UP News: कानपुर म्योर मिल अब सरकारी, 164 साल बाद लीज हुई खत्म; सरकार के पास वापस आई जमीन – INA


उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के सिविल लाइन्स में स्थित ऐतिहासिक म्योर मिल की विशाल जमीन अब राज्य सरकार के पूर्ण नियंत्रण में वापस आ गई है. लगभग 15 हेक्टेयर (डेढ़ लाख वर्ग मीटर) क्षेत्रफल वाली इस संपत्ति पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की मंजूरी के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व (प्रभारी अधिकारी नजूल) के आदेश से पुनर्प्रवेश की कार्यवाही पूरी कर ली गई है. इस भूमि को अब ‘अनावंटित सरकारी भूमि’ घोषित कर दिया गया है और परिसर में पुनर्प्रवेश का बोर्ड भी लगा दिया गया है. यह कदम शहर के विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि अब इस जमीन का उपयोग मंडलीय कार्यालयों और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए किया जा सकेगा.
म्योर मिल की यह जमीन शहर की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी कहानी ब्रिटिश काल से जुड़ी हुई है. नजूल अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1861 में इसे पहली बार ‘द कानपुर म्योर मिल’ को लीज पर आवंटित किया गया था. उस समय यह भूमि कपड़ा उद्योग के लिए उपयोग में लाई गई थी. 1930 के दशक में लीज का नवीनीकरण हुआ, और लगभग डेढ़ सदी तक यह टेक्सटाइल इकाइयों का केंद्र बनी रही.
हालांकि, मिलों के बंद होने के बाद परिसर के कई हिस्से लंबे समय से खाली पड़े थे और अवैध कब्जों का शिकार हो चुके थे. नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) द्वारा न तो लीज अवधि का नवीनीकरण कराया गया और न ही बकाया किराया जमा किया गया. सत्यापन समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से पाया गया कि जिस उद्देश्य से यह भूमि दी गई थी, वह अब पूरा नहीं हो रहा है.
इसलिए लिया ये फैसला
इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. 8 अक्टूबर 2025 को शासन स्तर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि यह भूमि राज्य सरकार की संपत्ति है और पुनर्प्रवेश की प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी. जिलाधिकारी के निर्देश पर सहायक प्रभारी अधिकारी (नजूल) और तहसीलदार सदर को भूमि के रखरखाव और व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब इस संपत्ति का उपयोग शहर के विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए किया जाएगा. जैसे मंडलीय कार्यालयों का निर्माण, सार्वजनिक सुविधाएं और अन्य शासकीय परियोजनाएं. इससे न केवल शहरवासियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, बल्कि कानपुर के औद्योगिक इतिहास को संरक्षित करते हुए आधुनिक विकास को गति भी मिलेगी.
जनहित परियोजनाओं में होगी इस्तेमाल
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “शहर के बीचों-बीच स्थित यह बड़ी भूमि लंबे समय से निष्प्रयोज्य थी. अब पुनर्प्रवेश की कार्यवाही के बाद यह जमीन राज्य सरकार के नियंत्रण में सुरक्षित हो गई है. इस ऐतिहासिक संपत्ति का उपयोग आने वाले समय में मंडलीय कार्यालय और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में होगा. जिससे शहरवासियों को सीधा लाभ मिलेगा और विकास को नई गति मिलेगी.” उनके अनुसार यह कदम शहर की बेकार पड़ी संपत्तियों को उपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
कानपुर म्योर मिल अब सरकारी, 164 साल बाद लीज हुई खत्म; सरकार के पास वापस आई जमीन
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