UP News: कानपुर को फिर मिलेगा मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट का दर्जा, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार – INA


कानपुर को एक समय मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट कहा जाता था. उसका सबसे बड़ा कारण था. यहां पर मौजूद मिलें, जो ना सिर्फ हजारों लोगों को रोजगार देती थीं बल्कि, यहां से बनने वाला सामान पूरी दुनिया में जाता था. यहां की मिलों की वजह से ही इसको मैनचेस्टर कहा जाने लगा और कानपुर न सिर्फ उत्तर प्रदेश का बल्कि पूरे देश का एक प्रमुख औद्यौगिक शहर बन गया.
वैसे तो कानपुर में सबसे पहले अंग्रेजों की फौज ने अपनी छावनी बनाई थी, लेकिन उसके बाद मिलों का दौर आया, जिसने कानपुर का नाम पूरे विश्व में रोशन कर दिया. अब यही मिलें बरसों से बंद पड़ी हैं. यहां काम करने वाले ज्यादातर मजदूर कहीं और अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं. मिलों को फिर से शुरू करने के सभी प्रयास लगभग असफल हो चुके हैं. ऐसे में इनकी जमीनें भी बिना किसी इस्तेमाल के पड़ी हैं, जिनकी आज की कीमत खरबों में हैं.
20 साल से 11 मिलों पर लगा ताला
कानपुर में कुल 11 मिलें हैं, जो तकरीबन 20 सालों से बंद हैं. इसमें से पांच मिलें एनटीसी (राष्ट्रीय वस्त्र निगम लिमिटेड) की हैं, जबकि पांच मिलें ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन की हैं. एक मिल टेनरी और फुटवियर कॉरपोरेशन की है. जानकारों का मानना है कि इसमें से ज्यादातर मिलें अब शुरू नहीं हो सकतीं और इसका सबसे बड़ा कारण पर्यावरण और आधुनिक तकनीक है.
ये सभी मिलें शहर के बीचों बीच स्थित हैं, ऐसे में इनको चलाने से पर्यावरण पर भारी असर पड़ेगा और शहर के लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा. इसके अलावा अब आधुनिक दौर में ज्यादा उत्पादन करने वाली छोटी और ऑटोमेटिक मशीनें आ चुकी हैं, जिसका मुकाबला यह मिलें नहीं कर पाएंगी. इन मिलों को बंद हुए तकरीबन 20 साल हो चुके हैं और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लालफीताशाही और यूनियनबाजी रही.
252 एकड़ जमीन में बनीं है ये मिलें
अगर इन सभी मिलों की जमीन को मिलकर देखा जाए तो तकरीबन 252 एकड़ जमीन इन मिलों के पास हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि आज यह सभी जमीन शहर के बीचों बीच हैं, जिसकी कीमत खरबों में है. एनटीसी के अधीन म्योर मिल, न्यू विक्टोरिया मिल, स्वदेशी कॉटन मिल, अथर्टन मिल, लक्ष्मी रतन कॉटन मिल हैं. इन पांचों मिलों की जमीन 6,02,231 वर्ग मीटर यानी 148 एकड़ है. साथ ही एनटीसी के पास सिविल लाइंस में बड़े कार्यालय परिसर भी हैं.
बीआइसी के पास लाल इमली, कानपुर टेक्सटाइल, एल्गिन नंबर एक, एल्गिन नंबर दो और ब्रश वेयर मिलों की कुल जमीन 3,67,127 वर्ग मीटर यानी 89.9 एकड़ है. इनसे हटकर वीआईपी रोड जैसी प्राइम लोकेशन पर टैफ्को भी है, जिसमें कभी सैनिकों के लिए जूते बनते थे. यहां की 58,270.43 वर्ग मीटर यानी 14.39 एकड़ जमीन किसी प्रयोग में नहीं आ रही है. सभी बंगले बंद पड़े हुए हैं और मिलों की हालत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. मात्र चिमनियों को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर कभी मिलें हुआ करती थीं.
मिलों को लेकर समाज में अलग-अलग राय
अब मिलें तो चल नहीं रही हैं, ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर इन मिलों का क्या किया जाए? क्या इनको फिर से शुरू किया जाए या फिर इन जमीनों का अलग इस्तेमाल किया जाए. अधिवक्ता विजय बक्शी ने कहा कि इन जमीनों पर आवासीय के साथ ऐसे व्यावसायिक व्यापार शुरू किए जा सकते हैं जिससे रोजगार मिले. युवा अधिवक्ता मयूरी मानती हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन मिलों को फिर से शुरू करना चाहिए. अगर सरकार चाहे तो सभी रास्ते निकाले जा सकते हैं. लाल इमली कर्मचारी यूनियन के नेता अजय सिंह कहते हैं कि मिलों में उत्पादन फिर से शुरू किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि प्रदूषण के लिए ईटीपी प्लांट लगाया जा सकता है. अजय सिंह ने कहा कि यहां पर उत्पादन शुरू करके देश के सैनिकों और अस्पतालों के लिए सामान बनाया जा सकता है.
युवाओं को फिर से मिलेगा रोजगार
इस संबंध में कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में पीएम मोदी और सीएम योगी से बात हुई है और इसका रास्ता जल्द ही निकल आएगा. उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार से इस संबंध में बात हुई है. यह प्रस्ताव रखा गया है कि राज्य सरकार इन जमीनों को ले और यहां पर व्यावसायिक काम शुरू हो, जिससे युवाओं को रोजगार मिले. सांसद रमेश अवस्थी ने बताया कि लाल इमली को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव है.
इसके अलावा अगर कोई मिल शुरू होने की अवस्था में दिखाई पड़ी तो उसको शुरू किया जाएगा वर्ना लाल इमली को छोड़कर सभी मिल की जगहों पर आईटी हब या इसी तरह के अन्य व्यावसायिक उपक्रम शुरू किया जाएगा, जिससे प्रदूषण भी ना हो और युवाओं को रोजगार भी मिले. सांसद रमेश अवस्थी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, पीएम मोदी और सीएम योगी से इस संबंध में बात की गई है. कई दौर की बैठक हो भी चुकी है. उनका पूरा प्रयास है कि जल्द से जल्द इन जमीनों पर नए व्यावसायिक उपक्रम शुरू हो सके.
कानपुर को फिर मिलेगा मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट का दर्जा, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
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