UP News: Chitrakoot Donkey Fair: भगवान राम की कर्मभूमि पर औरंगजेब ने क्यों शुरू करवाया था गधा मेला? – INA

UP News: Chitrakoot Donkey Fair: भगवान राम की कर्मभूमि पर औरंगजेब ने क्यों शुरू करवाया था गधा मेला? – INA

Chitrakoot Donkey Fair: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में प्रदेश का सबसे बड़ा गधा मेला शुरू हो गया है. मेले में यूपी, एमपी, बिहार और नेपाल से व्यापारी पहुंचे हैं, जो 300 से अधिक गधे, खच्चर और घोड़े लेकर आए हैं. मेले में इस बार भी मेले में इस बार भी फिल्मी सितारों के नाम वाले गधे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. बाजार में अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित, आलिया भट्ट, शाहरुख खान, अल्लू अर्जुन उर्फ पुष्पा राज, काजोल नाम के गधे खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं.

व्यापारी गधों की नस्ल, ताकत और चाल देखकर बोली लगा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस बार भी सलमान, शाहरुख, बसंती और धोनी नाम के गधों की बोली सबसे ऊंची लग सकती है. पिछले साल सलमान 1.85 लाख रुपए और शाहरुख 1.25 लाख रुपए में बिका था, जबकि बसंती 85 हजार रुपए में बिकी थी.

क्या है इस मेले की मान्यता?

मंदाकिनी नदी के रामघाट के पास लगने वाला यह पारंपरिक मेला तीन दिनों तक चलेगा. यहां बिकने वाले गधों का उपयोग निर्माण कार्यों और ईंट-भट्ठों में माल ढोने के लिए किया जाता है. ऐतिहासिक रूप से इस मेले की शुरुआत औरंगजेब के शासनकाल (सन 1670) में हुई मानी जाती है. पुष्कर मेले के बाद इसे देश का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है.

मंदाकिनी नदी के तट पर लगता है मेला

मान्यता है कि औरंगजेब द्वारा भगवान राम की तपो स्थली चित्रकूट में मंदाकिनी तट पर यह मेल लगवाया गया था. मध्य प्रदेश क्षेत्र के चित्रकूट में लगने वाला यह अद्भुत मेल अपने आप में विशेष इसलिए भी है, क्योंकि इस मेले में लोगों की कई पीढ़ियां खप गईं. व्यापारी और खरीदारों की मानें तो उनके पूर्वज यहां आते थे. यहां से गधे ले जाते थे. बहुत सारे व्यापारी गधों को घोड़ा भी बोलते हैं.

महिला व्यापारी भी आईं गधा मेले में

जब इन गधों के व्यापारी और खरीदारों से बात की गई तो उनका कहना है कि हम लोग इन गधों को कच्ची ईंट की पथाई और सामग्री की धुलाई में लगाते हैं. प्रतिदिन 1500 से 2500 रुपए तक कमा लेते हैं. वहीं व्यापारियों के साथ महिला व्यापारी भी इस मेले में पहुंची थीं. एक महिला व्यापारी ने कहा कि हमारी दो-तीन पीढ़ियां यहां पर आते-जाते गुजर चुकी हैं. अब हम लोग आ रहे हैं. आज हमने 17 गधे खरीदे हैं.

कौन देखता है मेले की व्यवस्था?

मेले की व्यवस्था देख रहे ठेकेदार बग्गड़ पांडे ने बताया कि इस बार मेला कुछ खास नहीं है. धीरे-धीरे व्यापार हो रहा है. टेक्नालॉजी के बढ़ते युग के चलते अब गधों के मेले में काफी कमी आई है. बग्गड़ पांडे ने बताया कि यह मेला औरंगजेब ने लगवाया था. हम इसको सुचारू रूप से चलाने का प्रयास करते आ रहे हैं.

IAS महिपाल गुर्जर ने दी जानकारी

मेले को लेकर जानकारी देते हुए मेला प्रभारी IAS महिपाल गुर्जर ने बताया कि चित्रकूट में यह अद्भुत मेला लगता है. मध्य प्रदेश क्षेत्र में लगने वाले इस मेले में हम लोग समुचित व्यवस्था करते हैं. आगे और भी क्या इसमें व्यवस्थाएं की जाएं, जिससे कि यह मेला और बेहतर हो, इस पर हम लोग कार्य करेंगे.

Chitrakoot Donkey Fair: भगवान राम की कर्मभूमि पर औरंगजेब ने क्यों शुरू करवाया था गधा मेला?




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