UP News: कोडीन कफ सिरप केस: वाराणसी में शुभम जायसवाल के 2 गुर्गे गिरफ्तार, बताया- कैसे चल रहा था नशे का ये रैकेट? – INA


वाराणसी के थाना कोतवाली में सोमवार दोपहर 12 बजे मास्क पहने दो युवकों को पुलिस मीडिया के सामने पेश करती है. दोनों 32 से 35 साल के आसपास थे. इन दोनों को शुभम जायसवाल के लिए काम करने वाला बताया गया. SIT वाराणसी के प्रमुख गौरव बंशवाल और DCP क्राइम और SIT सदस्य टी. सरवनन ने मीडिया के सामने इन दोनों की गिरफ्तारी दिखाई और इन दोनों को खुद ही बताने को कहा कि वो कैसे इस मामले को अंजाम देते थे.
आरोपी विशाल कुमार जायसवाल ने बताया कि उसके फर्म हरिओम फार्मा के द्वारा 4,18,000 कोडीन मिक्स कफ सिरप की शीशी भोला प्रसाद की फर्म शैली ट्रेडर्स रांची (झारखंड) से खरीदी गई. करीब पांच करोड़ रुपए से अधिक में बेचा गया, जबकि बादल आर्या ने बताया कि उसके फर्म काल भैरव ट्रेडर्स के द्वारा शैली ट्रेडर्स रांची (झारखंड) से 1,23,000 कोडीन मिक्स कफ सिरप की शीशी खरीदी गई. करीब दो करोड़ रुपए से अधिक में बेचा गया. आरोपियों द्वारा ये भी स्वीकार किया गया कि अपनी फर्मों के नाम पर ये फर्जी ई बिल भी तैयार करते थे.
प्रति शीशी एक रुपए देता था शुभम जायसवाल
दोनों आरोपियों विशाल जायसवाल और बादल आर्या ने बताया कि सिरप की प्रति शीशी पर एक रुपए शुभम जायसवाल देता था. महीने में 35 से 40 हजार की कमाई हो जाती थी. हम लोग कूटरचित और फर्जी दस्तावेज के जरिए ड्रग लाइसेंस हासिल करते थे. हम लोगों के बैंक अकाउंट की पूरी जानकारी शुभम के खास देवेश जायसवाल के पास थी. रुपए ट्रांसफर करने के समय देवेश जायसवाल हमसे ओटीपी भी मांगता था.
हम लोगों के द्वारा एक वर्ष के अंदर करीब सात करोड़ रुपए का व्यापार किया गया. हम लोगों की फर्म सिर्फ दिखाने के लिए थी, जबकि शैली ट्रेडर्स से जो भी माल हमारे फर्म के नाम पर आते थे, वह हमारे यहां न आकर दूसरी जगह भेज दिए जाते थे. इसके ई-बिल और टैक्स इनवाइस हम लोग अपनी फर्म के माध्यम से तैयार करते थे.
रसूखदारों और बड़े नामों पर कन्नी काट गई SIT!
वहीं कोडीन मिक्स कफ सिरप मामले में जब SIT से मीडिया ने कुछ चुभते हुए सवाल किए तो पुलिस अफसर जवाब देने में असहज दिखे.
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पूछे गए ये सवाल
- ड्रग लाइसेंस लेने के लिए सब कुछ जब ऑन पेपर चल रहा था तो विभाग के लोग क्या कर रहे थे?
- 5 साल पहले मर चुकी महिला के नाम पर रेंट एग्रीमेंट बनता है और देवेश जायसवाल ड्रग एक्सपीरियंस
- सर्टिफिकेट बनाकर देता था तो विभाग के लोग क्या कर रहे थे?
- भौतिक सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
- क्या उनसे कोई पूछताछ हुई?
- पूर्व में असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग रह चुके अधिकारी का नाम आ रहा है, क्या उनसे कोई पूछताछ हुई?
जवाब- SIT वाराणसी के प्रमुख गौरव बंशवाल ने कहा कि देखिए ये विभागीय मामला है. हम अभी 40 फर्मों पर अपना फोकस रखे हैं, जिन पर एफआईआर दर्ज है.
सवाल: क्या उन रसूखदारों से भी पूछताछ हुई है, जो शुभम जायसवाल के साथ तस्वीरों में दिख रहे हैं. जिन पर शुभम को बचाने और संरक्षण देने का आरोप है.
जवाब-हम अभी 40 फर्मों पर ही नजर बनाए हुए हैं, लेकिन जांच हर एंगल से चल रही है.
सवाल: कितने का सिंडिकेट है? ड्रग डिपार्टमेंट की अधिकारी ने 100 करोड़ का बताया था तो ईडी के सोर्स इसे हजार करोड़ का बता रहे हैं?
जवाब- (टी. सरवनन डीसीपी क्राइम)- देखिए अभी इन दो फर्म से सात करोड़ के लेन-देन का पता चला है. ऐसे कुल 40 फर्म हैं. हम जांच कर रहे हैं.
सवाल: कहां है शुभम जायसवाल? वीडियो जारी कर रहा है और अंतरिम जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंचा है.
जवाब (टी. सरवनन डीसीपी क्राइम)- हम उस वीडियो का आईपी एड्रेस निकलवा रहे हैं. हम लुक आउट सर्कुलर जारी करने की तैयारी में हैं.
कोडीन कफ सिरप केस: वाराणसी में शुभम जायसवाल के 2 गुर्गे गिरफ्तार, बताया- कैसे चल रहा था नशे का ये रैकेट?
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