UP News: झोले में बेटे का शव, DM के पास लेकर पहुंचा पिता; कहा- साहब पैसे कम थे तो दुनिया में ‘जिंदा’ नहीं आ पाया – INA

UP News: झोले में बेटे का शव, DM के पास लेकर पहुंचा पिता; कहा- साहब पैसे कम थे तो दुनिया में ‘जिंदा’ नहीं आ पाया – INA

विपिन के हाथ में एक झोला है. इस झोले में कोई सामान नहीं, बल्कि एक लाश है. ये लाश उसके नवजात बेटे की है. जब वह दुनिया में नहीं आया था, तभी उसके इलाज के नाम पैसे का खेल चलने लगा. पिता से आठ हजार रुपए जमा करा लिए गए. पैसे कम थे तो मां की डिलीवरी नहीं की. हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया. दूसरे अस्पताल पहुंचते-पहुंचते दुनिया में आने से पहले नवजात मर गया. अब विपिन को इसी बात का गुस्सा है. शुक्रवार को विपिन ये झोला लेकर अधिकारियों के पास पहुंचा. साहब को अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते विपिन रोने लगा.

मामला लखीमपुर खीरी जिले का है. जिले के महेवागंज के गोलदार हॉस्पिटल में डिलीवरी के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई. पिता ने हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और हंगामा काटा. पिता बच्चे के शव को झोले में लेकर डीएम और एसपी के ऑफिस पहुंच गया. इससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया. सूचना पर सीएमओ, एसडीएम और कोतवाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए. सीएमओ ने हॉस्पिटल को सीज कर दिया है. पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है.

हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया

भीरा थाने के गांव नौसर जोगी निवासी विपिन गुप्ता की पत्नी गर्भवती थी. प्रसव पीड़ा होने पर उसको 21 अगस्त को गोलदार हॉस्पिटल महेवागंज में भर्ती कराया गया. पिता विपिन ने बताया कि हॉस्पिटल में आठ हजार रुपए जमा कराए. पैसे कम थे तो इलाज नहीं किया. हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया. महिला को सृजन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसने मृत बच्चे को जन्म दिया. इससे परिजन आक्रोशित हो गए.

पिता बच्चे को झोले में लेकर डीएम और एसपी के ऑफिस पहुंच गया. उसने गोलदार हास्पिल पर कार्रवाई की मांग की. झोले में बच्चा के शव को देखकर अधिकरियों में हड़कंप मच गया. सूचना पर सीएमओ, एसडीएम और कोतवाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए. स्वास्थ्य विभाग ने गोलदार हॉस्पिटल में जांच की. सीएमओ ने हॉस्पिटल को सीज कर दिया है.

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिए जांच के आदेश

वहीं मामले को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी संज्ञान लिया है. उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “लखीमपुर खीरी के ग्राम नौसर जोगी (भीरा) निवासी विपिन गुप्ता की गर्भवती पत्नी रूबी गुप्ता जी इलाज में लापरवाही किए जाने के प्रकरण की गंभीरता के दृष्टिगत महेवागंज के गोलदार अस्पताल को सील कर दिया गया है, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो. प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी गठित करते हुए उक्त प्रकरण में संलिप्त दोषी क्षेत्रीय आशा को नोटिस निर्गत कर स्पष्टीकरण मांगा गया है.”

“हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेश के हर नागरिक को उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराना है. किसी भी मरीज के इलाज में लापरवाही कतई स्वीकार नहीं की जाएगी. जांच कमेटी की रिपोर्ट आने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी. किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा. मेरे द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखीपुरखीरी को स्वयं की देखरेख में रूबी गुप्ता का निःशुल्क समुचित उपचार सुनिश्चित कराए जाने के आदेश दिए गए हैं.”

क्या बोला मृत नवजात बच्चे का पिता?

विपिन ने रोते हुए बताया कि उसने पत्नी की डिलीवरी थी. प्रसव का दर्द उठा तो वह गोलदार हॉस्पिटल लेकर पहुंचा. हॉस्पिटल में आठ हजार रुपए जमा भी करा लिए और कहा कि और पैसों का इंतजाम करो. वह पैसे की व्यवस्था कर रहा था. हॉस्पिटल वालों को इलाज करने के लिए बोला, लेकिन उन लोगों ने इनकार कर दिया. कहा कि पहले पैसा लाओ. कुछ देर बाद जब पत्नी की हालत गंभीर हुई तो दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया. तब तक पेट में मासूम की जान जा चुकी थी. अब पत्नी की भी हालत गंभीर है.

