UP News: बहराइच हिंसा: कौन था राम गोपाल मिश्रा? जिसके हत्यारे को 14 महीने में मिली फांसी की सजा – INA


बहराइच के महसी इलाके में करीब एक साल पहले हुई हिंसा के मामले में गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने राम गोपाल मिश्रा की हत्या के केस में फैसला सुनाते हुए दोषी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई. वहीं बाकी बचे अन्य 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. राम गोपाल मिश्रा की हत्या के इस केस में कोर्ट ने 9 दिसंबर को 13 आरोपियों में से 10 को दोषी ठहराया था, जबकि तीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. 13 महीने 26 दिन में कोर्ट में इस केस का ट्रायल, जिसके बाद आज फैसला आया. आइए जानते हैं बहराइच हिंसा की पूरी कहानी, जिसमें राम गोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी….
दरअसल, हिंसा की ये आग महसी थाना क्षेत्र के महराजगंज इलाके में भड़की थी. नवरात्रि समाप्ति के बाद दुर्गा प्रतिमा का विर्सजन हो रहा था. 13 अक्टूबर 2024 को एक दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का जुलूस इसी महराजगंज इलाके से गुजर रहा था. चूंकि जुलूस में DJ भी था तो गाने भी बज रहे थे. इसी दौरान जुलूस महराजगंज कस्बे की एक मस्जिद के पास से गुजरा तो DJ पर बजते भड़काऊ गानों और नारों को लेकर एक समुदाय विशेष के लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि DJ को बंद करके आगे जुलूस निकाला जाए, जबकि दूसरा पक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ.
DJ का तार निकालते ही भड़क उठे लोग
इस पर समुदाय विशेष के लोगों ने DJ का तार निकाल दिया. इसके बाद जुलूस में शामिल लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए. देखते ही देखते समुदाय विशेष के लोग अपनी छत पर से ईंट और पत्थर फेंकने लगे. इससे विसर्जन के लिए ले जाई जा रही मूर्ति खंडित हो गई. मूर्ति के खंडित होते ही जुलूस में शामिल लोग भड़क गए और महराजगंज कस्बे में आगजनी और बवाल काटने लगे. मौके पर मौजूद महसी थाने की पुलिस हालत को काबू में नहीं कर पाई.
ये भी पढ़ें- बहराइच हिंसा के दोषी सरफराज को फांसी की सजा, 9 को उम्रकैद; मूर्ति विसर्जन के दौरान राम गोपाल मिश्रा की हुई थी हत्या
विसर्जन जुलूस में शामिल राम गोपाल मिश्रा (22) DJ को लेकर आपत्ति जताने वाले सरफराज के घर पर चढ़ गए और हरा झंडा निकालकर भगवा झंडा फहराने लगे. इसका वीडियो भी सामने आया था. वहीं जब महसी थाने की पुलिस हालत को काबू में नहीं कर पाई तो आनन-फानन में अन्य थानों की फोर्स के साथ पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस को हालत को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. इस दौरान दुकानों और उसके बाहर खड़ी बाइकों और कारों को दंगाइयों ने आग के हवाले कर दिया.
सरफराज के घर में राम गोपाल को मारी गई गोली
बताया जा रहा है कि लाठीचार्ज के दौरान भीड़ के बीच में भाग रहे राम गोपाल मिश्रा को समुदाय विशेष के लोगों ने पकड़ लिया और सरफराज के घर के अंदर ले गए. पहले तो उसके साथ मारपीट की और फिर उसके शरीर पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उसकी जान ले ली. जब उसे बचाने के लिए राजन पहुंचा तो उसके साथ भी मारपीट की गई. इस वारदात के बाद सरफराज और उसका पिता अब्दुल हमीद सहित अन्य लोग घर से फरार हो गए. घायल राजन ने लोगों को राम गोपाल की हत्या की जानकारी दी.
पुलिस नहीं रोक पाई दंगा!
आनन-फानन में जुलूस में मौजूद लोग राम गोपाल को हालत गंभीर में मेडिकल कॉलेज लेकर भागे, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. जैसे ही राम गोपाल की मौत की सूचना मिली तो लोगों का गुस्सा भड़क गया और वो हिंसा पर उतारू हो गए. मूर्ति विसर्जन यात्रा को बीच में ही रोक दिया गया. सभी ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी. मामला बढ़ता देख लखनऊ से सरकार और शासन एक्टिव हुआ.
STF चीफ अमिताभ यश ने संभाला मोर्चा
CM योगी के आदेश के बाद लखनऊ से ADG लॉ एंड ऑर्डर और STF चीफ अमिताभ यश मौके पह पहुंचे. उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह हाथ में पिस्टल पकड़े हुए थे और भीड़ की ओर ताने हुए थे. इससे भीड़ भागती हुई नजर आ रही थी. हालात को संभालने के लिए आनन-फानन में बहराइच में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई. महसी थाना क्षेत्र में जगह-जगह पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई. हिंसा में पुलिस ने एक-एक कर 30 से अधिक दंगाइयों को गिरफ्तार किया.
महसी थाने में राम गोपाल मिश्रा की हत्या के केस के अलावा दंगे से प्रभावित 10 FIR हरदी थाने और दो मामले रामगांव थाने में दर्ज किए गए थे. तत्कालीन एसएचओ सुरेश कुमार वर्मा को हटाकर कमल शंकर चतुर्वेदी को हरदी थानाध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी. पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दंगा पर नियंत्रण व आरोपियों की गिरफ्तारी की थी.
अब कोर्ट का फैसला आया
राम गोपाल मिश्रा की हत्या के केस में तत्कालीन थानाध्यक्ष कमल श्रृंकर चतुर्वेदी ने विवेचना के बाद 11 जनवरी 2025 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी. यही नहीं कोर्ट ने इस मामले में तेजी से संज्ञान लेते हुए 18 फरवरी को 13 आरोपियों पर अपराध तय किए. हालांकि इनमें से तीन को बरी कर दिया गया. वहीं राम गोपाल की हत्या के दोषी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि 9 को उम्रकैद की सजा मिली.
ये आरोपी दोषी करार, 3 कोर्ट से हुए बरी
दोषी ठहराए गए आरोपी अब्दुल हमीद, उसके बेटे फहीम, सरफराज, तालिब, सैफ, जावेद, जीशान, ननकऊ, शोएब और मारुफ हैं. बरी हुए खुर्शीद, शकील और अफजल हैं आरोपियों पर BNS की धारा 103(2) (मॉब लिंचिंग में हत्या) लगी है, जिसमें फांसी या आजीवन कारावास का प्रावधान है. अन्य धाराएं 191(2), 191(3), 190, 109(2), 249, 61(2) और आर्म्स एक्ट की धारा 30 हैं, जिनमें 2 से 5 वर्ष तक की सजा या मौत की सजा तक हो सकती है.
बहराइच हिंसा: कौन था राम गोपाल मिश्रा? जिसके हत्यारे को 14 महीने में मिली फांसी की सजा
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
[ad_1] #INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,










