UP News: भारत का ‘शेर’, एक मिनट में 600 राउंड, खोल देगा दुश्मन की खोपड़ी… अमेठी में बनी AK-203 है बेहद खास – INA

UP News: भारत का ‘शेर’, एक मिनट में 600 राउंड, खोल देगा दुश्मन की खोपड़ी… अमेठी में बनी AK-203 है बेहद खास – INA

‘कुर्बान हुआ तेरी अस्मत पे, मैं कितना नसीबों वाला था…’ केसरी मूवी के ‘तेरी मिट्टी’ गाने की ये लाइनें शायद हर फौजी भारत माता के लिए गुनगुनाता है. फौजी इस देश को देश की तरह नहीं बल्कि घर की तरह समझता है और जब इस पर कोई खतरा मंडराए तो उसे जड़ से उखाड़ने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा देता है. ऐसे में सोचिए कि उसके हाथों में ताकत और दे दी जाए तो किसी भी मुसीबत में परिणाम भी बदल सकते हैं.

कुछ ऐसी ही एक ताकत भारतीय सैनिकों के हाथ में दिखाई दे रही है जिसका नाम है AK 203 रायफल. ये राइफल अपनी खासियतों की वजह से पूरी दुनिया की सबसे बेहतरीन राइफलों में शुमार हो रही है. भारतीय सेना के जवानों को अब तक 48,000 राइफलें दी जा चुकी हैं और अभी तक किसी भी तरह की शिकायतें इस ‘मेड इन इंडिया’ राइफल के बारे में दर्ज नहीं की गईं हैं. जो इस राइफल को सबसे खास बना रही है.

अमेठी के कारखाने में बन रही इस AK 203 राइफल की चर्चा न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों तक में हो रही है. ये खास राइफल इंडो रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) अमेठी में बनाई जा रही है. इस ‘मेड इन इंडिया’ राइफल की कई खासियतें हैं. इसकी इंपोर्टेंस इस बात से ही समझी जा सकती है कि इसका निर्माण 18 महीने पहले ही शुरू हुआ था और अब तक भारतीय सैनिकों के हाथों में 48000 राइफलें दी जा चुकी हैं लेकिन बावजूद इसके अब तक इसमें किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं की गई है.

‘शेर’ नाम से होगी पहचान

इस साल 15 अगस्त तक सेना को करीब 7000 राइफलें और डिलीवर की जाएंगी. फिलहाल IRRPL ने रूस के साथ 100% टीओटी यानी तकनीक ट्रांसफर कर लिया है. अभी 50% स्वदेशीकरण हो चुका है. अक्टूबर तक 70% और इस साल के खत्म होने तक 100% हो जाएगा. जैसे ही यह राइफल पूरी तरह से स्वदेशी होगी इसके बाद इसे ‘शेर’ नाम से जाना जाएगा. पूरी तरह से जब यह राइफल स्वदेशी हो जाएगी इसके बाद हर महीने 12000 यूनिट्स बनाई जाएंगी. इस आंकड़े को ऐसे समझा जा सकता है कि करीब हर 100 सेकंड में एक राइफल बनाई जाएगी.

2030 तक 6 लाख राइफलों का टारगेट

AK 203 राइफल भारत की आत्मरक्षा की ओर एक बहुत बड़ा कदम है. 2030 तक भारतीय सैनिकों के पास 6 लाख से ज्यादा ये राइफलें मौजूद होंगी. स्वदेशी होने के बाद हर साल करीब डेढ़ लाख राइफलों का निर्माण किया जाएगा. सरकार ने 2032 तक 6 लाख राइफल बनाने का टारगेट दिया था जिसे करीब 22 महीने पहले ही पूरा कर लिया जाएगा और 2030 तक करीब 6 लाख राइफलें पहुंच जाएंगी. यह पूरी परियोजना करीब 5,200 करोड़ रुपये की है और इसे उत्तर प्रदेश अमेठी में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत शुरू किया गया है.

इतिहास की बात करें तो AK 203 राइफल सबसे पहले कोरवा प्लांट में तैयार की गई थी. इस राइफल में कई खूबियां हैं जो इसे बाकियों से बेहतर बनाती हैं. यह वजन में हल्की, टिकाऊ और सभी तरह के मौसम में अपने लक्ष्य को भेदने के लिए सक्षम है. इस राइफल को बनाने के लिए सारा रॉ मटेरियल अब इंडिया से ही लिया जा रहा है. बता दें कि यह वही कोरवा प्लांट है जो कि देश में छोटे हथियारों की टेस्टिंग के लिए जाना जाता है. आने वाले समय में भारतीय सेना INSAS राइफलों को पूरी तरह से AK 203 राइफलों से रिप्लेस कर सकती है.

भारत का ‘शेर’, एक मिनट में 600 राउंड, खोल देगा दुश्मन की खोपड़ी… अमेठी में बनी AK-203 है बेहद खास




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