UP News: APK फाइल और फर्जी ट्रस्ट का जाल: बरेली में करोड़ों के डिजिटल स्कैम का भंडाफोड़, डॉक्टर समेत 5 अरेस्ट, चीन से निकला कनेक्शन – INA

Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली में साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. कैंट थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. खास बात ये है कि इस गिरोह में एक होम्योपैथिक डॉक्टर भी शामिल है. पुलिस जांच में सामने आया है कि ये लोग चीन के साइबर गैंग के संपर्क में रहकर पूरे देश में ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में तीन बरेली के रहने वाले हैं, जबकि एक अंबेडकर नगर का डॉक्टर और एक बाराबंकी का निवासी है. इनके पास से हथियार, मोबाइल, लैपटॉप, बैंक खातों के दस्तावेज और कई अहम सबूत बरामद किए गए हैं.
सीओ प्रथम आशुतोष शिवम ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी. इसके बाद कैंट थाना प्रभारी संजय धीर ने टीम के साथ कृष्णा कॉलोनी रोड पर घेराबंदी की. वहां एक काली कार खड़ी थी, जिसमें बैठे पांच लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया. पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम शाकिब अली, राजकुमार, आशीष सिंह, डॉक्टर सचेंद्र कुमार और बब्लू उर्फ माधोराम बताए. जांच में पता चला कि इस गिरोह का सरगना सुमित है, जो लखनऊ में रहता है और WhatsApp के जरिए पूरे गैंग को ऑपरेट करता है.
गिरोह के सदस्य WhatsApp ग्रुप के माध्यम से जुड़े हुए थे, जिसमें चीन के साइबर ठग भी शामिल थे. ये लोग एपीके फाइल और फर्जी ऐप का इस्तेमाल करके लोगों के मोबाइल तक पहुंच बनाते थे और फिर उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे.
डॉक्टर के खाते में आता था ठगी का पैसा
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से जो भी पैसा आता था, वो सबसे पहले डॉक्टर सचेंद्र के खाते में जमा किया जाता था. इसके बाद उस रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था. इस गिरोह ने एसआर संस एंड ग्रुप्स ट्रस्ट नाम से एक ट्रस्ट बना रखा था. इसी ट्रस्ट के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए थे. इन खातों के जरिए ठगी का पैसा घुमाया जाता था ताकि आसानी से पकड़े न जाएं. डॉक्टर सचेंद्र इस रकम में से करीब 15 प्रतिशत हिस्सा खुद रखता था. बाकी पैसा गिरोह के अन्य सदस्यों और सरगना सुमित तक पहुंचता था.
तिहाड़ जेल से सीखी ठगी की तकनीक
गिरफ्तार आरोपी शाकिब ने पुलिस को बताया कि उसने साइबर ठगी के तरीके तिहाड़ जेल में बंद कुछ लोगों से सीखे थे. बाद में उसने सुमित, डॉक्टर सचेंद्र और अन्य साथियों के साथ मिलकर यह गिरोह बना लिया. गिरोह के सदस्य लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे. फिर उन्हीं खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसे ट्रांसफर करने में किया जाता था.
देशभर में फैला था ठगी का जाल
पुलिस जांच में पता चला कि इस ट्रस्ट से जुड़े करीब 22 बैंक खातों के जरिए देशभर में ठगी की गई. इन खातों से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है. एनसीआरपी पोर्टल पर इन खातों के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें दर्ज हैं.
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एक मामले में ही करीब 1.55 करोड़ रुपये की ट्रेडिंग ठगी सामने आई है. ट्रस्ट के नाम पर खाता होने के कारण इसमें बड़ी रकम का लेनदेन आसानी से हो जाता था और तुरंत शक भी नहीं होता था.
APK फाइल और डिजिटल अरेस्ट से बनाते थे शिकार
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप से कई एपीके फाइल मिली हैं. इन फाइलों के जरिए लोगों के फोन में सेंध लगाई जाती थी. इसके अलावा ये लोग ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से लोगों को डराकर पैसे ऐंठते थे. गिरोह के पास से तमंचा, कारतूस, कई मोबाइल फोन, चेकबुक, एटीएम कार्ड, आधार-पैन कार्ड की कॉपियां और अन्य दस्तावेज भी मिले हैं.
फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के सरगना सुमित और अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा.
APK फाइल और फर्जी ट्रस्ट का जाल: बरेली में करोड़ों के डिजिटल स्कैम का भंडाफोड़, डॉक्टर समेत 5 अरेस्ट, चीन से निकला कनेक्शन
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