UP News: ‘मैं जज हूं, 30 लाख का लोन चाहिए…’ पैसे ट्रांसफर करने से पहले बैंक को लग गई फर्जीवाड़े की भनक, महिला पहुंच गई जेल – INA

UP News: ‘मैं जज हूं, 30 लाख का लोन चाहिए…’ पैसे ट्रांसफर करने से पहले बैंक को लग गई फर्जीवाड़े की भनक, महिला पहुंच गई जेल – INA

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में बैंक की सतर्कता से एक बड़ा फर्जीवाड़ा होते-होते रह गया. यहां एचडीएफसी बैंक की सिविल लाइंस शाखा में खुद को जज बताकर 30 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेने पहुंची एक महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. महिला के साथ उसका फर्जी पेशकार और ड्राइवर भी गिरफ्तार हुआ है. पुलिस ने एक बेलेनो कार भी जब्त की है, जिस पर न्यायाधीश की नेमप्लेट और जज लिखा स्टिकर चिपका हुआ था.

जानकारी के मुताबिक, लगभग दस दिन पहले आयशा परवीन नाम की महिला बैंक में आई थी. उसने खुद को मुजफ्फरनगर निवासी और रामपुर जिले में तैनात सिविल जज बताया था. आयशा ने बैंक अधिकारियों को 30 लाख रुपये का पर्सनल लोन दिलाने के लिए आवेदन किया था. आवेदन के साथ उसने सेलरी स्लिप, नियुक्ति पत्र, बैंक स्टेटमेंट और अन्य जरूरी दस्तावेज भी जमा किए थे. उसके साथ बिजनौर के मंडावर क्षेत्र के किशनवास गांव का रहने वाला एक युवक अनस भी मौजूद था, जिसे उसने अपना पेशकार बताया था.

बैंक अफसरों को कैसे हुआ शक?

प्रारंभिक जांच में सब कुछ सामान्य लगा, जिसके बाद बैंक ने लोन प्रक्रिया पूरी कर ली. बैंक प्रबंधन ने शुक्रवार, 17 अक्टूबर को लोन की राशि उसके खाते में ट्रांसफर करने का आश्वासन दिया. लेकिन बैंक अधिकारियों को तब शक हुआ जब उन्होंने देखा कि आयशा परवीन की पोस्टिंग रामपुर में, सैलरी खाता देहरादून में और लोन आवेदन बिजनौर से किया गया है. इस जानकारी ने बैंक को सतर्क कर दिया.

एचडीएफसी बैंक ने देहरादून स्थित एक्सिस बैंक शाखा से आयशा के कथित सैलरी अकाउंट की जांच कराई. वहां से पता चला कि उस खाते में पिछले कई महीनों से कोई वेतन नहीं आया था. खाते में मात्र 40 हजार रुपये जमा थे, जबकि आयशा द्वारा दिए गए बैंक स्टेटमेंट में पांच लाख रुपये बैलेंस दिखाया गया था. इसके अलावा, उसकी 1.30 लाख रुपये की सेलरी स्लिप भी फर्जी पाई गई.

शुक्रवार को जब आयशा अपने पेशकार अनस और ड्राइवर के साथ बैंक पहुंची ताकि लोन की राशि निकाल सके, तो बैंक मैनेजर ने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी. पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तीनों को हिरासत में लेकर कोतवाली शहर थाने ले आई. पूछताछ में ड्राइवर ने बताया कि आयशा रामपुर की सरकारी जज कॉलोनी में रहती है और इस्तेमाल की गई कार उसके भाई की है, जिस पर फर्जी नेमप्लेट और जज का स्टिकर लगाया गया था.

क्या बोले एसपी?

एसपी सिटी कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि आयशा परवीन और अनस दोनों ने एक साथ देहरादून में एलएलबी की पढ़ाई की थी और ज्यूडिशियरी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. चयन न होने पर उन्होंने फर्जी जज बनकर बैंक से लोन ठगने की साजिश रची. बैंक वेरिफिकेशन में ही उनकी पोल खुल गई.

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और नकली पहचान पत्र बनाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या उन्होंने इसी तरीके से अन्य बैंकों में भी ठगी की कोशिश की थी.

‘मैं जज हूं, 30 लाख का लोन चाहिए…’ पैसे ट्रांसफर करने से पहले बैंक को लग गई फर्जीवाड़े की भनक, महिला पहुंच गई जेल




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