UP News: सुदामा के लिए ‘कृष्ण’ बने कानपुर DM, 29 साल से रुका था GPF का पैसा; ब्याज सहित दिलाए 3 लाख रुपए – INA


करीब तीन दशक से अधिक समय तक चली जद्दोजहद का सुखद अंत आखिरकार 18 अगस्त को हो गया. 89 वर्षीय सेवानिवृत्त संग्रह सेवक सुदामा प्रसाद को उनकी मेहनत की कमाई ब्याज सहित मिल गई. यह संभव हो पाया जिलाधिकारी कानपुर नगर जितेंद्र प्रताप सिंह की सक्रियता और संवेदनशील पहल से. उन्होंने महज छह महीने में सालों से लंबित प्रकरण को सुलझाकर सुदामा को न्याय दिलाया.
दरअसल, 1996 से सुदामा प्रसाद का सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) भुगतान अटका हुआ था. लगभग तीन दशक तक वह लगातार दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल सका. कई बार अधिकारी बदले, फाइलें चलीं और लौटीं, नियमावलियां टटोलने के बाद भी भुगतान संभव नहीं हुआ. खास बात यह रही कि इस दौरान सुदामा ने कभी कोर्ट का सहारा नहीं लिया, बल्कि धैर्य के साथ प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखा.
1995 में हुई सुदामा की पत्नी की मौत
मामले की जड़ एक अभिलेखीय कमी में छिपी थी. पारिवारिक न्यायालय बांदा ने सुदामा को पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन 1995 में पत्नी का निधन हो चुका था. यह तथ्य अभिलेखों में दर्ज न हो पाने से भुगतान सालों तक लंबित रहा. इसी साल फरवरी में जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान सुदामा ने जिलाधिकारी को अपनी परेशानी के बारे में बताया. साधारण वेशभूषा, हाथ में पुरानी फाइल और आंखों में उम्मीद लिए बैठे इस बुजुर्ग की बात सुनकर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह तुरंत हरकत में आए.
बुजुर्ग को मिला रुका हुआ पैसा
उन्होंने संबंधित अभिलेख मंगाए, बांदा से आवश्यक रिकॉर्ड तलब किया और मामले की गहन जांच कराई. कोषाधिकारी और उपजिलाधिकारी की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि सुदामा को ब्याज सहित पूरा पैसा मिलना चाहिए. सामान्य भविष्य निधि नियमावली 1985 के तहत आदेश जारी किए गए और जिलाधिकारी ने स्वयं इसकी प्रगति पर लगातार नजर बनाए रखी. आखिरकार 18 अगस्त को तीन लाख सात हजार रुपये ब्याज सहित उनके खाते में पहुंच गए.
बुजुर्ग ने क्या कहा?
खाते में रुका हुआ पैसा आने की जानकारी होते ही बुजुर्ग सुदामा की आंखें नम हो गईं. हालांकि, इस दौरान उनके चेहरे पर एक सुकून भर मुस्कान था. 29 साल बाद उन्हें जीपीएफ का पैसा मिला. इसके बाद उन्होंने डीएम कार्यालय पहुंचकर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह और एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी का आभार व्यक्त किया. इस दौरान सुदामा ने कहा कि ‘देर है, पर अंधेर नहीं’. आगे बुजुर्ग ने कहा कि उनके यह पैसा केवर रकम नहीं है, बल्कि आत्मसम्मान और विश्वास की वापसी भी है.
सुदामा के लिए ‘कृष्ण’ बने कानपुर DM, 29 साल से रुका था GPF का पैसा; ब्याज सहित दिलाए 3 लाख रुपए
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