झोले में बेटे का शव, DM के पास लेकर पहुंचा पिता; कहा- साहब पैसे कम थे तो दुनिया में ‘जिंदा’ नहीं आ पाया




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UP News: झोले में बेटे का शव, DM के पास लेकर पहुंचा पिता; कहा- साहब पैसे कम थे तो दुनिया में ‘जिंदा’ नहीं आ पाया – INA

विपिन के हाथ में एक झोला है. इस झोले में कोई सामान नहीं, बल्कि एक लाश है. ये लाश उसके नवजात बेटे की है. जब वह दुनिया में नहीं आया था, तभी उसके इलाज के नाम पैसे का खेल चलने लगा. पिता से आठ हजार रुपए जमा करा लिए गए. पैसे कम थे तो मां की डिलीवरी नहीं की. हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया. दूसरे अस्पताल पहुंचते-पहुंचते दुनिया में आने से पहले नवजात मर गया. अब विपिन को इसी बात का गुस्सा है. शुक्रवार को विपिन ये झोला लेकर अधिकारियों के पास पहुंचा. साहब को अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते विपिन रोने लगा.

मामला लखीमपुर खीरी जिले का है. जिले के महेवागंज के गोलदार हॉस्पिटल में डिलीवरी के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई. पिता ने हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और हंगामा काटा. पिता बच्चे के शव को झोले में लेकर डीएम और एसपी के ऑफिस पहुंच गया. इससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया. सूचना पर सीएमओ, एसडीएम और कोतवाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए. सीएमओ ने हॉस्पिटल को सीज कर दिया है. पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है.

हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया

भीरा थाने के गांव नौसर जोगी निवासी विपिन गुप्ता की पत्नी गर्भवती थी. प्रसव पीड़ा होने पर उसको 21 अगस्त को गोलदार हॉस्पिटल महेवागंज में भर्ती कराया गया. पिता विपिन ने बताया कि हॉस्पिटल में आठ हजार रुपए जमा कराए. पैसे कम थे तो इलाज नहीं किया. हालत बिगड़ने पर रेफर कर दिया. महिला को सृजन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसने मृत बच्चे को जन्म दिया. इससे परिजन आक्रोशित हो गए.

पिता बच्चे को झोले में लेकर डीएम और एसपी के ऑफिस पहुंच गया. उसने गोलदार हास्पिल पर कार्रवाई की मांग की. झोले में बच्चा के शव को देखकर अधिकरियों में हड़कंप मच गया. सूचना पर सीएमओ, एसडीएम और कोतवाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए. स्वास्थ्य विभाग ने गोलदार हॉस्पिटल में जांच की. सीएमओ ने हॉस्पिटल को सीज कर दिया है.

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिए जांच के आदेश

वहीं मामले को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी संज्ञान लिया है. उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “लखीमपुर खीरी के ग्राम नौसर जोगी (भीरा) निवासी विपिन गुप्ता की गर्भवती पत्नी रूबी गुप्ता जी इलाज में लापरवाही किए जाने के प्रकरण की गंभीरता के दृष्टिगत महेवागंज के गोलदार अस्पताल को सील कर दिया गया है, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो. प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी गठित करते हुए उक्त प्रकरण में संलिप्त दोषी क्षेत्रीय आशा को नोटिस निर्गत कर स्पष्टीकरण मांगा गया है.”

“हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदेश के हर नागरिक को उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराना है. किसी भी मरीज के इलाज में लापरवाही कतई स्वीकार नहीं की जाएगी. जांच कमेटी की रिपोर्ट आने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी. किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा. मेरे द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखीपुरखीरी को स्वयं की देखरेख में रूबी गुप्ता का निःशुल्क समुचित उपचार सुनिश्चित कराए जाने के आदेश दिए गए हैं.”

क्या बोला मृत नवजात बच्चे का पिता?

विपिन ने रोते हुए बताया कि उसने पत्नी की डिलीवरी थी. प्रसव का दर्द उठा तो वह गोलदार हॉस्पिटल लेकर पहुंचा. हॉस्पिटल में आठ हजार रुपए जमा भी करा लिए और कहा कि और पैसों का इंतजाम करो. वह पैसे की व्यवस्था कर रहा था. हॉस्पिटल वालों को इलाज करने के लिए बोला, लेकिन उन लोगों ने इनकार कर दिया. कहा कि पहले पैसा लाओ. कुछ देर बाद जब पत्नी की हालत गंभीर हुई तो दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया. तब तक पेट में मासूम की जान जा चुकी थी. अब पत्नी की भी हालत गंभीर है.

झोले में बेटे का शव, DM के पास लेकर पहुंचा पिता; कहा- साहब पैसे कम थे तो दुनिया में ‘जिंदा’ नहीं आ पाया




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