UP News: बादल फटने से नहीं तो कैसे आई धराली में तबाही? IIT कानपुर के प्रोफेसर ने बताई वजह – INA


उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में हाल ही में बादल फटने से प्रलय जैसे हालात बन गए हैं और पहाड़ के मलबे की वजह से पूरा गांव का नक्शा ही बदल गया है. इस फ्लैश फ्लड में कई लोगों की मौत हो गई है. आखिर ये मलबा गांव तक बहकर क्यों आया और इसके पीछे की वजह क्या था? इस तरह के तमाम सवाल लोगों के दिलों-दिमाग में उठ रहे हैं. ऐसे में आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर इन सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश की है.
आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस के प्रोफेसर जावेद एन मालिक बताते हैं कि धराली में कोई विशेष बारिश नहीं हुई थी. मौसम विभाग की रेनफॉल की रिपोर्ट के मुताबिक वहां पर इतनी बारिश नहीं हुई जिससे कि बादल फटने के हालात बन सकें. वहां की लैंड फॉर्म्स की स्टडी उन्होंने की है. वहां की भौगोलिक स्थिति डिपॉजिट की तरह बन गई है. प्रोफेसर ने कहा कि वहां पर लोगों को बसाने के लिए अनुमति सरकार को नहीं देनी चाहिए.
प्रोफेसर जावेद एन ने इसके पीछे की वजह भी बताई है. उन्होंने कहा है कि इस तरह के इलाके बेहद खतरनाक होते हैं. इन इलाकों में कभी भी और कहीं पर भी पानी का तेज बहाव आकर वहां रह रहे लोगों, वहां की आबादी को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे इलाकों में मल्टीपल वैल्युएबल फैन के हालात बने रहते हैं और कभी भी इस तरीके का तेज बहाव आ सकता है. जिसका अनुमान लगा पाना किसी भी मौसम विभाग के लिए मुश्किल है.
लोगों की बसाहट के लिए बहुत खतरनाक
अर्थ साइंस के प्रोफेसर जावेद एन ने कहा कि हम इसे आज के दौर में ग्लोब ग्लेशियर लेक आउट बर्स्ट फ्लड बोल सकते हैं. उत्तराखंड में बढ़ रहे इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सरकार को भविष्य में अलर्ट रहने की जरूरत है. जहां धराली स्थित है वह ड्रेन का एरिया कहा जा सकता है. उन्होंने बताया धराली में 2024 में और इस साल कोई विशेष बारिश नहीं हुई है. सैलाब आने की वजह ऊपर बनी झील का फटना है. झील का पानी अपने साथ बड़े-बड़े बोल्डर और मालबा लेकर आता है.
तीखी ढलानों से बढ़ जाती है मलबे की रफ्तार
मलबा जब पानी के साथ नीचे आता है तो वह हाथ वाले पंखे जैसी आकृति (एल्युवियल फैन) बनाते हैं. प्रोफेसर जावेद एन मालिक का कहना था कि सैटेलाइट तस्वीरों में इसे देखकर आसानी से समझा जा सकता है ऐसे इलाके बेहद आबादी के रहने के हिसाब बेहद खतरनाक होते हैं. धराली के ऊपर की तरफ बर्फ की चोटियां हैं. वहीं भागीरथ नदी में कई छोटी सहायक नदियां भी जाकर मिलती हैं. बिल्कुल तीखी ढलानों पर ऊपर से पानी बहुत ताकत से नीचे आया और उसने धराली में तबाही मचा दी. तकनीकी शब्दावली में इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहेंगे.
बादल फटने से नहीं तो कैसे आई धराली में तबाही? IIT कानपुर के प्रोफेसर ने बताई वजह
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