UP News: Dhanteras 2025: मुरादाबाद में पीतल की चमक, इन आइटम्स की बढ़ी डिमांड; बढ़ाई बाजार की रौनक – INA


धनतेरस और दीपावली की चमक मुरादाबाद के बाजारों में भी देखने को मिल रही है. पीतल नगरी के नाम से मशहूर मुरादाबाद में पीतल के सजावटी सामान, होम डेकोरेशन आइटम्स, गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल उत्पाद और सोने-चांदी के सिक्कों की मांग ने बाजार की रौनक बढ़ा दी है. मंडी चौक से लेकर सर्राफा बाजार तक हर दुकान पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है. इस बार लोग न सिर्फ धार्मिक मान्यता के तहत बल्कि घर की साज-सज्जा के लिए भी नए ट्रेंड्स अपनाते नजर आ रहे हैं.
मुरादाबाद के मंडी चौक में इस बार धनतेरस की खरीदारी का रंग कुछ अलग है. पीतल के उत्पादों की चमक से बाजार सुनहरा दिख रहा है. दुकानदार किशन खन्ना के अनुसार, हर साल उत्पादों में बदलाव देखने को मिलता है, पर इस बार वाल ट्री, डेकोरेटिव शंख-घंटी, लेमन सेट और मिनिएचर गिफ्ट आइटम्स की जबरदस्त मांग है. पारंपरिक लट्टू और छोटे दिए भी ग्राहकों को खूब भा रहे हैं. पीतल के उत्पादों की रेंज ₹100 से लेकर ₹10 लाख तक है, जिससे हर वर्ग के लोग अपनी पसंद का सामान ले पा रहे हैं. लोग अब पूजा के साथ-साथ होम डेकोरेशन के लिए भी पीतल को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को भी अच्छा लाभ मिल रहा है.
बाजार में बढ़ी रौनक
इस बार मुरादाबाद में दीपावली उत्सव को प्रकृति से जोड़ने की खास पहल की गई है. स्थानीय कारीगर गौमाता के शुद्ध गोबर से दीये और मूर्तियां बना रहे हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल और बेहद आकर्षक हैं. ये उत्पाद धार्मिक आस्था और स्वदेशी सोच का अनूठा संगम बन गए हैं. 10 रुपये से 500 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध ये दीये और मूर्तियां अब केवल स्थानीय बाजारों में नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी पसंद की जा रही हैं. लोग इन्हें न केवल पूजा में इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि अपने घर की सजावट में भी शामिल कर रहे हैं. इस पहल के जरिए मुरादाबाद पर्यावरण संरक्षण और परंपरा दोनों को संतुलित रूप में आगे बढ़ा रहा है.
सोना-चांदी के सिक्कों की जबरदस्त मांग
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है, और इस परंपरा को निभाने में मुरादाबाद के लोग भी पीछे नहीं हैं. सर्राफा बाजारों में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं और खासकर चांदी के सिक्कों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री देखी जा रही है. चांदी की कीमतें बढ़कर ₹1,50,000 किलो तक पहुंच गई हैं, बावजूद इसके ग्राहकों की संख्या में कमी नहीं आई है. इस साल विक्टोरिया, लक्ष्मी-गणेश डिज़ाइन वाले सिक्कों की भारी मांग है. सिक्के 2 ग्राम से 50 ग्राम तक के वजन में उपलब्ध हैं. सर्राफों के अनुसार, महंगे सोने-चांदी की मूर्तियों की जगह अब लोग ज्यादातर सिक्के ही खरीद रहे हैं ताकि पूजा के साथ निवेश का लाभ भी मिल सके.
तीन अलग-अलग परंपराओं का संगम
मुरादाबाद का यह त्योहार बाजार इस बार तीन अलग-अलग परंपराओं और मूल्यों का संगम बन गया है. गोबर की मूर्तियों की सादगी, पीतल की पारंपरिक शान, और सोना-चांदी की पूजन परंपरा है. वहीं गोबर से बनी मूर्तियां जहां ₹10 से ₹500 तक की कीमत में आम उपभोक्ता के लिए आसानी से उपलब्ध हैं. वहीं पीतल की मूर्तियां ₹100 से लेकर ₹10 लाख रुपये तक की रेंज में हैं, जिन्हें लोग लंबे समय तक सजावटी वस्तु के रूप में रखना पसंद करते हैं. दूसरी ओर, सोने और चांदी के सिक्कों की कीमतें धातु की कीमतों के साथ ऊपर बढ़ी हैं. चांदी ₹1.50 लाख प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि सोने के सिक्कों के दाम प्रति ग्राम ₹6,500 तक हैं.
तीनों श्रेणियों में ग्राहक अपनी बजट और मान्यता के अनुसार चुनाव कर रहे हैं. यह स्पष्ट है कि मुरादाबाद इस दीपावली केवल सजावट या ऐश्वर्य का नहीं, बल्कि परंपरा, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के तालमेल का प्रतीक बन गया है.
Dhanteras 2025: मुरादाबाद में पीतल की चमक, इन आइटम्स की बढ़ी डिमांड; बढ़ाई बाजार की रौनक
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