाता है और इसके पानी को लोग पीने या इस्तेमाल में लेने से कतराते हैं. लोग इस नदी के जल को अशुद्ध मानते हैं.
कर्मनाशा नदी बिहार के कैमूर से निकलती है और उत्तर प्रदेश मे बहती है. यह नदी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली जिलों से होकर बहती है. यह नदी यूपी, बिहार को भी जोड़ती है. इस नदी की लंबाई 192 किलोमीटर है. यह नदी बिहार के बक्सर जिले के चौसा गांव के पास गंगा नदी में मिल जाती है और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के बड़ा गांव के पास गंगा मिलती है.
कर्मनाशा नदी पर दो बांध हैं. एक लतीफ शाह और दूसरा नुआगढ़ बांध. इनसे लोग सिंचाई करते हैं. कर्मनाशा नदी पर पहला पुल किसने बनवाया. इसका कोई प्रमाण नहीं है. ऐतिहासिक रूप से कर्मनाशा नदी पर पुलों का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान और उसके बाद अहम रहा. खासकर 19वीं और 20वीं शताब्दी में इन पुलों का उद्देश्य नदी के दोनों किनारों को परिवहन और संचार को जोड़ना है. (रिपोर्ट-विवेक पांडेय, चंदौली)
एक लार टपकी और बन गई शापित नदी, नहाने से खत्म हो जाते हैं सभी पुण्य… नाम से भी डरते हैं लोग, जानें क्या है इतिहास
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