UP News: Disha Patani house firing case: बरेली पुलिस ने 70000 रुपये में खरीदा था ये ऐप, इसी की मदद से शूटरों तक पहुंची – INA


बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग को अंजाम देने वाले शूटरों ने पुलिस से अपनी पहचान छिपाने के लिए कई पैंतरे अपनाए थे. शूटरों तक पहुंचना बरेली पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी. ऐसे में पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया और सी-ट्रैस नामक ऐप की मदद ली. खास बात यह रही कि बरेली में यह ऐप पुलिस की ओर से पहली बार इस्तेमाल किया गया. इस ऐप के लिए पुलिस को 70 हजार रुपये खर्च करने पड़े.
दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग कांड के बाद पुलिस के पास शुरुआत में कोई ठोस सुराग नहीं था. काफी प्रयासों के बाद पुलिस को एक नाबालिग आरोपी का मोबाइल नंबर हाथ लगा. लेकिन उसकी असली पहचान निकालना आसान नहीं था, क्योंकि उसने आधार कार्ड पर गलत नाम दर्ज करा रखा था. जब पुलिस के हाथ कोई ठोस जानकारी नहीं लगी तो एसएसपी अनुराग आर्य ने तकनीकी विशेषज्ञों से चर्चा की और फिर पुलिस विभाग को सेवा देने वाली अधिकृत एजेंसी से संपर्क किया. वहीं से सी-ट्रैस ऐप खरीदा गया.
जैसे ही नाबालिग का नंबर ऐप पर सर्च किया गया, तुरंत उसकी पूरी जानकारी सामने आ गई. ऐप ने यह भी बता दिया कि आरोपी किसके साथ जुड़ा हुआ है, होटल में रहने के दौरान आसपास कौन-कौन से नंबर एक्टिव थे और उससे जुड़े अन्य साथी कौन हैं. इसी कड़ी से पुलिस को बाकी शूटरों का भी पता लग गया.
आधार कार्ड से लेकर सोशल मीडिया तक की जानकारी
इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह सिर्फ मोबाइल नंबर से आरोपी की गहराई तक जानकारी निकाल देता है. जब नाबालिग का नंबर सर्च किया गया तो 24 घंटे के भीतर पुलिस को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बनी नौ फर्जी आईडी मिल गई. इसके अलावा आरोपियों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट और सिम कार्ड की जानकारी भी सामने आ गई.
जांच में पता चला कि बदमाशों ने अपने असली आधार नंबरों के बीच कुछ डिजिट बदलकर नए नंबर बना रखे थे. लेकिन ऐप की मदद से उनके असली दस्तावेजों की पहचान भी हो गई. यहां तक कि ऐप ने यह भी बताया कि कौन सा सिम किस कंपनी का है, कब लिया गया और कब दूसरी कंपनी में पोर्ट कराया गया. इन सब जानकारियों ने पुलिस को आरोपियों तक सीधा पहुंचा दिया.
STF और दूसरी पुलिस टीमों को मिली मदद
बरेली पुलिस को जब ऐप से सही डेटा मिला तो उसे एसटीएफ और दूसरे राज्यों की पुलिस टीमों के साथ साझा किया गया. इसके बाद संयुक्त रूप से कार्रवाई की गई और आरोपियों तक पहुंचने में आसानी हुई. पुलिस का कहना है कि इस ऐप की वजह से ही आरोपियों की सही पहचान हो सकी और मुठभेड़ जैसी कार्रवाई संभव हुई.
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि इस केस के लिए ही सी-ट्रैस ऐप खरीदा गया था और बरेली में पहली बार इसका इस्तेमाल किया गया. ऐप से काफी मदद मिली और भविष्य में भी घटनाओं के खुलासे में इसका इस्तेमाल किया जाएगा.
वहीं दिशा पाटनी के घर फायरिंग जैसे संवेदनशील मामले में तकनीक ने बरेली पुलिस की बड़ी मदद की. सिर्फ एक ऐप ने नाबालिग आरोपी से लेकर पूरे गिरोह की सच्चाई सामने ला दी. यह केस पुलिस के लिए मिसाल बन गया कि अपराधियों तक पहुंचने के लिए अब आधुनिक तकनीक कितनी कारगर साबित हो रही है.
Disha Patani house firing case: बरेली पुलिस ने 70000 रुपये में खरीदा था ये ऐप, इसी की मदद से शूटरों तक पहुंची
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